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सरकार ने नए अधिवक्ताओं के लिए स्वीकृत किए 160 लाख रुपए
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पीलीभीत। अधिवक्ताओं की मांग पर सरकार ने नए अधिवक्ताओं को तीन साल तक पत्रिका और पुस्तकों को खरीदने के लिए 5000 रुपये वार्षिक सहायता देने के लिए160 लाख की धनराशि को मंजूरी दे दी है। शासन के प्रमुख सचिव प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने इस बाबत न्याय विभाग को पत्र भी भेज दिया है। यह धनराशि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के बैंक खाते में आएगी।
दरअसल प्रदेश भर के अधिवक्ता लंबे अरसे से नए वकीलों को पत्रिका एवं पुस्तकों को खरीदने के लिए वार्षिक आर्थिक सहायता देने की मांग कर रहे हैं। वहीं चार दिन पूर्व अमर उजाला की ओर से हुए वेबिनार में प्रदेश के विधि एवं न्याय मंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रदेश भर के अधिवक्ताओं को आश्वस्त किया था कि नए अधिवक्ताओं को 5000 रुपये वार्षिक पत्रिका एवं पुस्तक खरीदने की आर्थिक सहायता की स्वीकृति शीघ्र प्रदान की जाएगी। वेबिनार में पीलीभीत जनपद से उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अनुशासन समिति के पूर्व सदस्य धीरेंद्र मिश्र और संयुक्त बार के अध्यक्ष बाबूराम शर्मा ने भी भागीदारी की थी। बीते दिन सरकार ने नए अधिवक्ताओं के लिए 160 लाख की धनराशि स्वीकृत कर दी। इस बात की जानकारी सरकार के प्रमुख सचिव ने बाकायदा शासनादेश जारी कर प्रदेश बार काउंसिल को भी भेजा है। सरकार के इस निर्णय से कोरोना महामारी के संकट में नए अधिवक्ताओं को कुछ न कुछ आर्थिक राहत अवश्य मिलेगी।
जूनियर अधिवक्ता आयुष मिश्र का कहना है की पहली बार सरकार ने जूनियर अधिवक्ताओं के बारे में सोचा है। पांच हजार रुपये वार्षिक अनुदान राशि बहुत कम है। इसे बढ़ाया जाए। ताकि नए अधिवक्ता पुस्तकें आदि क्रय कर सकें।
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जूनियर अधिवक्ता सचिन सिंह का कहना है कि प्रदेश सरकार का निर्णय सराहनीय है। ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी सरकार ने नए अधिवक्ताओं की चिंता की है। कोरोना काल के मद्देनजर अधिवक्ता हित में अच्छा प्रयास है।
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दरअसल प्रदेश भर के अधिवक्ता लंबे अरसे से नए वकीलों को पत्रिका एवं पुस्तकों को खरीदने के लिए वार्षिक आर्थिक सहायता देने की मांग कर रहे हैं। वहीं चार दिन पूर्व अमर उजाला की ओर से हुए वेबिनार में प्रदेश के विधि एवं न्याय मंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रदेश भर के अधिवक्ताओं को आश्वस्त किया था कि नए अधिवक्ताओं को 5000 रुपये वार्षिक पत्रिका एवं पुस्तक खरीदने की आर्थिक सहायता की स्वीकृति शीघ्र प्रदान की जाएगी। वेबिनार में पीलीभीत जनपद से उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अनुशासन समिति के पूर्व सदस्य धीरेंद्र मिश्र और संयुक्त बार के अध्यक्ष बाबूराम शर्मा ने भी भागीदारी की थी। बीते दिन सरकार ने नए अधिवक्ताओं के लिए 160 लाख की धनराशि स्वीकृत कर दी। इस बात की जानकारी सरकार के प्रमुख सचिव ने बाकायदा शासनादेश जारी कर प्रदेश बार काउंसिल को भी भेजा है। सरकार के इस निर्णय से कोरोना महामारी के संकट में नए अधिवक्ताओं को कुछ न कुछ आर्थिक राहत अवश्य मिलेगी।
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जूनियर अधिवक्ता आयुष मिश्र का कहना है की पहली बार सरकार ने जूनियर अधिवक्ताओं के बारे में सोचा है। पांच हजार रुपये वार्षिक अनुदान राशि बहुत कम है। इसे बढ़ाया जाए। ताकि नए अधिवक्ता पुस्तकें आदि क्रय कर सकें।
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जूनियर अधिवक्ता सचिन सिंह का कहना है कि प्रदेश सरकार का निर्णय सराहनीय है। ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी सरकार ने नए अधिवक्ताओं की चिंता की है। कोरोना काल के मद्देनजर अधिवक्ता हित में अच्छा प्रयास है।