फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   cirme

दरिंदे की धमकी से नौ दिन तक डरी-सहमी रही थी पीड़ित बिटिया

Tue, 03 Dec 2019 12:06 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 03 Dec 2019 12:06 AM IST
विज्ञापन
cirme
पीलीभीत। किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म करने के चार साल पुराने मामले में आरोपी रिंकू को 20 साल की सजा होने के बाद परिवार वालों ने कुछ सुकून महसूस किया है। बेटी संग हुई दरिंदगी में न्याय पाने को चार साल तक परिवार वाले जद्दोजहद करते रहे। हालांकि दूसरे नाबालिग आरोपी को अभी सजा होने का परिवार को इंतजार है, उस पर किशोर न्याय बोर्ड में सुनवाई चल रही है।
विज्ञापन

पीड़िता के पिता के अनुसार कि उनकी बेटी 17 अगस्त 2015 की शाम पांच बजे शौच के लिए खेत पर गई थी। वहां पहले से मौजूद रिंकू ने उसे दबोच लिया और नजदीक के गन्ने के खेत में ले जाकर अपने साथी के साथ मिलकर दुष्कर्म किया। दरिंदगी के बाद दोनों आरोपियों ने उनकी बिटिया को इस कदर डराया-धमकाया था कि वह घर आने के बाद भी नौ दिन तक कुछ बोल नहीं पायी। वह सहमी और घबराई सी रहने लगी थी। नौ दिनों तक वह घटना को लेकर कुछ नहीं बोली। दसवें दिन 26 अगस्त को परिवार के लोगों ने उसकी परेशानी के बारे में पूछा तो उसने रो कर पूरी घटना को बयां किया। बेटी के साथ इस तरह की दरिंदगी की बात सुनकर परिवार वालों के पैरों तले जमीन खिसक गई। फिर खुद को संभालते हुए वह बिटिया को न्याय दिलाने के मकसद से थाने गए और उसी दिन रिपोर्ट दर्ज करा दी। इसके बाद से आरोपी को सजा दिलाने के लिए न्यायालय में पैरवी करते रहे।
विज्ञापन

पुलिस ने इस मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ विवेचना पूरी कर 23 नवंबर 2015 को चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी। 14 मार्च 2016 को एक आरोपी को किशोर अपचारी घोषित कर दिया गया। उसकी पत्रावली पृथक कर किशोर न्याय बोर्ड को भेज दी गई। मुख्य आरोपी रिंकू पर सुनवाई शुरू हो गई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश सीताराम ने रिंकू को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।
विज्ञापन
विज्ञापन

सुनवाई के बाद दोषी रिंकू को 20 साल की सजा के साथ-साथ 20 हजार रुपये जुर्माने से भी दंडित किया है। अर्थदंड पीड़िता को उपलब्ध कराने का आदेश है। अर्थदंड अदा न करने पर उसको दो साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। उसको बंधक बनाने की धारा 342 के तहत एक साल की सजा, धमकाने के लिए धारा 506 में दो साल की सजा सुनाई है। विवेचना और विचारण की अवधि में जेल में बिताई गई अवधि भी आदेश में समाहित की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed