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आंतरिक मूल्यांकन को लेकर बेखबर गुरुजी
Pilibhit
Updated Tue, 16 Oct 2012 12:00 PM IST
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पीलीभीत। जिले की माध्यमिक शिक्षा के कॉलेज अभी भी पुराने ढर्रे पर है। शिक्षा सत्र के सौ दिन गुजरने के बाद भी अधिकांश कॉलेजों में शैक्षिक कैलेंडर का पालन नहीं हो रहा है। निर्धारित कोर्स -प्रैक्टिकल के मानक धूल फांक रहे है। बोर्ड परीक्षाफल में शामिल होने वाला आंतरिक मूल्यांकन भी अधिकांश स्कूलों में शुरू नहीं हो पा रहा है।
माध्यमिक शिक्षा परिषद ने प्रदेश के विद्यालयों में शिक्षा के उचित संचालन के लिए शैक्षिक कलेंडर जारी किया है। कलेंडर के अनुसार छात्र-छात्राओं को समय पर उचित शिक्षा देकर उनके उज्ज्वल भविष्य को सुधारने का लक्ष्य निर्धारित है। मगर इसके विपरीत करीब जिले के अस्सी कॉलेजों में तीन माह से अधिक का समय गुजरने के बाद भी उनका अनुपालन नहीं हो पा रहा है। आंतरिक मूल्यांकन के लिए निर्धारित तिमाही टेस्ट अभी तक दर्जनों कॉलेजों में शुरू नहीं हो पा रहे है। अगस्त, अक्तूबर और दिसंबर माह में निर्धारित दस-दस अंकों के इस परीक्षा के अंक छात्र के बोर्ड परीक्षा परिणाम में भी शामिल होते हैं। नई व्यवस्था में हर विषय में जहां तीस अंकों का आंतरिक मूल्यांकन निर्धारित है। इसमें टेस्ट के साथ ही प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट वर्क भी शामिल है। वहीं 70 अंकों की बोर्र्ड परीक्षा भी होगी। कॉलेजों के मन रवैये से विभागीय अधिकारियों ने आंखें मूंदे बैठे है।
औचक निरीक्षण में कई बार कॉलेजों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए है। लैब, लाइब्रेरी और सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए बीस अक्तूबर तक समय सीमा निर्धारित की गई है। लापरवाही बरतने पर कॉलेज प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ।
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रामपाल सिंह, प्रभारी डीआईओएस
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माध्यमिक शिक्षा परिषद ने प्रदेश के विद्यालयों में शिक्षा के उचित संचालन के लिए शैक्षिक कलेंडर जारी किया है। कलेंडर के अनुसार छात्र-छात्राओं को समय पर उचित शिक्षा देकर उनके उज्ज्वल भविष्य को सुधारने का लक्ष्य निर्धारित है। मगर इसके विपरीत करीब जिले के अस्सी कॉलेजों में तीन माह से अधिक का समय गुजरने के बाद भी उनका अनुपालन नहीं हो पा रहा है। आंतरिक मूल्यांकन के लिए निर्धारित तिमाही टेस्ट अभी तक दर्जनों कॉलेजों में शुरू नहीं हो पा रहे है। अगस्त, अक्तूबर और दिसंबर माह में निर्धारित दस-दस अंकों के इस परीक्षा के अंक छात्र के बोर्ड परीक्षा परिणाम में भी शामिल होते हैं। नई व्यवस्था में हर विषय में जहां तीस अंकों का आंतरिक मूल्यांकन निर्धारित है। इसमें टेस्ट के साथ ही प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट वर्क भी शामिल है। वहीं 70 अंकों की बोर्र्ड परीक्षा भी होगी। कॉलेजों के मन रवैये से विभागीय अधिकारियों ने आंखें मूंदे बैठे है।
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औचक निरीक्षण में कई बार कॉलेजों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए है। लैब, लाइब्रेरी और सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए बीस अक्तूबर तक समय सीमा निर्धारित की गई है। लापरवाही बरतने पर कॉलेज प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ।
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रामपाल सिंह, प्रभारी डीआईओएस