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Pilibhit News: सब्सिडी हरदोई ब्रांच नहर की मजबूती के साथ बढ़ेगी क्षमता
Fri, 22 Sep 2023 12:19 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Fri, 22 Sep 2023 12:19 AM IST
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सब्सिडी हरदोई ब्रांच नहर की पटरियो की मरम्मत करते मजदूर । संवाद
कलीनगर। सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण सब्सिडी हरदोई ब्रांच नहर की पटरियों की मजबूती के साथ क्षमता भी बढ़ाई जाएगी। अभियंताओं की पैरवी के बाद सिंचाई मंत्री ने दिलचस्पी लेकर दो प्रोजेक्ट को मंजूरी दिलाई है। जिसके तहत प्रथम चरण का कार्य भी शुरू कर दिया गया है।
जनपद के तराई इलाके में स्थित 22 किलोमीटर लंबे शारदा सागर डैम में भंडारित पानी को सब्सिडी हरदोई ब्रांच नहर से जनपद के अलावा, लखीमपुर, सीतापुर से लेकर रायबरेली तक फसलों को पानी दिया जाता है। प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत इस नहर को खोदा गया था। देखरेख के अभाव में नहर की दोनों पटरियों जर्जर हो गईं।
ऐसा तब है जब हर साल लाखों रुपये मरम्मत के नाम पर ठिकाने लगा दिए जाते हैं। नहर की रेत भवन निर्माण में काफी उपयोगी मानी जाती है। इसलिए रेत माफिया ने दोनों किनारों से रेत निकालना शुरू कर दिया। इससे पटरियां कमजोर होती चली गईं। पटरियों की मजबूती के साथ नहर की क्षमता बढ़ाने के लिए अभियंताओं ने मंथन शुरू किया।
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पूर्व में बाइफरकेशन पहुंचे सिंचाई मंत्री से भी अभियंताओं ने इस प्रस्ताव को लेकर चर्चा की। सिंचाई मंत्री की दिलचस्पी के बाद अभियंताओं ने दो प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजे। जिस पर शासन ने मंजूरी दे दी। प्रथम चरण में कलीनगर के गांव रम्पुरा से 13 किलोमीटर तक सब्सिडी नहर तक कार्य शुरू कर दिया गया है।
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हेड की तरफ से भी शुरू हुआ कार्य
शारदा डैम से पानी की क्षमता बढ़ाने के लिए सब्सिडी नहर के हेड से भी कार्य शुरू कराया गया है। मिट्टी की आवश्यकता अधिक पड़ने पर जिओ सीट की चादर बिछाकर पिचिंग लगाने का कार्य कराया जा रहा है। हालांकि पटरियों को लेबल करने के नाम पर मानक के विपरीत नहर से ही रेत निकालकर डाली जा रही है।
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नहर की दोनों पटरियों को मजबूत करने से नहर के फटने की आशंका कम रहेगी। नहर से सिंचाई की क्षमता भी बढ़ेगी। इसको लेकर कार्य शुरू कराया गया है। - राजेश चौधरी, अभियंता, सब्सिडरी हरदोई ब्रांच बाइफरकेशन
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जनपद के तराई इलाके में स्थित 22 किलोमीटर लंबे शारदा सागर डैम में भंडारित पानी को सब्सिडी हरदोई ब्रांच नहर से जनपद के अलावा, लखीमपुर, सीतापुर से लेकर रायबरेली तक फसलों को पानी दिया जाता है। प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत इस नहर को खोदा गया था। देखरेख के अभाव में नहर की दोनों पटरियों जर्जर हो गईं।
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ऐसा तब है जब हर साल लाखों रुपये मरम्मत के नाम पर ठिकाने लगा दिए जाते हैं। नहर की रेत भवन निर्माण में काफी उपयोगी मानी जाती है। इसलिए रेत माफिया ने दोनों किनारों से रेत निकालना शुरू कर दिया। इससे पटरियां कमजोर होती चली गईं। पटरियों की मजबूती के साथ नहर की क्षमता बढ़ाने के लिए अभियंताओं ने मंथन शुरू किया।
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पूर्व में बाइफरकेशन पहुंचे सिंचाई मंत्री से भी अभियंताओं ने इस प्रस्ताव को लेकर चर्चा की। सिंचाई मंत्री की दिलचस्पी के बाद अभियंताओं ने दो प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजे। जिस पर शासन ने मंजूरी दे दी। प्रथम चरण में कलीनगर के गांव रम्पुरा से 13 किलोमीटर तक सब्सिडी नहर तक कार्य शुरू कर दिया गया है।
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हेड की तरफ से भी शुरू हुआ कार्य
शारदा डैम से पानी की क्षमता बढ़ाने के लिए सब्सिडी नहर के हेड से भी कार्य शुरू कराया गया है। मिट्टी की आवश्यकता अधिक पड़ने पर जिओ सीट की चादर बिछाकर पिचिंग लगाने का कार्य कराया जा रहा है। हालांकि पटरियों को लेबल करने के नाम पर मानक के विपरीत नहर से ही रेत निकालकर डाली जा रही है।
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नहर की दोनों पटरियों को मजबूत करने से नहर के फटने की आशंका कम रहेगी। नहर से सिंचाई की क्षमता भी बढ़ेगी। इसको लेकर कार्य शुरू कराया गया है। - राजेश चौधरी, अभियंता, सब्सिडरी हरदोई ब्रांच बाइफरकेशन