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बाघ मित्रों के सहयोग से बेहतर होगी वन और वन्यजीवों की सुरक्षा
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पीलीभीत। वन और वन्यजीवों की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए अफसर लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए अब बाघ मित्र बनाने की कवायद शुरू की गई है। टाइगर रिजर्व की प्रत्येक रेंज से सात गांवों को शामिल किया जा रहा है। प्रत्येक गांव से तीन लोगों को बाघ मित्र बनाया जाएगा। इस तरह 35 गांवों के 70 लोगों को इसमें जोड़ा जाएगा। विभाग की ओर से इन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें वन और वन्यजीवों की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी साझा की जाएगी। अफसरों के निर्देश के बाद चयन प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जिले के जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिले पांच साल बीत चुके है, लेकिन व्यवस्था आज भी अधूरी है। संसाधनों के साथ फील्ड स्टाफ के कमी वन और वन्यजीवों की सुरक्षा में रोड़ा बनी हुई है। हालांकि अफसर मौजूद इंतजामों से ही जंगल की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के प्रयास कर रहे है। वहीं बढ़ती संख्या के चलते बाघ, तेंदुए जंगल से बाहर की ओर रुख कर रहे है। जिसके चलते मानव वन्यजीव संघर्ष की स्थिति बनी रहते है। वहीं वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है। इस सबके के चलते आबादी क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा व जंगल में अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए अब नई शुरुआत की गई है। इसके लिए अब बाघ मित्रों का सहयोग लिया जाएगा। अफसरों के निर्देश पर प्रत्येक रेंज के नौ गांवों को शामिल किया जाएगा। एक गांव से तीन ग्रामीण बाघ मित्र बनाए जाएंगे। ऐसे करीब 35 गांवों के 70 ग्रामीण बाघ मित्र बनाए जाएंगे। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभागीय स्तर से बाघ मित्रों को ट्रेनिंग दी जाएगी।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डीएफओ नवीन खंडेलवाल का कहना है कि वन और वन्यजीवों की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए बाघ मित्र रखे जा रहे हैं। सभी रेंजों के 35 गांवों में से 70 ग्रामीणों को शामिल किया जाएगा। इसपर अमल शुरू कर दिया गया है।
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जिले के जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिले पांच साल बीत चुके है, लेकिन व्यवस्था आज भी अधूरी है। संसाधनों के साथ फील्ड स्टाफ के कमी वन और वन्यजीवों की सुरक्षा में रोड़ा बनी हुई है। हालांकि अफसर मौजूद इंतजामों से ही जंगल की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के प्रयास कर रहे है। वहीं बढ़ती संख्या के चलते बाघ, तेंदुए जंगल से बाहर की ओर रुख कर रहे है। जिसके चलते मानव वन्यजीव संघर्ष की स्थिति बनी रहते है। वहीं वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है। इस सबके के चलते आबादी क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा व जंगल में अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए अब नई शुरुआत की गई है। इसके लिए अब बाघ मित्रों का सहयोग लिया जाएगा। अफसरों के निर्देश पर प्रत्येक रेंज के नौ गांवों को शामिल किया जाएगा। एक गांव से तीन ग्रामीण बाघ मित्र बनाए जाएंगे। ऐसे करीब 35 गांवों के 70 ग्रामीण बाघ मित्र बनाए जाएंगे। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभागीय स्तर से बाघ मित्रों को ट्रेनिंग दी जाएगी।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डीएफओ नवीन खंडेलवाल का कहना है कि वन और वन्यजीवों की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए बाघ मित्र रखे जा रहे हैं। सभी रेंजों के 35 गांवों में से 70 ग्रामीणों को शामिल किया जाएगा। इसपर अमल शुरू कर दिया गया है।
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