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साल दर साल बिखर रहा है जिले का इकलौता महिला महाविद्यालय
Updated Thu, 24 Aug 2017 06:39 PM IST
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पीलीभीत। उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार की कोशिश सफल होती नहीं दिख रही है। इसकी एक वजह संसाधनों का अभाव है। जिले के रामलुभाई साहनी राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में मात्र चार प्रवक्ता हैं। जब कि यहां बीए को छोड़कर बीएससी, बीकॉम व एमकॉम की कक्षाएं चलती हैं। यहां बीएससी (जेडबीसी व पीसीएम) की 80-80, बीकॉम की 80 व एमकॉम की 60 सीटें हैं। महाविद्यालय की स्थापना 1997 में हुई थी। शुरू के दिनों में यहां दाखिले के लिए खूब मारा मारी होती थी लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।
महिला महाविद्यालय में प्राचार्य समेत कॉमर्स के दो प्रवक्ता पदों के सापेक्ष एक, ज्योलॉजी, बॉटनी, मैथ के एक-एक पद के सापेक्ष एक-एक प्रवक्ता तैनात हैं, लेकिन फिजिक्स व केमिस्ट्री प्रवक्ता का पद रिक्त है। यहां प्राचार्य रहे डॉ. आरसी वाजपेई का स्थानांतरण हरदोई हो चुका है। उनके स्थान पर प्रवक्ता डॉ. नरेशपाल प्रभारी प्राचार्य बतौर कार्य देख रहे हैं। खास बात यह है कि शासन द्वारा डॉ. नरेशपाल की भी पदोन्नति कर उन्हें प्राचार्य बनाया गया है। ऐसे में उनका भी यहां से जाना तय है। इसके बाद यहां डॉ. दिनेश चंद्रा, डॉ. नगेंद्रपाल व डॉ. नरेंद्र बत्रा के कंधों पर ही सारी जिम्मेदारी रहेगी।
अब तक नहीं शुरू हुईं बीए की कक्षाएं
महिला महाविद्यालय मेें बीए की कक्षाओं के संचालन को लेकर कई बार बात उठी। सांसद मेनका संजय गांधी ने लिखा पढ़ी की लेकिन प्रयास विफल रहे। जनवरी में महाविद्यालय आए निदेशक उच्च शिक्षा आरपी सिंह ने सत्र 2017-18 में बीए व एमएससी की कक्षाओं के संचालन की बात कही लेकिन दावे हवा हवाई साबित हुए।
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हर संभव प्रयास होता है पाठ्य सामग्री सभी तक पहुंचे
महिला महाविद्यालय अल्प संसाधनों के बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए हुए है। वाणिज्य प्रवक्ता डॉ. नरेंद्र बत्रा के मुताबिक छात्राओं का व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया है। प्रत्येक दिन पढ़ाए गए स्टडी मैटेरियल को व्हाट्सऐप पर अपलोड कर दिया जाता है। इससे गैरहाजिर रहने वाली छात्राओं को भी पाठ्य सामग्री मिल जाती है। इसके साथ ही अगले दिन किस टॉपिक पर पढ़ाई होगी, इसे एक दिन पूर्व शाम को ही अपलोड कर दिया जाता है जो छात्राओं के लिए लाभकारी होता है।
वर्जन:
24 पीबीटीपी 30
महाविद्यालय में प्रवक्ता व अन्य संसाधनों की कमी है लेकिन बेहतर शिक्षा देने का प्रयास किया जाता है। प्राचार्य समेत कुछ प्रवक्ताओं के स्थानांतरण हुए है। ऑनलाइन प्लेसमेंट प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि यहां रिक्त पदों पर जल्द ही नए प्रवक्ताओं की तैनाती होगी।
- डॉ. नरेशपाल, प्रभारी प्राचार्य
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महिला महाविद्यालय में प्राचार्य समेत कॉमर्स के दो प्रवक्ता पदों के सापेक्ष एक, ज्योलॉजी, बॉटनी, मैथ के एक-एक पद के सापेक्ष एक-एक प्रवक्ता तैनात हैं, लेकिन फिजिक्स व केमिस्ट्री प्रवक्ता का पद रिक्त है। यहां प्राचार्य रहे डॉ. आरसी वाजपेई का स्थानांतरण हरदोई हो चुका है। उनके स्थान पर प्रवक्ता डॉ. नरेशपाल प्रभारी प्राचार्य बतौर कार्य देख रहे हैं। खास बात यह है कि शासन द्वारा डॉ. नरेशपाल की भी पदोन्नति कर उन्हें प्राचार्य बनाया गया है। ऐसे में उनका भी यहां से जाना तय है। इसके बाद यहां डॉ. दिनेश चंद्रा, डॉ. नगेंद्रपाल व डॉ. नरेंद्र बत्रा के कंधों पर ही सारी जिम्मेदारी रहेगी।
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अब तक नहीं शुरू हुईं बीए की कक्षाएं
महिला महाविद्यालय मेें बीए की कक्षाओं के संचालन को लेकर कई बार बात उठी। सांसद मेनका संजय गांधी ने लिखा पढ़ी की लेकिन प्रयास विफल रहे। जनवरी में महाविद्यालय आए निदेशक उच्च शिक्षा आरपी सिंह ने सत्र 2017-18 में बीए व एमएससी की कक्षाओं के संचालन की बात कही लेकिन दावे हवा हवाई साबित हुए।
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हर संभव प्रयास होता है पाठ्य सामग्री सभी तक पहुंचे
महिला महाविद्यालय अल्प संसाधनों के बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए हुए है। वाणिज्य प्रवक्ता डॉ. नरेंद्र बत्रा के मुताबिक छात्राओं का व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया है। प्रत्येक दिन पढ़ाए गए स्टडी मैटेरियल को व्हाट्सऐप पर अपलोड कर दिया जाता है। इससे गैरहाजिर रहने वाली छात्राओं को भी पाठ्य सामग्री मिल जाती है। इसके साथ ही अगले दिन किस टॉपिक पर पढ़ाई होगी, इसे एक दिन पूर्व शाम को ही अपलोड कर दिया जाता है जो छात्राओं के लिए लाभकारी होता है।
वर्जन:
24 पीबीटीपी 30
महाविद्यालय में प्रवक्ता व अन्य संसाधनों की कमी है लेकिन बेहतर शिक्षा देने का प्रयास किया जाता है। प्राचार्य समेत कुछ प्रवक्ताओं के स्थानांतरण हुए है। ऑनलाइन प्लेसमेंट प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि यहां रिक्त पदों पर जल्द ही नए प्रवक्ताओं की तैनाती होगी।
- डॉ. नरेशपाल, प्रभारी प्राचार्य