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Pilibhit News: 60 करोड़ से 25 किमी के दायरे में जंगल सीमा पर होगी चेनलिंग

Sat, 19 Aug 2023 12:51 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Sat, 19 Aug 2023 12:51 AM IST
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Chainling will be done on the forest border within a radius of 60 crore to 25 km
कलीनगर। बाघ और तेंदुए के जंगल से बाहर आकर हमला करने की बढ़ रही घटनाओं पर अब रोक लग सकेगी। विभागीय प्रयासों के बाद शासन ने पीटीआर के संवेदनशील क्षेत्र में चेनलिंग कराने के लिए राहत कोष से 60 करोड़ का बजट स्वीकृत कर दिया है। जल्द ही कागजी कार्यवाही पूरी करने के बाद टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघ और तेंदुए की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस लिहाज से उनके लिए जंगल का दायरा कम पड़ने लगा है। ऐसे में बाघ और तेंदुए जंगल से बाहर का रुख करने लगे हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। पूर्व में बराही रेंज से सटे सेल्हा और माला रेंज से सटे माधोटांडा क्षेत्र के रानीगंज गांव में बाघ और तेंदुए के हमले में दो लोगों की मौत हो चुकी है।
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दो दिन पूर्व रानीगंज गांव के एक और किसान को बाघ ने मार डाला, लेकिन वन विभाग घटना जंगल के अंदर होने का दावा कर रहा है, जबकि परिजन खेत से खींचकर ले जाने की बात कह रहे हैं। इधर, लगातार बढ़ रही घटनाओं से लोगों में आक्रोश है। स्थिति को संभालने के लिए पीटीआर के अधिकारियों ने चेनलिंग कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। पैरवी के बाद पिछले दिनों शासन ने स्वीकृति भी दे दी।
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इसके लिए राहत कोष से 60 करोड़ का बजट भी स्वीकृत कर दिया गया है। अब जिला स्तर पर कागजी प्रक्रिया पर अमल किया जा रहा है। ट्रेजरी कार्यालय में अभिलेख जमा होने के बाद बजट जारी किया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि एक सप्ताह के भीतर टेंडर आमंत्रित कर लिए जाएंगे। डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि जल्द ही संवेदनशील क्षेत्रों में चेनलिंग का कार्य शुरू कराया जाएगा।
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माला, महोफ और बराही रेंज में हैं सबसे ज्यादा बाघ
पीटीआर में बाघों की संख्या बढ़ने से सबसे अधिक खराब स्थिति माला, महोफ और बराही रेंज से सटे इलाके में है। ऐसे में अधिकारी चेनलिंग के कार्य को प्राथमिकता के रूप में उक्त तीनों रेंज के संवेदनशील क्षेत्रों में ही शुरू कराने की योजना बना रहे हैं। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि चेनलिंग होने के बाद संवेदनशील इलाकों में मानव-वन्य जीव संघर्ष की घटनाओं में काफी कमी आएगी।

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ऐसे होगी चेनलिंगचेनलिंग जालनुमा दीवार को कहा जाता है। यह वन्यजीवों को जंगल से बाहर निकलने से रोकने का काम करती है। इसमें दो फुट की दीवार चुनकर उसके ऊपर लोहे के एंगिल लगाकर 8-9 फुट ऊंचा जाल लगाया जाता है। पूर्व में पीटीआर प्रशासन की ओर से बराही रेंज के तीन किलोमीटर दायरे में चेनलिंग कराई जा चुकी है।
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