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‘बैंकर्स को मिलें केंद्रीय कर्मियों की तरह सुविधाएं’
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत।
Updated Sun, 17 Jul 2016 11:01 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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वी बैंकर्स ग्रामीण बैंक एसोसिएशन के पहले अधिवेशन में उठी समस्याएं
बैंक कर्मियों की नई एसोसिएशन वी बैंकर्स के पहले अधिवेशन में बैंक कर्मियों को केंद्रीय कर्मियों की तरह वेतन, भत्ता, पेंशन और अन्य सुविधाएं देने की मांग की गई। इसके लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का निर्णय भी लिया गया।
वी बैंकर्स ग्रामीण बैंक एसोसिएशन का पहला अधिवेशन रविवार को शहर के एक होटल में संपन्न हुआ। इसकी अध्यक्षता वीके सिंह ने की। एसोसिएशन के संरक्षक कमलेश्वर चतुर्वेदी ने कहा कि हमें ट्रेड यूनियन के रूप में काम नहीं करना है। हम कर्मचारियों की समस्याओं को राष्ट्रहित के साथ हल करवाना चाहते हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष ने कहा कि हमारा श्रमिक आंदोलन किसी राजनैतिक पार्टी से जुड़ा या उनसे संबद्ध ट्रेड यूनियन में बंटा नहीं है। उपाध्यक्ष घनश्याम वर्मा ने हमें विरोध न कर उन्नत तकनीकी का सहारा लेकर बैंक कर्मियों के लिए संघर्ष करना चाहिए। संयोजक संतोष तिवारी ने एसोसिएशन के गठन का उद्देश्य बताते हुए कहा कि ग्रामीण बैकों में कार्यरत सभी संगठनों की निष्क्रियता के कारण ही नई यूनियन के गठन का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि आज पेंशन ग्रामीण बैंक कर्मियों का मुख्य मुद्दा है। उन्होंने कहा यह बिडंबना ही है कि 80 हजार रुपये वेतन पाने वाले बैंक कर्मी को मात्र तीन हजार रुपये पेंशन मिलती है जबकि भारत सरकार द्वारा नियुक्त राष्ट्रीय न्यायाधिकरण ट्रिब्यूनल ने 20 अप्रैल 1990 को सभी ग्रामीण बैंकों को समान कार्य के लिए समान वेतन देने का निर्णय दिया था।
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अधिवेशन में आरएस सक्सेना, अनुराग अवस्थी, सुधीर मेहता, वीरेंद्र गंगवार, ताराचंद्र चौधरी, हेमंत शर्मा, विनय शर्मा, आशीष मिश्रा, कौसर हुसैन, आशुतोष तिवारी, आईवी विजलवाण सहित कई लोग थे। संचालन आशीष यादव ने किया।
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बैंक कर्मियों की नई एसोसिएशन वी बैंकर्स के पहले अधिवेशन में बैंक कर्मियों को केंद्रीय कर्मियों की तरह वेतन, भत्ता, पेंशन और अन्य सुविधाएं देने की मांग की गई। इसके लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का निर्णय भी लिया गया।
वी बैंकर्स ग्रामीण बैंक एसोसिएशन का पहला अधिवेशन रविवार को शहर के एक होटल में संपन्न हुआ। इसकी अध्यक्षता वीके सिंह ने की। एसोसिएशन के संरक्षक कमलेश्वर चतुर्वेदी ने कहा कि हमें ट्रेड यूनियन के रूप में काम नहीं करना है। हम कर्मचारियों की समस्याओं को राष्ट्रहित के साथ हल करवाना चाहते हैं।
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राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष ने कहा कि हमारा श्रमिक आंदोलन किसी राजनैतिक पार्टी से जुड़ा या उनसे संबद्ध ट्रेड यूनियन में बंटा नहीं है। उपाध्यक्ष घनश्याम वर्मा ने हमें विरोध न कर उन्नत तकनीकी का सहारा लेकर बैंक कर्मियों के लिए संघर्ष करना चाहिए। संयोजक संतोष तिवारी ने एसोसिएशन के गठन का उद्देश्य बताते हुए कहा कि ग्रामीण बैकों में कार्यरत सभी संगठनों की निष्क्रियता के कारण ही नई यूनियन के गठन का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि आज पेंशन ग्रामीण बैंक कर्मियों का मुख्य मुद्दा है। उन्होंने कहा यह बिडंबना ही है कि 80 हजार रुपये वेतन पाने वाले बैंक कर्मी को मात्र तीन हजार रुपये पेंशन मिलती है जबकि भारत सरकार द्वारा नियुक्त राष्ट्रीय न्यायाधिकरण ट्रिब्यूनल ने 20 अप्रैल 1990 को सभी ग्रामीण बैंकों को समान कार्य के लिए समान वेतन देने का निर्णय दिया था।
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अधिवेशन में आरएस सक्सेना, अनुराग अवस्थी, सुधीर मेहता, वीरेंद्र गंगवार, ताराचंद्र चौधरी, हेमंत शर्मा, विनय शर्मा, आशीष मिश्रा, कौसर हुसैन, आशुतोष तिवारी, आईवी विजलवाण सहित कई लोग थे। संचालन आशीष यादव ने किया।