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Pilibhit News: खून की जांच तभी होगी, जब पर्चे पर लगी होगी मेडिकल कॉलेज की मुहर
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पीलीभीत। मेडिकल कॉलेज में कुुछ बाहरी लोगों के एक रुपये के पर्चे पर अपने हाथ से खून की जांच लिख कर मरीजों से वसूली की बात सामने आई है। ऐसे कई मामले पकड़ में आने पर प्रभारी प्राचार्य ने सख्ती दिखाते हुए पर्चे पर मुहर लगाने की व्यवस्था शुरू की है। ऐसे में अब उन्हीं पर्चों पर खून की जांच होगी, जिन पर या तो मेडिकल कॉलेज की मुहर लगी होगी या फिर डॉक्टर का नाम व हस्ताक्षर होंगे।
जिले में वायरल फीवर का प्रकोप इस कदर हावी है कि निजी से लेकर सरकारी अस्पताल मरीजों से भरे हुए हैं। सबसे बुरा हाल मेडिकल कॉलेज का है, यहां रोजाना 1500 से 1600 मरीज दवा लेने पहुंचते हैं। अधिकतर मरीज बुखार के होते हैं, ऐसे में डॉक्टर खून की जांच लिखते हैं।
ऐसे में अस्पताल के आसपास घूमने वाले कुछ दलालों ने भीड़ का फायदा उठाना उठाना शुरू कर दिया। सामने आया कि दलाल मरीजों से संपर्क कर एक रुपये का पर्चा बनवाते और फिर उसपर अपने हाथ से खून की जांच लिख देते थे।
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इस एवज में वह मरीजों से रुपये वसूलते थे। इसके चलते जब पैथोलॉजी लैब में खून की जांच कराने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी तो स्टाफ को संदेह हुआ। जब स्टाफ ने ऐसे कुछ पर्चों की पड़ताल की तो उस पर दलालों के खून की जांच के लिए संदर्भित करने की बात सामने आई।
मामला मेडिकल कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य तक पहुंचा तो उन्होंने सख्ती दिखाते हुए गड़बड़ी रोकने के लिए पर्चे पर मुहर या फिर डॉक्टर का नाम व हस्ताक्षर किए जाने की नई व्यवस्था कर दी।
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300 के पार होने लगी थीं जांचें
मेडिकल कॉलेज में रोजाना औसतन 200 से 250 तक जांचें होती हैं, लेकिन पिछले दिनों 300 के ऊपर मरीज जांच कराने पहुंचने लगे, लेकिन जब से नई व्यवस्था शुरू हुई है तब से जांचों की संख्या कम हुई है। इसी के चलते बुधवार को मेडिकल कॉलेज में 274 मरीजों ने खून की जांच कराई।
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कुछ लोग बिना डॉक्टर को दिखाएं ही एक रुपये के पर्चे पर खून की जांच लिख रहे थे। जानकारी होने पर पर्चे पर या मेडिकल कॉलेज की मुहर या फिर डॉक्टर का नाम और हस्ताक्षर किए जाने की व्यवस्था की है, ताकि इस तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके।
-डॉ. संजीव सक्सेना, प्रभारी प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
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जिले में वायरल फीवर का प्रकोप इस कदर हावी है कि निजी से लेकर सरकारी अस्पताल मरीजों से भरे हुए हैं। सबसे बुरा हाल मेडिकल कॉलेज का है, यहां रोजाना 1500 से 1600 मरीज दवा लेने पहुंचते हैं। अधिकतर मरीज बुखार के होते हैं, ऐसे में डॉक्टर खून की जांच लिखते हैं।
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ऐसे में अस्पताल के आसपास घूमने वाले कुछ दलालों ने भीड़ का फायदा उठाना उठाना शुरू कर दिया। सामने आया कि दलाल मरीजों से संपर्क कर एक रुपये का पर्चा बनवाते और फिर उसपर अपने हाथ से खून की जांच लिख देते थे।
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इस एवज में वह मरीजों से रुपये वसूलते थे। इसके चलते जब पैथोलॉजी लैब में खून की जांच कराने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी तो स्टाफ को संदेह हुआ। जब स्टाफ ने ऐसे कुछ पर्चों की पड़ताल की तो उस पर दलालों के खून की जांच के लिए संदर्भित करने की बात सामने आई।
मामला मेडिकल कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य तक पहुंचा तो उन्होंने सख्ती दिखाते हुए गड़बड़ी रोकने के लिए पर्चे पर मुहर या फिर डॉक्टर का नाम व हस्ताक्षर किए जाने की नई व्यवस्था कर दी।
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300 के पार होने लगी थीं जांचें
मेडिकल कॉलेज में रोजाना औसतन 200 से 250 तक जांचें होती हैं, लेकिन पिछले दिनों 300 के ऊपर मरीज जांच कराने पहुंचने लगे, लेकिन जब से नई व्यवस्था शुरू हुई है तब से जांचों की संख्या कम हुई है। इसी के चलते बुधवार को मेडिकल कॉलेज में 274 मरीजों ने खून की जांच कराई।
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कुछ लोग बिना डॉक्टर को दिखाएं ही एक रुपये के पर्चे पर खून की जांच लिख रहे थे। जानकारी होने पर पर्चे पर या मेडिकल कॉलेज की मुहर या फिर डॉक्टर का नाम और हस्ताक्षर किए जाने की व्यवस्था की है, ताकि इस तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके।
-डॉ. संजीव सक्सेना, प्रभारी प्राचार्य मेडिकल कॉलेज