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बाजार भाव गिरने से उठी सरकारी गेहूं की खरीद
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Sun, 01 May 2016 11:34 PM IST
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गेहूं को लागत मूल्य भी नहीं मिल रहा बाजार में
- फोटो : अमर उजाला
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बीज के नाम पर हो रही गेहूं खरीद पर अंकुश लगने से बाजार भाव गिर गया है, जिससे सरकारी खरीद बढ़ने लगी है। जिले में 25 अप्रैल तक मात्र 18 हजार एमटी गेहूं की खरीद हुई, जो पांच दिन में बढ़कर 28 हजार हो गई।
गेहूं की बंपर पैदावार होने के साथ ही इस बार किसानों से बीज के नाम पर हुई खरीद के चलते कुछ समय तक अच्छे दाम मिले। हालांकि अधिकारियों की मिलीभगत से हुई यह खरीद बाद में किसानों के लिए ही नुकसानदेह साबित होगी। इसके बाद भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया। अब बीज निर्माताओं द्वारा बड़ी मात्रा में खरीद कर लिए जाने के बाद प्रशासन ने कुछ सख्ती का दिखावा किया है। इन दोनों कारणों से गेहूं का बाजार भाव गिरने लगा है, जिससे सरकारी खरीद का आंकड़ा बढ़ने लगा है। जिले में अब तक हुई खरीद की बात करें तो पहली अप्रैल से 25 अप्रैल तक मात्र 18092 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था, लेकिन अगले पांच दिन में (26 से 30 अप्रैल) तक यह आंकड़ा 9734 मीट्रिक खरीद के साथ एकाएक बढ़कर 27826 मीट्रिक टन पहुंच गया। वहीं सूत्रों की मानें तो बीज के बाद अब क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद का खेल शुरू हो गया है इससे जुड़े अधिकारी कर्मचारी जुगाड़ से खरीद के आंकड़े बढ़ाने में जुट गए हैं।
एसएफसी खरीद में सबसे आगे
जिले में अब तक सुस्त गति से चल रही गेहूं खरीद में जहां एकाएक तेजी आई है। इसमें भी नौ क्रय एजेंसियों में एसएफसी की खरीद सबसे आगे है। क्रय एजेंसी द्वारा 25 अप्रैल तक 4011 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था जो अगले पांच दिन में बढ़कर 5359 मीट्रिक टन पहुंच गया। यहां बता दें कि इस संस्था के माध्यम से ही राशन कोटेदारों को गेहूं की सप्लाई की जाती है और इस बार खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने पर इस विभाग को पहले की आपेक्ष अधिक खाद्यान्न मिल रहा है।
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प्रांरभ में नमी और उसके बाद बाजार भाव तेज होने के कारण खरीद नहीं हो पा रही थी। भाव गिरने के साथ ही केंद्र प्रभारी भी किसानों से संपर्क कर गेहूं खरीद रहे हैं, जिससे खरीद में तेजी आई है।
- एसके यादव, डिप्टी आरएमओ
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गेहूं की बंपर पैदावार होने के साथ ही इस बार किसानों से बीज के नाम पर हुई खरीद के चलते कुछ समय तक अच्छे दाम मिले। हालांकि अधिकारियों की मिलीभगत से हुई यह खरीद बाद में किसानों के लिए ही नुकसानदेह साबित होगी। इसके बाद भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया। अब बीज निर्माताओं द्वारा बड़ी मात्रा में खरीद कर लिए जाने के बाद प्रशासन ने कुछ सख्ती का दिखावा किया है। इन दोनों कारणों से गेहूं का बाजार भाव गिरने लगा है, जिससे सरकारी खरीद का आंकड़ा बढ़ने लगा है। जिले में अब तक हुई खरीद की बात करें तो पहली अप्रैल से 25 अप्रैल तक मात्र 18092 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था, लेकिन अगले पांच दिन में (26 से 30 अप्रैल) तक यह आंकड़ा 9734 मीट्रिक खरीद के साथ एकाएक बढ़कर 27826 मीट्रिक टन पहुंच गया। वहीं सूत्रों की मानें तो बीज के बाद अब क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद का खेल शुरू हो गया है इससे जुड़े अधिकारी कर्मचारी जुगाड़ से खरीद के आंकड़े बढ़ाने में जुट गए हैं।
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एसएफसी खरीद में सबसे आगे
जिले में अब तक सुस्त गति से चल रही गेहूं खरीद में जहां एकाएक तेजी आई है। इसमें भी नौ क्रय एजेंसियों में एसएफसी की खरीद सबसे आगे है। क्रय एजेंसी द्वारा 25 अप्रैल तक 4011 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था जो अगले पांच दिन में बढ़कर 5359 मीट्रिक टन पहुंच गया। यहां बता दें कि इस संस्था के माध्यम से ही राशन कोटेदारों को गेहूं की सप्लाई की जाती है और इस बार खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने पर इस विभाग को पहले की आपेक्ष अधिक खाद्यान्न मिल रहा है।
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प्रांरभ में नमी और उसके बाद बाजार भाव तेज होने के कारण खरीद नहीं हो पा रही थी। भाव गिरने के साथ ही केंद्र प्रभारी भी किसानों से संपर्क कर गेहूं खरीद रहे हैं, जिससे खरीद में तेजी आई है।
- एसके यादव, डिप्टी आरएमओ