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Pilibhit News: लाखों की ठगी के मामले में सीएमओ कार्यालय के बर्खास्त कर्मचारी पर एक और प्राथमिकी
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पीलीभीत। निवेश के नाम पर लाखों रुपये लेकर वापस न करने के आरोप में सीएमओ कार्यालय के बर्खास्त संविदा कर्मचारी अरुण कुमार मौर्या के खिलाफ एक और रिपोर्ट दर्ज की गई है। आगरा निवासी महिला ने एसपी के आदेश पर सुनगढ़ी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए आरोपी पर रकम हड़पने, चेक बाउंस होने और रुपये मांगने पर धमकी देने का आरोप लगाया है।
आगरा जनपद के नगला सक्ता सिरौली निवासी भारती गंगवार ने सुनगढ़ी थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि शहर के छतरी चौराहा स्थित मौर्य मेडिकल स्टोर के संचालक अरुण कुमार मौर्या ने सितंबर 2025 में अलग-अलग तिथियों पर ऑनलाइन माध्यम से करीब 3.10 लाख रुपये उधार लिए थे। इसके अलावा उनके सहयोगी विष्णु कुमार मित्तल ने भी 38 हजार रुपये लिए थे। महिला का आरोप है कि ऑनलाइन लेनदेन के अतिरिक्त आरोपी को दो किश्तों में करीब 2.42 लाख रुपये नकद भी दिए गए थे। यह पूरी राशि निवेश के उद्देश्य से ली गई थी।
आरोपी ने दो से तीन माह के भीतर मूल धन के साथ ब्याज लौटाने का भरोसा दिया था, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी न तो निवेश पर कोई लाभ दिया गया और न ही मूल रकम वापस की गई। रुपये वापस मांगने पर आरोपी लगातार टालमटोल करता रहा। दबाव बढ़ने पर उसने दो बार चेक दिए, लेकिन दोनों ही चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर निरस्त हो गए। इसके बाद आरोपी के परिजनों से भी संपर्क किया गया, मगर कोई समाधान नहीं निकला।
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14 जनवरी 2026 को आरोपी ने 3.10 लाख रुपये का एक और चेक व शपथ पत्र दिया था। शपथ पत्र में 30 अप्रैल 2026 तक पूरी रकम लौटाने का वादा किया गया था। इसके बावजूद निर्धारित तिथि तक भुगतान नहीं किया गया। आरोप है कि अब आरोपी का मोबाइल फोन भी बंद आ रहा है और संपर्क नहीं हो पा रहा है। इंस्पेक्टर नरेश त्यागी ने बताया कि आरोपी को पहले ही कोर्ट में पेशकर जेल भेजा जा चुका है। मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है। संवाद
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आगरा जनपद के नगला सक्ता सिरौली निवासी भारती गंगवार ने सुनगढ़ी थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि शहर के छतरी चौराहा स्थित मौर्य मेडिकल स्टोर के संचालक अरुण कुमार मौर्या ने सितंबर 2025 में अलग-अलग तिथियों पर ऑनलाइन माध्यम से करीब 3.10 लाख रुपये उधार लिए थे। इसके अलावा उनके सहयोगी विष्णु कुमार मित्तल ने भी 38 हजार रुपये लिए थे। महिला का आरोप है कि ऑनलाइन लेनदेन के अतिरिक्त आरोपी को दो किश्तों में करीब 2.42 लाख रुपये नकद भी दिए गए थे। यह पूरी राशि निवेश के उद्देश्य से ली गई थी।
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आरोपी ने दो से तीन माह के भीतर मूल धन के साथ ब्याज लौटाने का भरोसा दिया था, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी न तो निवेश पर कोई लाभ दिया गया और न ही मूल रकम वापस की गई। रुपये वापस मांगने पर आरोपी लगातार टालमटोल करता रहा। दबाव बढ़ने पर उसने दो बार चेक दिए, लेकिन दोनों ही चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर निरस्त हो गए। इसके बाद आरोपी के परिजनों से भी संपर्क किया गया, मगर कोई समाधान नहीं निकला।
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14 जनवरी 2026 को आरोपी ने 3.10 लाख रुपये का एक और चेक व शपथ पत्र दिया था। शपथ पत्र में 30 अप्रैल 2026 तक पूरी रकम लौटाने का वादा किया गया था। इसके बावजूद निर्धारित तिथि तक भुगतान नहीं किया गया। आरोप है कि अब आरोपी का मोबाइल फोन भी बंद आ रहा है और संपर्क नहीं हो पा रहा है। इंस्पेक्टर नरेश त्यागी ने बताया कि आरोपी को पहले ही कोर्ट में पेशकर जेल भेजा जा चुका है। मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है। संवाद