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आखिर क्यों नहीं हो पा रहा बाघ प्रजाति का संरक्षण

Sat, 17 Nov 2018 12:05 AM IST
Updated Sat, 17 Nov 2018 12:05 AM IST
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आखिर क्यों नहीं हो पा रहा बाघ प्रजाति का संरक्षण
पीलीभीत। पीलीभीत के जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिले साढ़े चार साल का समय बीत चुका है। तब ऐसा माना जा रहा था कि बाघ समेत अन्य वन्यजीव के संरक्षण के लिए ठोस प्रयास होंगे, मगर संसाधनों व फील्ड स्टाफ की कमी के ऐसा होता कुछ नहीं दिख रहा है। यही वजह है कि जंगल से बाहर क्षेत्र के साथ जंगल क्षेत्र के अंतर्गत भी बाघों की सुरक्षा पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
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पहले तो टाइगर रिजर्व के आला पदों के रिक्त होने की बात कहकर जंगल व वन्यजीवों की सुरक्षा को नियमित नहीं किया जा सका, लेकिन इधर फील्ड डायरेक्टर व डिप्टी डायरेक्टर के पद पर तैनाती होने के बाद ऐसा माना जाने लगा कि अब टाइगर रिजर्व की व्यवस्थाओं में सुधार हो जाएगा। हालांकि व्यवस्थाओं को सुधारने के क्रम में अधिकारियों ने प्रयास भी शुरू किए, लेकिन संसाधनों व फील्ड स्टाफ की कमी इन प्रयासों में रोड़ा बन गई। यही वजह है कि जंगल से बाहर आबादी क्षेत्र के निकट तक बाघों की लगातार चहलकदमी के चलते वन महकमा इसको रोकने में सफल नहीं हो रहा हैं। वहीं बाघ व तेंदुए की लगातार मौत की घटनाएं भी सामने आ रही हैं, जो इनके संरक्षण पर सवाल खड़ा कर रही हैं।
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आबादी क्षेत्र में लगातार चहलकदमी भी है वजह
टाइगर रिजर्व के बाहर जिले के कई इलाकों में बाघ व तेंदुए की लगातार आबादी क्षेत्र के निकट चहलकदमी बनी हुई है। आबादी के निकट वन्यजीव की लगातार मौजूदगी के बाद ग्रामीणों में दहशत के साथ रोष है। दस दिन पूर्व खीरी वन प्रभाग के चलतुआ गांव में कई दिनों से चहलकदमी कर रही बाघिन ग्रामीणों के रोष का शिकार हो गई। ऐसे में टाइगर रिजर्व व वन महकमे को बाघ समेत अन्य वन्यजीवों के जंगल सीमा से बाहर चहलकदमी पर पूरी निगरानी के साथ उसकी रोकथाम के उपाय करने से ही वन्यजीवों की सुरक्षा संभव हो सकती हैं।
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तेंदुए की मौत पर भी उजागर हुई लापरवाही
एक सप्ताह पूर्व बराही रेंज की बराही बीट के जंगल से बरामद हुए तेंदुए के शव की पीएम रिपोर्ट के बाद अधिकारी उलझते दिखे। वन्यजीव संघर्ष का हवाले दे रहे टाइगर रिजर्व प्रशासन भी हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस कार्रवाई के सहारे आ गया। इसके बाद विभाग ने भी हत्या की आशंका मानते हुए विभागीय जांच शुरू कर दी। खास बात यह हैं कि जिस जग से तेंदुए का शव बरामद हुआ था वहां से आबादी की दूरी मात्र 500 मीटर की है। वहीं पिछले कई दिनों से तेंदुआ चार गांव की सीमा क्षेत्र में आबादी में घुसपैठ कर रहा था।

घटना की नहीं होती विभाग को सूचना
टाइगर रिजर्व में जंगल क्षेत्र के बाहर तो सही बल्कि जंगल क्षेत्र के अंदर अगर कोई वन्यजीव की मौत हो जाती है तो फील्ड की जिम्मेदारी निभा रहे वनकर्मियों को इसकी जानकारी नहीं हो पाती है। गत माह पूर्व बराही रेंज के अंतर्गत रजवाहा नहर की पटरी पर बाघ व तेंदुए के शावकों के शव होने की सूचना ग्रामीणों द्वारा विभाग को तब लग सकी, जब शव की क्षत-विक्षत हो गए थे।


वन्यजीवों की सुरक्षा में कोई चूक नहीं होने दी जा रही है। बाघ व तेंदुए के जंगल व जंगल सीमा से बाहर चहलकदमी पर पूरी नजर रखने के सभी रेंज में निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही ग्रामीणों से संपर्क बनाए रखने के लिए भी वनकर्मियों को हिदायत दी गई हैं।
आदर्श कुमार, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व
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