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Pilibhit News: 17 साल बाद मिलावटी दूध बेचने के दोषी को एक वर्ष कैद की सजा
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पीलीभीत। 17 साल पहले दूध में फार्मलीन नाम का केमिकल मिलाकर घर-घर दूध की बिक्री करने के आरोपी अमरिया थाना क्षेत्र के ग्राम भैंसाह निवासी त्रिलोचन सिंह को दोषी मानते हुए कोर्ट ने एक साल की सजा सुनाई है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुंदर पाल ने अभियुक्त का अपराध गंभीर प्रकृति का माना है। कोर्ट ने कहा है कि दूध जैसी खाद्य वस्तु मानव उपभोग में आती है। अधोमानक एवं अप मिश्रित खाद्य पदार्थों के उपभोग से मानव स्वास्थ्य को हानि पहुंचती है। इससे मानव जीवन संकट में आ जाता है। कोर्ट ने अभियुक्त पर पांच हजार का जुर्माना भी लगाया है।
अभियोजन के अनुसार खाद्य निरीक्षक विजेंद्र कुमार ने 18 अप्रैल 2009 की सुबह करीब 8:30 बजे अमरिया थाना क्षेत्र के ग्राम भैंसाह निवासी त्रिलोचन सिंह को साइकिल पर करीब 30 लीटर दूध विक्रय के लिए ले जाते हुए रोका। पूछने पर त्रिलोचन ने दूध गाय और भैंस का मिश्रित बताया। संदेह होने पर खाद्य निरीक्षक ने 30 रुपये भुगतान देकर डेढ़ लीटर दूध खरीदा। इस दूध को नियमानुसार परीक्षण के लिए भेजा गया। परीक्षण रिपोर्ट में दूध में फैट की मात्रा निर्धारित मानक से कम पाई गई। नमूना अधोमानक पाया गया। खाद्य निरीक्षक ने विक्रेता त्रिलोचन सिंह के विरुद्ध राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2009 में खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम में कार्रवाई शुरू कराई।
मामले की सुनवाई अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुंदर पाल की अदालत में हुई। न्यायालय में खाद्य निरीक्षक विजेंद्र कुमार ने अपने शपथ पूर्वक बयान दर्ज कराए और सभी अभिलेखों को साबित किया। वहीं, दुग्ध विक्रेता त्रिलोचन सिंह ने न्यायालय में स्वयं को निर्दोष बताया। कहा कि खाद्य निरीक्षक से उसकी कहासुनी हो गई थी, इस वजह से उसे झूठा फंसाया गया, जबकि खाद्य निरीक्षक ने कोर्ट को बताया कि नियमानुसार सैंपल लिया और उसे परीक्षण के लिए भेजा। कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए एक साल की सजा के साथ पांच हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है।
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अभियोजन के अनुसार खाद्य निरीक्षक विजेंद्र कुमार ने 18 अप्रैल 2009 की सुबह करीब 8:30 बजे अमरिया थाना क्षेत्र के ग्राम भैंसाह निवासी त्रिलोचन सिंह को साइकिल पर करीब 30 लीटर दूध विक्रय के लिए ले जाते हुए रोका। पूछने पर त्रिलोचन ने दूध गाय और भैंस का मिश्रित बताया। संदेह होने पर खाद्य निरीक्षक ने 30 रुपये भुगतान देकर डेढ़ लीटर दूध खरीदा। इस दूध को नियमानुसार परीक्षण के लिए भेजा गया। परीक्षण रिपोर्ट में दूध में फैट की मात्रा निर्धारित मानक से कम पाई गई। नमूना अधोमानक पाया गया। खाद्य निरीक्षक ने विक्रेता त्रिलोचन सिंह के विरुद्ध राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2009 में खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम में कार्रवाई शुरू कराई।
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मामले की सुनवाई अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुंदर पाल की अदालत में हुई। न्यायालय में खाद्य निरीक्षक विजेंद्र कुमार ने अपने शपथ पूर्वक बयान दर्ज कराए और सभी अभिलेखों को साबित किया। वहीं, दुग्ध विक्रेता त्रिलोचन सिंह ने न्यायालय में स्वयं को निर्दोष बताया। कहा कि खाद्य निरीक्षक से उसकी कहासुनी हो गई थी, इस वजह से उसे झूठा फंसाया गया, जबकि खाद्य निरीक्षक ने कोर्ट को बताया कि नियमानुसार सैंपल लिया और उसे परीक्षण के लिए भेजा। कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए एक साल की सजा के साथ पांच हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है।
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