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देश के लिए पति की शहादत पर गुरमीत कौर को है गर्व
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कारगिल विजय दिवस विशेष
देश के लिए पति की शहादत पर गुरमीत कौर को है गर्व
बोलीं - पति की वजह से ही मिल रहा सम्मान
कारगिल युद्ध के दौरान सुरेंद्र सिंह लवाणा ने पाई थी वीरगति
फोटो 25 पीबीटीपी 19, 20
संवाद न्यूज एजेंसी
पूरनपुर। सुरेंद्र सिंह लवाणा तो 21 साल पहले वतन की आन बान और शान की रक्षा के लिए कारगिल में शहीद हो गए। मगए उनकी पत्नी गुरमीत कौर और पुत्र-पुत्रियों को देश के लिए सुरेंद्र सिंह के शहीद होने पर आज भी गर्व है। गुरमीत कहतीं है कि पति के त्याग की वजह से आज समाज में उनको सम्मान मिल रहा है।
क्षेत्र के गांव रुदपुर हरीपुर में बलागर सिंह के घर चार जनवरी 1961 को जन्मे सुरेंद्र सिंह लवाणा 18 अगस्त 1989 में सेना की सिख रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ने को भारतीय सेना के ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन रक्षक के तहत जम्मू कश्मीर के द्रास सेक्टर में उनकी तैनाती की गई थी। दस दिन के भीतर पाकिस्तानी घुसपैठियों से सिख रेजीमेंट की तीन मुठभेड़ हुई। 29 मई 1999 को वतन की रक्षा को सुरेंद्र सिंह लवाणा शहीद हो गए थे। सुरेंद्र सिंह को उच्च सेवा मेडल, सिंह सेवा मेडल से पुरस्कृत किया गया था। शहीद की पत्नी गुरमीत कौर ने पति की मौत के दुख को बर्दाश्त करते हुए पूरा ध्यान बच्चों की परवरिश पर लगा दिया। लवाणा अक्सर कहा करते थे कि अपने दोनों बेटों को फौज में भर्ती कराएंगे। पति की शहादत के बाद गुरमीत ने बेटों को बचपन से ही फौज में शामिल होने की प्रेरणा दी। सेना के कुछ अफसर उनके दोनों बेटों को सैनिक स्कूल में भर्ती कराने को अपने साथ ले गए थे। हालांकि सैनिक स्कूल का अनुशासन और कड़ा नियम दोनों को रास नहीं आया और वापस घर लौट आए। शहीद की याद आते ही उनके परिजनों के दिल में आज भी टीस होती है। गुरमीत कौर कहती है कि पति के शहीद होने पर गर्व है। पति की वजह से आज समाज में उनको सम्मान मिल रहा है।
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हादसे में चली गई बड़े बेटे की जान
पूरनपुर। शहीद के परिवार में पत्नी के अलावा पुत्र रेशम सिंह, पुत्रवधू, पौत्री जैयस, वानी, परी, बड़े पुत्र सुखविंदर सिंह की विधवा पत्नी सतनाम कौर, पौत्र गुरप्रीत सिंह, वीरेंद्र सिंह, पुत्री नरेंद्र कौर और पलविंदर कौर है। बड़ी पुत्री नरेंद्र कौर की शादी हो चुकी है। बड़े पुत्र सुखविंदर सिंह की करीब आठ साल पहले एक हादसे में जान चली गई थी।
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पिता के अलावा दो भाइयों ने फौज में रहकर की देश सेवा
पूरनपुर। शहीद सुरेंद्र सिंह लवाणा के पिता बलागर सिंह, सबसे बड़े भाई रंजीत सिंह, अमरजीत सिंह ने भी फौज में रहकर देश की सेवा की। शहीद से बड़े भाई गुरमेज सिंह, छोटे भाई कृपाल सिंह, सतनाम सिंह घर में रहकर खेती का कार्य देखते है।
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देश के लिए पति की शहादत पर गुरमीत कौर को है गर्व
बोलीं - पति की वजह से ही मिल रहा सम्मान
कारगिल युद्ध के दौरान सुरेंद्र सिंह लवाणा ने पाई थी वीरगति
फोटो 25 पीबीटीपी 19, 20
संवाद न्यूज एजेंसी
पूरनपुर। सुरेंद्र सिंह लवाणा तो 21 साल पहले वतन की आन बान और शान की रक्षा के लिए कारगिल में शहीद हो गए। मगए उनकी पत्नी गुरमीत कौर और पुत्र-पुत्रियों को देश के लिए सुरेंद्र सिंह के शहीद होने पर आज भी गर्व है। गुरमीत कहतीं है कि पति के त्याग की वजह से आज समाज में उनको सम्मान मिल रहा है।
क्षेत्र के गांव रुदपुर हरीपुर में बलागर सिंह के घर चार जनवरी 1961 को जन्मे सुरेंद्र सिंह लवाणा 18 अगस्त 1989 में सेना की सिख रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ने को भारतीय सेना के ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन रक्षक के तहत जम्मू कश्मीर के द्रास सेक्टर में उनकी तैनाती की गई थी। दस दिन के भीतर पाकिस्तानी घुसपैठियों से सिख रेजीमेंट की तीन मुठभेड़ हुई। 29 मई 1999 को वतन की रक्षा को सुरेंद्र सिंह लवाणा शहीद हो गए थे। सुरेंद्र सिंह को उच्च सेवा मेडल, सिंह सेवा मेडल से पुरस्कृत किया गया था। शहीद की पत्नी गुरमीत कौर ने पति की मौत के दुख को बर्दाश्त करते हुए पूरा ध्यान बच्चों की परवरिश पर लगा दिया। लवाणा अक्सर कहा करते थे कि अपने दोनों बेटों को फौज में भर्ती कराएंगे। पति की शहादत के बाद गुरमीत ने बेटों को बचपन से ही फौज में शामिल होने की प्रेरणा दी। सेना के कुछ अफसर उनके दोनों बेटों को सैनिक स्कूल में भर्ती कराने को अपने साथ ले गए थे। हालांकि सैनिक स्कूल का अनुशासन और कड़ा नियम दोनों को रास नहीं आया और वापस घर लौट आए। शहीद की याद आते ही उनके परिजनों के दिल में आज भी टीस होती है। गुरमीत कौर कहती है कि पति के शहीद होने पर गर्व है। पति की वजह से आज समाज में उनको सम्मान मिल रहा है।
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हादसे में चली गई बड़े बेटे की जान
पूरनपुर। शहीद के परिवार में पत्नी के अलावा पुत्र रेशम सिंह, पुत्रवधू, पौत्री जैयस, वानी, परी, बड़े पुत्र सुखविंदर सिंह की विधवा पत्नी सतनाम कौर, पौत्र गुरप्रीत सिंह, वीरेंद्र सिंह, पुत्री नरेंद्र कौर और पलविंदर कौर है। बड़ी पुत्री नरेंद्र कौर की शादी हो चुकी है। बड़े पुत्र सुखविंदर सिंह की करीब आठ साल पहले एक हादसे में जान चली गई थी।
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पिता के अलावा दो भाइयों ने फौज में रहकर की देश सेवा
पूरनपुर। शहीद सुरेंद्र सिंह लवाणा के पिता बलागर सिंह, सबसे बड़े भाई रंजीत सिंह, अमरजीत सिंह ने भी फौज में रहकर देश की सेवा की। शहीद से बड़े भाई गुरमेज सिंह, छोटे भाई कृपाल सिंह, सतनाम सिंह घर में रहकर खेती का कार्य देखते है।