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शिवनगर गांव के प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज
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पीलीभीत। ग्राम प्रधान निधि खाते से करीब दो साल पहले 21.15 लाख रुपये का नकद भुगतान निकालने पर शिवनगर गांव के प्रधान रामप्रसाद के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए गए हैं। अंतिम जांच को दो सदस्यीय टीम बनाई गई है। डीएम ने सभी बिंदुओं पर 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है। इस मामले में जांच अधिकारी को अभिलेख मुहैया न कराने पर सचिव पर एक साल पहले रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
दो साल पहले पूरनपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत शिवनगर मेें विकास कार्य के नाम पर घोटाला करने की शिकायत की गई थी। मामले की जांच शुरू हुई तो तत्कालीन सचिव राजबंदन मिश्रा ने महीनों तक अभिलेख ही नहीं दिए थे। सचिव पर जुलाई 2019 में गजरौला थाने में एफआईआर भी दर्ज करा दी गई थी।
उधर, पूरे मामले की गहनता से जांच कराई जाती रही। वक्त गुजरने के साथ-साथ मामला दब गया। डीएम पुलकित खरे ने लंबित पत्रावलियों को निपटाने में सख्ती दिखाई तो दोबारा शिवनगर ग्राम पंचायत का मामला तेजी पकड़ गया। जांच में सामने आया कि ग्राम पंचायत में ग्राम निधि के खाते से अधिकांश भुगतान नकद निकालकर किया गया है। खुद प्रधान ने भी अपने नाम पर दो साल पहले करीब 21.15 लाख रुपये निकाले हैं। जांच पत्रावली का अवलोकन करने के बाद डीएम ने सख्त रुख अपनाया है।
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प्रशासन ने ग्राम प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों पर रोक लगा दी है। प्रकरण की अंतिम जांच परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, अधिशासी अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण को दी गई है। डीएम ने बताया कि गठित टीम को स्थलीय जांच करके 15 दिन के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
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दो साल पहले पूरनपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत शिवनगर मेें विकास कार्य के नाम पर घोटाला करने की शिकायत की गई थी। मामले की जांच शुरू हुई तो तत्कालीन सचिव राजबंदन मिश्रा ने महीनों तक अभिलेख ही नहीं दिए थे। सचिव पर जुलाई 2019 में गजरौला थाने में एफआईआर भी दर्ज करा दी गई थी।
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उधर, पूरे मामले की गहनता से जांच कराई जाती रही। वक्त गुजरने के साथ-साथ मामला दब गया। डीएम पुलकित खरे ने लंबित पत्रावलियों को निपटाने में सख्ती दिखाई तो दोबारा शिवनगर ग्राम पंचायत का मामला तेजी पकड़ गया। जांच में सामने आया कि ग्राम पंचायत में ग्राम निधि के खाते से अधिकांश भुगतान नकद निकालकर किया गया है। खुद प्रधान ने भी अपने नाम पर दो साल पहले करीब 21.15 लाख रुपये निकाले हैं। जांच पत्रावली का अवलोकन करने के बाद डीएम ने सख्त रुख अपनाया है।
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प्रशासन ने ग्राम प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों पर रोक लगा दी है। प्रकरण की अंतिम जांच परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, अधिशासी अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण को दी गई है। डीएम ने बताया कि गठित टीम को स्थलीय जांच करके 15 दिन के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है।