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Pilibhit News: प्रशासन बेबस... जान ले रहे छुट्टा पशु
Sat, 25 Jan 2025 12:07 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sat, 25 Jan 2025 12:07 AM IST
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शहर की मंडी समिति परिसर में घूम रहे छुट्टा पशुओं को खदेड़ता युवक। संवाद
- फोटो : कैरम खेलते डीन डॉ. मुकेश वीर सिंह।
पीलीभीत। जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष का शोर तो खूब उठता है, लेकिन आमजन की जान सड़कों, खेतोंं और गांवों में घूम रहे छुट्टा पशु अधिक ले रहे हैं। छुट्टा पशुओं के आतंक के सामने प्रशासन भी बेबस है। दावों के विपरीत बड़ी संख्या में छुट्टा पशु सड़कों पर घूम रहे हैं। एक सप्ताह में दो लोगों की जान सांड़ के हमले में जा चुकी है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष में बीते वर्ष छह की जान गई, जबकि सांड़ के हमले सा टकराकर प्रत्येक माह कहीं न कहीं किसी की जान जाती है। छुट्टा पशुओं के हमले और टकराकर घायल होने के मामले तो अमूमन रोजाना हो रहे हैं। छुट्टा पशुओं को संरक्षित करने का प्रशासन का दावा और प्रयास दोनों ही अधूरे हैं।
शहर में तो प्रत्येक चौराहे पर छुट्टा पशु दिखते हैं। यही हाल बीसलपुर, बिलसंडा, पूरनपुर, अमरिया, मझोला आदि कस्बों का है।
आश्रय स्थलों से ज्यादा सड़क पर छुट्टा पशु छुट्टा
पशुओं के संरक्षण के लिए जिले में 61 गो-आश्रय स्थल संचालित हैं। यहां करीब 6400 पशु संरक्षित हैं। इससे कहीं ज्यादा छुट्टा पशु शहर, कस्बों और गांवों की सड़कों व खेत-खलिहानों में घूम रहे हैं। गो-आश्रय स्थलों से बाहर विचरण करने वाले पशुओं का ठोस आंकड़ा प्रशासन के पास नहीं है।
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आवागमन में बाधक, खरीदारों की मुसीबत
शहर में गौहनिया चौराहे से स्टेडियम मार्ग पर डलावघर के पास पूरे दिन छुट्टा पशुओं का झुंड डेरा जमाए रहता है। सुनगढ़ी थाने से आगे, स्टेशन मार्ग पर, नौगवां ओवरब्रिज से पहले, असम चौराहे पर और अन्य स्थानाें पर जानवर विचरण करते दिखते हैं। यह जानवर आवागमन में बाधक तो बनते ही, हादसे का कारण भी बन रहे हैं। सब्जी एवं फल मंडी में 100 से अधिक छुट्टा पशु घूमते रहते हैं।
सहायता राशि के लिए जरूरी है पोस्टमॉर्टम
सांड़ के हमले में मौत से पीड़ित परिजनों को चार लाख रुपये की सहायता राशि मिलने का प्रावधान है। इसके लिए मृतक के शव का पोस्टमार्टम और संबंधित तहसील से रिपोर्ट आनी होती है। सांड़ के हमले में मौत की घटनाएं तो कई हुईं, लेकिन परिजनों ने पोस्टमाॅर्टम नहीं कराया। यही वजह है कि एक जनवरी 2024 से अब तक सिर्फ नौ पीड़ित परिवारों को ही सहायता राशि मिली है।
आंकड़ों में गो-आश्रय स्थल और संरक्षित पशु
- 61 गो-आश्रय स्थल संचालित हैं जिले में
- 6400 पशुओं को किया गया है संरक्षित
- 2 वृहद गोशाला निर्माणाधीन
- 3 अस्थायी गो-आश्रय स्थल बन रहे
- 2 गो-आश्रय स्थलों के लिए जमीन मिली
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केस-एक : नवंबर के पहले सप्ताह में घुंघचाई थाना क्षेत्र के गुलड़िया भूपसिंह निवासी तौलेराम पर मंदिर के पास छुट्टा पशुओं के झुंड ने हमला कर दिया था। इसमें तौलेराम की मौत हो गई थी। गांव कसगंजा निवासी युवक की छुट्टा पशु से टकराकर मौत हो गई थी।
केस-दो: 18 जनवरी की शाम पूरनपुर के महादिया निवासी रामौतार पर सांड़ ने हमला कर दिया। हमले में जमीन पर गिरे किसान के ऊपर से पशुओं का झुंड रौंदते हुए निकल गया था। इसमें रामौतार की मौत हो गई।
केस-तीन: बिलसंडा थाना क्षेत्र के गांव बमरौली निवासी रामरतन कश्यप (71) बुधवार को गांव में ही एक वैवाहिक समारोह मेें गए थे। लौटते समय सांड़ ने उन पर हमला कर दिया। परिजन जब तक उन्हें अस्पताल ले जाते, रामौतार की मौत हो गई। परिजनों ने बिना पोस्टमॉर्टम कराए ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
वर्जन :
छुट्टा पशुओं को पकड़कर संरक्षित करने के निर्देश लगातार जारी किए जाते हैं। पशुओं को संरक्षित करने के लिए तीन अस्थायी और दो वृहद गोशाला बन रही हैं। कुछ के लिए जमीन चिह्नित की गई है। पशुओं को जल्द से जल्द संरक्षित करने के प्रयास हो रहे हैं।
- अरविंद कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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मानव-वन्यजीव संघर्ष में बीते वर्ष छह की जान गई, जबकि सांड़ के हमले सा टकराकर प्रत्येक माह कहीं न कहीं किसी की जान जाती है। छुट्टा पशुओं के हमले और टकराकर घायल होने के मामले तो अमूमन रोजाना हो रहे हैं। छुट्टा पशुओं को संरक्षित करने का प्रशासन का दावा और प्रयास दोनों ही अधूरे हैं।
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शहर में तो प्रत्येक चौराहे पर छुट्टा पशु दिखते हैं। यही हाल बीसलपुर, बिलसंडा, पूरनपुर, अमरिया, मझोला आदि कस्बों का है।
आश्रय स्थलों से ज्यादा सड़क पर छुट्टा पशु छुट्टा
पशुओं के संरक्षण के लिए जिले में 61 गो-आश्रय स्थल संचालित हैं। यहां करीब 6400 पशु संरक्षित हैं। इससे कहीं ज्यादा छुट्टा पशु शहर, कस्बों और गांवों की सड़कों व खेत-खलिहानों में घूम रहे हैं। गो-आश्रय स्थलों से बाहर विचरण करने वाले पशुओं का ठोस आंकड़ा प्रशासन के पास नहीं है।
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आवागमन में बाधक, खरीदारों की मुसीबत
शहर में गौहनिया चौराहे से स्टेडियम मार्ग पर डलावघर के पास पूरे दिन छुट्टा पशुओं का झुंड डेरा जमाए रहता है। सुनगढ़ी थाने से आगे, स्टेशन मार्ग पर, नौगवां ओवरब्रिज से पहले, असम चौराहे पर और अन्य स्थानाें पर जानवर विचरण करते दिखते हैं। यह जानवर आवागमन में बाधक तो बनते ही, हादसे का कारण भी बन रहे हैं। सब्जी एवं फल मंडी में 100 से अधिक छुट्टा पशु घूमते रहते हैं।
सहायता राशि के लिए जरूरी है पोस्टमॉर्टम
सांड़ के हमले में मौत से पीड़ित परिजनों को चार लाख रुपये की सहायता राशि मिलने का प्रावधान है। इसके लिए मृतक के शव का पोस्टमार्टम और संबंधित तहसील से रिपोर्ट आनी होती है। सांड़ के हमले में मौत की घटनाएं तो कई हुईं, लेकिन परिजनों ने पोस्टमाॅर्टम नहीं कराया। यही वजह है कि एक जनवरी 2024 से अब तक सिर्फ नौ पीड़ित परिवारों को ही सहायता राशि मिली है।
आंकड़ों में गो-आश्रय स्थल और संरक्षित पशु
- 61 गो-आश्रय स्थल संचालित हैं जिले में
- 6400 पशुओं को किया गया है संरक्षित
- 2 वृहद गोशाला निर्माणाधीन
- 3 अस्थायी गो-आश्रय स्थल बन रहे
- 2 गो-आश्रय स्थलों के लिए जमीन मिली
केस-एक : नवंबर के पहले सप्ताह में घुंघचाई थाना क्षेत्र के गुलड़िया भूपसिंह निवासी तौलेराम पर मंदिर के पास छुट्टा पशुओं के झुंड ने हमला कर दिया था। इसमें तौलेराम की मौत हो गई थी। गांव कसगंजा निवासी युवक की छुट्टा पशु से टकराकर मौत हो गई थी।
केस-दो: 18 जनवरी की शाम पूरनपुर के महादिया निवासी रामौतार पर सांड़ ने हमला कर दिया। हमले में जमीन पर गिरे किसान के ऊपर से पशुओं का झुंड रौंदते हुए निकल गया था। इसमें रामौतार की मौत हो गई।
केस-तीन: बिलसंडा थाना क्षेत्र के गांव बमरौली निवासी रामरतन कश्यप (71) बुधवार को गांव में ही एक वैवाहिक समारोह मेें गए थे। लौटते समय सांड़ ने उन पर हमला कर दिया। परिजन जब तक उन्हें अस्पताल ले जाते, रामौतार की मौत हो गई। परिजनों ने बिना पोस्टमॉर्टम कराए ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
वर्जन :
छुट्टा पशुओं को पकड़कर संरक्षित करने के निर्देश लगातार जारी किए जाते हैं। पशुओं को संरक्षित करने के लिए तीन अस्थायी और दो वृहद गोशाला बन रही हैं। कुछ के लिए जमीन चिह्नित की गई है। पशुओं को जल्द से जल्द संरक्षित करने के प्रयास हो रहे हैं।
- अरविंद कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी