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गंदे नाले से गोमती को पानी देने की जुगत
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Sat, 02 Jul 2016 11:34 PM IST
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ग्राम पंचायत वर्षों से जिस नाले से कस्बे का गंदा पानी निकालने के लिए ग्राम निधि एवं मनरेगा के धन से हर साल सफाई और खुदाई कराती है, सिंचाई विभाग उसी नाले से उद्गम स्थल तक 25 क्यूसेक पानी पहुंचाने की जुगत में लग गया है, जबकि कस्बावासी पूर्व वर्षों की तरह ही हरदोई ब्रांच से शुद्ध जल पहुंचाने की मांग कर रहे हैं।
गोमती उद्गम स्थल एक धार्मिक तीर्थस्थल भी है। यहां पुराणों में भी नदी किनारे बस्ती बसे होने के प्रमाण मिलते रहे हैं। योगी बाबा दुर्गानाथ का प्रसिद्ध मंदिर भी यहां है। जहां वर्ष में दो बार विशाल मेले लगते हैं। इसी के चलते वर्षों पूर्व हरदोई ब्रांच से गोमती उद्गम स्थल की झील सूख न पाए, एक पक्का नाला गूल खोदकर गोमती तक पहुंचाया गया था, जिसमें लगातार हरदोई ब्रांच से शुद्ध जल उद्गम स्थल तक बहता रहता था, लेकिन अभियंताओं की लापरवाही के चलते नाला जगह-जगह से पट गया और इसका जलप्रवाह बंद हो गया।
करोड़ों का प्रोजेक्ट पूर्व में हो चुका लापरवाही का शिकार
बसपा के कार्यकाल में गोमती की अविरल धारा बहाने के लिए 22.50 करोड़ के दो प्रोजेक्ट मंजूर हुए थे। सिंचाई विभाग के अफसरों ने जिला प्रशासन के काफी प्रयासों के बावजूद पूरे दो वर्ष तक उस पर कार्य नहीं कराया था। बात सिर्फ इतनी थी कि वह प्रोजेक्ट मनरेगा से शुरू हुआ था और ठेकेदारी प्रथा न होने के चलते तरह-तरह की आपत्तियां लगाकर दोनों प्रोजेक्ट समाप्त कर दिए गए।
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गंदे नाले से 25 क्यूसेक पानी देने का शुरू हुआ कार्य
सपा सरकार में भी चार वर्षों से गोमती की अविरल धारा बहाने को काफी प्रयास होते रहे हैं। सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने गोमती में अविरल धारा बहाने के लिए 500 क्यूसेक पानी पहुंचाने के निर्देश दिए थे, लेकिन सिंचाई विभाग के एक बड़े अफसर ने उद्गम स्थल तक 25 क्यूसेक पानी देने का प्रोजेक्ट शारदा सागर खंड से भिजवा दिया था।
बरसाती पानी से भरने लगे ताल, तो शुरू हुआ कार्य
गोमती उद्गम स्थल पर तीन तालों की खुदाई होना है। मुख्य तालाब में इस समय पानी भरा हुआ है। सिंचाई विभाग ने जल्दबाजी में उससे सटे तालाब की खुदाई दो मशीनों से शुरू कराई है। यहां जब खुदाई शुरू की गई तो तालाब के नीचे ही जलस्रोतों से पानी भरने लगा। ठेेकेदार ने बाहर से आने वाले पानी का तो डायवर्जन कर दिया था, लेकिन जब खुदाई से पानी भर रहा है तो ठेकेदार पूरी पारदर्शिता से कैसे कार्य कर सकेगा, लेकिन सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने बावजूद इसके कार्य जारी के निर्देश दिए हैं।
हरदोई से ही गोमती को मिले पानी
क्षेत्रीय विधायक पीतमराम ने भी कार्य शुरू होने पर यहां पहुंचकर ठेकेदारों से पूरी गुणवत्ता के साथ कार्य करने की बात कहते हुए कहा कि उनके काफी प्रयासों से यह प्रोजेक्ट मंजूर हो सका है। उधर, गांव के आनंदपाल गुप्ता, हरपाल कश्यप, हरदीप सिंह, जिला पंचायत सदस्य मुनेंद्र पाल सिंह सहित लोगों ने हरदोई ब्रांच से ही उद्गम स्थल पर पानी दिलाने की मांग की है। उनका कहना था कि गंदे नाले को उद्गम स्थल से हटाकर आगे ले जाया जाए, नहीं तो हरदोई से पानी दिया।
कस्बे का पानी उद्गम स्थल वाली झील में न जाकर उसको किसी दूसरे स्थान तक खारजा नहर में डाला जाए। इसके लिए प्रयास चल रहे हैं।
- किरन सिंह, ग्राम प्रधान
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गोमती उद्गम स्थल एक धार्मिक तीर्थस्थल भी है। यहां पुराणों में भी नदी किनारे बस्ती बसे होने के प्रमाण मिलते रहे हैं। योगी बाबा दुर्गानाथ का प्रसिद्ध मंदिर भी यहां है। जहां वर्ष में दो बार विशाल मेले लगते हैं। इसी के चलते वर्षों पूर्व हरदोई ब्रांच से गोमती उद्गम स्थल की झील सूख न पाए, एक पक्का नाला गूल खोदकर गोमती तक पहुंचाया गया था, जिसमें लगातार हरदोई ब्रांच से शुद्ध जल उद्गम स्थल तक बहता रहता था, लेकिन अभियंताओं की लापरवाही के चलते नाला जगह-जगह से पट गया और इसका जलप्रवाह बंद हो गया।
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करोड़ों का प्रोजेक्ट पूर्व में हो चुका लापरवाही का शिकार
बसपा के कार्यकाल में गोमती की अविरल धारा बहाने के लिए 22.50 करोड़ के दो प्रोजेक्ट मंजूर हुए थे। सिंचाई विभाग के अफसरों ने जिला प्रशासन के काफी प्रयासों के बावजूद पूरे दो वर्ष तक उस पर कार्य नहीं कराया था। बात सिर्फ इतनी थी कि वह प्रोजेक्ट मनरेगा से शुरू हुआ था और ठेकेदारी प्रथा न होने के चलते तरह-तरह की आपत्तियां लगाकर दोनों प्रोजेक्ट समाप्त कर दिए गए।
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गंदे नाले से 25 क्यूसेक पानी देने का शुरू हुआ कार्य
सपा सरकार में भी चार वर्षों से गोमती की अविरल धारा बहाने को काफी प्रयास होते रहे हैं। सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने गोमती में अविरल धारा बहाने के लिए 500 क्यूसेक पानी पहुंचाने के निर्देश दिए थे, लेकिन सिंचाई विभाग के एक बड़े अफसर ने उद्गम स्थल तक 25 क्यूसेक पानी देने का प्रोजेक्ट शारदा सागर खंड से भिजवा दिया था।
बरसाती पानी से भरने लगे ताल, तो शुरू हुआ कार्य
गोमती उद्गम स्थल पर तीन तालों की खुदाई होना है। मुख्य तालाब में इस समय पानी भरा हुआ है। सिंचाई विभाग ने जल्दबाजी में उससे सटे तालाब की खुदाई दो मशीनों से शुरू कराई है। यहां जब खुदाई शुरू की गई तो तालाब के नीचे ही जलस्रोतों से पानी भरने लगा। ठेेकेदार ने बाहर से आने वाले पानी का तो डायवर्जन कर दिया था, लेकिन जब खुदाई से पानी भर रहा है तो ठेकेदार पूरी पारदर्शिता से कैसे कार्य कर सकेगा, लेकिन सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने बावजूद इसके कार्य जारी के निर्देश दिए हैं।
हरदोई से ही गोमती को मिले पानी
क्षेत्रीय विधायक पीतमराम ने भी कार्य शुरू होने पर यहां पहुंचकर ठेकेदारों से पूरी गुणवत्ता के साथ कार्य करने की बात कहते हुए कहा कि उनके काफी प्रयासों से यह प्रोजेक्ट मंजूर हो सका है। उधर, गांव के आनंदपाल गुप्ता, हरपाल कश्यप, हरदीप सिंह, जिला पंचायत सदस्य मुनेंद्र पाल सिंह सहित लोगों ने हरदोई ब्रांच से ही उद्गम स्थल पर पानी दिलाने की मांग की है। उनका कहना था कि गंदे नाले को उद्गम स्थल से हटाकर आगे ले जाया जाए, नहीं तो हरदोई से पानी दिया।
कस्बे का पानी उद्गम स्थल वाली झील में न जाकर उसको किसी दूसरे स्थान तक खारजा नहर में डाला जाए। इसके लिए प्रयास चल रहे हैं।
- किरन सिंह, ग्राम प्रधान