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शेरपुर के युवक की नेपाल में मौत
Pilibhit
Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
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शेरपुरकलां। कस्बे के युवक की नेपाल में मौत हो गई। नेपाल पुलिस ने युवक के परिजनों को शव सौंप दिया। वहां की पुलिस ने घटना को आत्महत्या माना। इससे उसके परिजन संतुष्ट नहीं है।
कस्बे के महिपाल सिंह का तीस वर्षीय पुत्र मिंटू गुप्ता करीब तीन साल पहले नेपाल मेें मजदूरी करने गया था। मिंटू के परिजनों ने बताया कि वह नेपाल के कंचनपुर में अपनी ससुराल में पत्नी और बच्चों के साथ रहकर ईंट भट्टे पर मजदूरी करने लगा। मिंटू की मौत की सूचना तीन दिन पूर्व उसकी पत्नी आरती देवी ने फोन कर दी। घटना की जानकारी पर परिजनों में कोहराम मच गया। महिपाल अपने कुछ साथियों के साथ नेपाल रवाना हुआ। महिपाल ने बताया कि उसके पुत्र की गर्दन पर रस्सी पड़ी थी। रस्सी के कई निशान भी थे। उसने बताया कि नेपाल पुलिस ने जांच करने के बाद आत्महत्या बताया और शव सौंप दिया। गमगीन माहौल में मिंटू गुप्ता का अंतिम संस्कार नेपाल में ही कर दिया गया। महिपाल का आरोप है कि उसके पुत्र ने आत्महत्या नहीं की। उसकी हत्या हुई है, लेकिन नेपाल पुलिस ने उसकी एक न सुनकर एक कागज पर अंगूठा लगवा लिया और शव दे दिया। मिंटू अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था। इकलौता भाई होने के चलते उसकी छह बहने उसे खासा प्यार करती थी। इकलौते पुत्र की मौत पर महिपाल और उसकी पत्नी के अरमान अधूरे रह गए।
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कस्बे के महिपाल सिंह का तीस वर्षीय पुत्र मिंटू गुप्ता करीब तीन साल पहले नेपाल मेें मजदूरी करने गया था। मिंटू के परिजनों ने बताया कि वह नेपाल के कंचनपुर में अपनी ससुराल में पत्नी और बच्चों के साथ रहकर ईंट भट्टे पर मजदूरी करने लगा। मिंटू की मौत की सूचना तीन दिन पूर्व उसकी पत्नी आरती देवी ने फोन कर दी। घटना की जानकारी पर परिजनों में कोहराम मच गया। महिपाल अपने कुछ साथियों के साथ नेपाल रवाना हुआ। महिपाल ने बताया कि उसके पुत्र की गर्दन पर रस्सी पड़ी थी। रस्सी के कई निशान भी थे। उसने बताया कि नेपाल पुलिस ने जांच करने के बाद आत्महत्या बताया और शव सौंप दिया। गमगीन माहौल में मिंटू गुप्ता का अंतिम संस्कार नेपाल में ही कर दिया गया। महिपाल का आरोप है कि उसके पुत्र ने आत्महत्या नहीं की। उसकी हत्या हुई है, लेकिन नेपाल पुलिस ने उसकी एक न सुनकर एक कागज पर अंगूठा लगवा लिया और शव दे दिया। मिंटू अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था। इकलौता भाई होने के चलते उसकी छह बहने उसे खासा प्यार करती थी। इकलौते पुत्र की मौत पर महिपाल और उसकी पत्नी के अरमान अधूरे रह गए।
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