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कमजोर मानसून से किसान परेशान, ताक रहे आसमान
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पीलीभीत। आसमान पर भले ही बादलों की आवाजाही बनी हो पर बिन बरसात के निकलने वाले इन बादलों के कारण खरीफ की फसल पर संकट के बादल जरूर मंडराने लगे हैं। जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं।
जिले का लगभग 80 प्रतिशत किसान बारिश पर निर्भर है। पिछले वर्ष खरीफ सीजन में इस समय तक बुवाई लगभग पूरी हो चुकी थी, लेकिन इस बार मौसम की बेरुखी से खेतों में जुताई का काम पूरा नहीं हो सका है। इस बार जुलाई माह की शुरुआत में ही बारिश होने से किसानों में उम्मीद जगी थी कि अबकी बार उनकी खरीफ की फसल ठीक होगी। जिस पर किसानों ने खाद बीज का इंतजाम कर खेतों की जुताई व बुआई की शुरुआत कर दी थी। लेकिन आगे मानसून कमजोर होने और तापमान में कोई खास कमी न आने से बोई गई फसल अच्छी बारिश नहीं होने के कारण खराब होने लगी है। अगस्त माह शुरू हो गया है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले अब तक आधी बारिश नहीं हुई है। जिससे कई किसानों की बुवाई पर पानी फिर गया है। आसमान की ओर निहार कर थक चुका कुछ किसानों ने तो आंखों के सामने फसल को खराब होते देख खेत को बिखेरना भी शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि जो हुआ सो हुआ अब आगे की तैयारी के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। इस बार अब तक जिले में सिर्फ 30 एमएम बारिश होना बताया गया है।
धान की बुवाई में खाद, बीज मिलाकर करीब 40 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। शुरुआत में बारिश देख बुवाई जल्द शुरू कर दी थी, क्या मालूम था कि आगे एकदम सूखा पड़ जाएगा।
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-गुरदयाल सिंह, ग्राम ककरौआ
बारिश का पता नहीं और लो वोल्टेज के कारण धान की सिंचाई ढंग से नहीं हो पा रही। पिछले साल के मुकाबले इस बार आधी बारिश भी नहीं हुई है। खेत में सूखे जैसे हालात हो गए है।
-प्रगट सिंह, गांव भरतपुर न्यूरिया
दस एकड़ में धान लगाया। रोपाई के बाद छह से सात बार सिंचाई कर चुका हूं। बारिश नहीं होने से मेहनत व लागत पर पानी फिर गया। अभी भी बारिश का इंतजार है, यदि बारिश हुई तो फसल सूखने से बच जाएगी।
-सोहनलाल, पूरनपुर
इस बार बारिश पिछले साल के मुकाबले काफी कम हुई है। जिले के ज्यादातर हिस्सों में ट्यूबवेल व इंजनों से धान की फसल की सिंचाई करनी पड़ रही है। ऐसी स्थिति को देखते हुए शासन को किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
-मंजीत सिंह, भाकियू नेता
बोले कृषि अधिकारी
पिछले साल के मुकाबले इस बार काफी कम बारिश हुई है। अगस्त महीने में बारिश ठीकठाक होने की संभावना है। किसानों की फसल को नुकसान नहीं होगा।
- डॉ. विनोद यादव, जिला कृषि अधिकारी
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जिले का लगभग 80 प्रतिशत किसान बारिश पर निर्भर है। पिछले वर्ष खरीफ सीजन में इस समय तक बुवाई लगभग पूरी हो चुकी थी, लेकिन इस बार मौसम की बेरुखी से खेतों में जुताई का काम पूरा नहीं हो सका है। इस बार जुलाई माह की शुरुआत में ही बारिश होने से किसानों में उम्मीद जगी थी कि अबकी बार उनकी खरीफ की फसल ठीक होगी। जिस पर किसानों ने खाद बीज का इंतजाम कर खेतों की जुताई व बुआई की शुरुआत कर दी थी। लेकिन आगे मानसून कमजोर होने और तापमान में कोई खास कमी न आने से बोई गई फसल अच्छी बारिश नहीं होने के कारण खराब होने लगी है। अगस्त माह शुरू हो गया है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले अब तक आधी बारिश नहीं हुई है। जिससे कई किसानों की बुवाई पर पानी फिर गया है। आसमान की ओर निहार कर थक चुका कुछ किसानों ने तो आंखों के सामने फसल को खराब होते देख खेत को बिखेरना भी शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि जो हुआ सो हुआ अब आगे की तैयारी के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। इस बार अब तक जिले में सिर्फ 30 एमएम बारिश होना बताया गया है।
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धान की बुवाई में खाद, बीज मिलाकर करीब 40 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। शुरुआत में बारिश देख बुवाई जल्द शुरू कर दी थी, क्या मालूम था कि आगे एकदम सूखा पड़ जाएगा।
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-गुरदयाल सिंह, ग्राम ककरौआ
बारिश का पता नहीं और लो वोल्टेज के कारण धान की सिंचाई ढंग से नहीं हो पा रही। पिछले साल के मुकाबले इस बार आधी बारिश भी नहीं हुई है। खेत में सूखे जैसे हालात हो गए है।
-प्रगट सिंह, गांव भरतपुर न्यूरिया
दस एकड़ में धान लगाया। रोपाई के बाद छह से सात बार सिंचाई कर चुका हूं। बारिश नहीं होने से मेहनत व लागत पर पानी फिर गया। अभी भी बारिश का इंतजार है, यदि बारिश हुई तो फसल सूखने से बच जाएगी।
-सोहनलाल, पूरनपुर
इस बार बारिश पिछले साल के मुकाबले काफी कम हुई है। जिले के ज्यादातर हिस्सों में ट्यूबवेल व इंजनों से धान की फसल की सिंचाई करनी पड़ रही है। ऐसी स्थिति को देखते हुए शासन को किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
-मंजीत सिंह, भाकियू नेता
बोले कृषि अधिकारी
पिछले साल के मुकाबले इस बार काफी कम बारिश हुई है। अगस्त महीने में बारिश ठीकठाक होने की संभावना है। किसानों की फसल को नुकसान नहीं होगा।
- डॉ. विनोद यादव, जिला कृषि अधिकारी