{"_id":"5a5e39b74f1c1b74268b4b61","slug":"41516124599-pilibhit-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रखवाली कर रहे किसान को बाघ बनाया निवाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रखवाली कर रहे किसान को बाघ बनाया निवाला
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,पीलीभीत
Updated Wed, 17 Jan 2018 01:00 AM IST
विज्ञापन
टाइगर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
टाइगर रिजर्व की हरीपुर रेंज के जंगल किनारे खेत की रखवाली कर रहे गांव निजामपुर उर्फ लाह निवासी 50 वर्षीय किसान मथुरा प्रसाद को बाघ ने अपना निवाला बना लिया। किसान सोमवार शाम से लापता था। खोजबीन करने पर मंगलवार को उसका अधखाया शव झाड़ियों में मिला। घटना के विरोध में ग्रामीणों ने नाराजगी व्यक्त की और वन अफसरों को मौके पर बुलाने की मांग कर हंगामा किया। पुलिस ने लोगों को समझाकर शांत किया। इसके बाद शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा।
सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र के गांव निजामपुर उर्फ लाह निवासी 50 वर्षीय किसान मथुरा प्रसाद गांव बंजरिया निवासी सुखविंदर सिंह के गेहूं के खेत की रखवाली करने सोमवार को अपराह्न ढाई बजे घर से निकले थे। शाम को घर न लौटने पर परिवारवालों ने रात को ही उसकी तलाश शुरू की। 12 बजे तक मथुरा प्रसाद का सुराग न लगने पर सभी लोग लौट आए। मंगलवार सुबह फिर तलाश शुरू की गई। इस दौरान खेत के समीप मथुरा प्रसाद की चप्पलें पड़ी देख अनहोनी की आशंका पर आसपास तलाश की गई। कुछ आगे बढ़ने पर झाड़ियों में मथुरा प्रसाद का अधखाया शव मिला। बाघ ने किसान के कमर से नीचे का हिस्सा पूरी तरह खा लिया था। सूचना मिलने पर तमाम ग्रामीणों मौके पर पहुंच गए। कुछ देर बाद एसओ सेहरामऊ रूम सिंह बघेल फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस को देख लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस पर एसओ लोगों को समझाकर शव जंगल से करीब 200 मीटर दूर लेकर आए। इस बीच लोगों ने वन विभाग के अफसरों को मौके पर बुलाने की मांग करते हुए पुन: हंगामा शुरू कर दिया। सीओ अनुराग दर्शन और एसओ रूम सिंह बघेल हंगामा कर रहे लोगों को बमुश्किल समझाकर शांत किया। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा।
जंगल से लगी हुई है खेत की मेढ़
मथुरा प्रसाद जिस खेत की रखवाली करने गए थे उसकी मेढ़ जंगल से लगी हुई है। ठंड से बचने को मथुरा प्रसाद इसी मेढ़ के किनारे आग जलाकर रखवाली करता था। मंगलवार को आग की राख के समीप ही मथुरा प्रसाद की चप्पलें मिली। इससे ऐसा माना जा रहा है कि हमले के समय मथुरा प्रसाद इसी स्थान पर थे।
विज्ञापन
परिवार का मुखिया था मथुरा प्रसाद
मथुरा प्रसाद अपने परिवार का मुखिया था। उसके परिवार में पत्नी कलावती के अलावा पुत्र अशोक कुमार व पुत्री चहेता देवी है। चहेता देवी की गांव फत्तेपुर में शादी हो चुकी है। मथुरा प्रसाद के दो पौत्र है। अशोक कुमार भी मेहनत मजदूरी कर अपने पिता का हाथ बटाना शुरू किया था। इस दौरान उसके सिर से पिता का ही साया उठ गया। मथुरा प्रसाद मौत पर परिवार में कोहराम मचा है।
पहले भी देखी गई बाघ की चहलकदमी
चार साल पहले बंजरिया निवासी जगन्नाथ का भी अधखाया शव इसी जंगल में घटना स्थल से कुछ दूरी पर मिला था। इसके बाद इस इलाके में बाघ की चहल कदमी तमाम बार देखी गई। वन विभाग के अफसर भी बंजरिया गांव के समीप बाघ की चहल कदमी होना मान रहे है।
जंगल के अंदर की है घटना: वन संरक्षक
पीलीभीत। वन संरक्षक वीके सिंह ने बताया कि हरीपुर रेंज की घटना जंगल के अंदर हुई है। खेत और जंगल के बीच तार फेसिंग है जिसमें बाघ का खेत में आना और खेत से किसी व्यक्ति को जंगल में खींच ले जाना संभव नहीं है। दोनों डीएफओ के साथ टीम मौके पर भेजी गई है। जांच में हरीपुर रेंज की बंजरिया बीट में कंपार्टमेंट गदियान-3 में घटना पाई गई है।
टाइम लाइन
सोमवार
अपराह्न 2.30 बजे घर से खेत की रखवाली को निकले मथुरा प्रसाद
शाम 7.45 मथुरा प्रसाद की तलाश में खेत पहुंचे लोग
रात 12.15 बजे मथुरा का सुराग न होने पर लौटे लोग
मंगलवार
सुबह 7.30 बजे फिर खेत के समीप पहुंचे तमाम लोग
7.40 बजे मिली मथुरा प्रसाद की चप्पलें
7.50 बजे मिला मथुरा का अधखाया शव
8.15 बजे एकत्र होने लगी लोगों की भीड़
9.00 बजे दी गई वन विभाग और पुलिस को सूचना
10.20 बजे पहुंचे एसओ सेहरामऊ
11.50 बजे पहुंची राजस्व विभाग की टीम
11.52 बजे घटना स्थल से उठाया गया शव
11.56 बजे लोगों ने हंगामा कर रोका शव
12.00 बजे पहुंचे सीओ
12.10 बजे शव को कब्जे में कर ले गई पुलिस
तहसील क्षेत्र में दो दिन में गई दो किसान की जान
सवा साल में बाइस लोग बने बाघ का निवाला
टाइगर रिजर्व और इसके आसपास बाघ की ताबड़तोड़ घटनाओं में जंगल से सटे इलाके लोगों में दहशत के साथ हड़कंप मचा हुआ है। बाघ के हमलों में तहसील क्षेत्र में दो दिन में दो लोग अपनी जान गवां चुके है। सवा साल में बाइस लोगों को बाघ अपना निवाला बना चुका है। अगर ऐसे ही घटनाएं होती रही। तब खेती किसानी कैसे होगी, यह सोच कर किसान चिंतित होने लगे है।
टाइगर रिजर्व घोषित होने से पहले और इसके बाद भी बाघ की घटनाएं यदा कदा ही होती थी। इसके बाद 24 अक्तूबर 2016 से शुरू हुआ हमलों का सिलसिला अब तक जारी है। तहसील क्षेत्र में 14 जनवरी को बाघ ने हमला कर गांव चतीपुर निवासी राजेश को उस समय निवाला बना लिया था। जब वह अपने साथी मजदूरों के साथ गन्ना की छिलाई कर रहा था। बाघ के हमले से उसके साथियों ने भाग कर अपनी जान बचाई थी। घटना के दूसरे दिन पंद्रह जनवरी को खेत की रखवाली करने गया गांव निजामपुर उर्फ लाह निवासी मथुरा प्रसाद बाघ का निवाला बना। उसका शव दूसरे दिन मिला। सवा साल में 22 लोगों की मौत हुई। इसमें तीन लोगों की मौत वर्ष 2016 में हुई, जबकि वर्ष 2017 में 17 लोग बाघ का शिकार हुए। सवा साल में मथुरा प्रसाद बाघ का बाइसवां शिकार और वर्ष 2018 का दूसरा शिकार बना।
आठ किलोमीटर दूरी पर बाघ ने किया दूसरा शिकार
सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र में गांव हरीपुर के समीप और खुटार रेंज जंगल से तीन सौ मीटर दूरी पर सुरेंद्र सिंह के खेत में गन्ना छील रहे गांव चतीपुर निवासी राजेश को बाघ ने निवाला बनाया था। शोर-शराबा और फायरिंग कर बाघ को खदेड़ने के बाद बमुश्किल राजेश के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा गया था। राजेश की मौत की घटना को लोग भूल भी नहीं पाए थे। दहशत के चलते क्षेत्र के किसान खेतों में जाना भी शुरू भी नहीं हुए थे। इस दौरान मंगलवार को घटना स्थल से करीब आठ किलोमीटर दूर बाघ ने गांव निजामपुर उर्फ लाह निवासी खेत की रखवाली कर रहे मथुरा प्रसाद को अपना निवाला बना लिया। आठ किलोमीटर की दूरी पर बाघ के दूसरे हमले को लेकर लोग उसी बाघ द्वारा घटना को अंजाम देना मान रहे है। जिसने राजेश का मार डाला था। दूसरी घटना के बाद जंगल से सटे गांव के लोग और अधिक दहशत में आ गए है। बाघ के हमला की ऐसी ही ताबड़तोड़ घटनाएं होगी। तब खेती किसानी कैसे हो सकेेगी। जंगल के आसपास के लोगों में यही चर्चा का विषय बना हुआ है।
सवा साल में हुए बाघ के हमले
1. 24/10/2016 बेनीराम मरौरी
2. 28/11/2016 बाबूराम पिपरिया संतोष
3. 11/12/2016 अहमद खां डगा
4. 11/12/2016 राजेश राठौर पिपरिया संतोष
5. 05/02/2017 धनीराम कुंवरपुर
6. 07/02/2017 नन्हें लाल पिपरिया
7. 11/02/ 2017 गंगाराम कलीनगर
8. 16/02/2017 कलावती मेवातपुर
9. 05/03/2017 ब्रह्म्मस्परूप रंपुरा
10. 31/03/2017 श्यामबिहारी जमुनिया
11. 09/05/2017 ताराचंद अनवरगंज
12. 18/06/2017 केवल प्रसाद रूपपुर
13. 20/07/2017 मिहीलाल शिवपुरिया
14. 01/07/2017 ननकी सैदुल्लागंज
15. 07/08/2017 तसलीम अहमद डांग
16. 08/08/2017 शमशुल सरैदा पट्टी
17. 10/08/2017 कुंवरसेन बेहरी
18. 18/08/2017 रामचंद्र पीलीभीत
19. 01/10/2017 बबलू खरगापुर
20. 26/12/2017 जोगेंद्र सिंह गढ़ा
21. 14/01/2018 राजेश चतीपुर
22. 16/01/2018 मथुरा प्रसाद निजामपुर उर्फ लाह
सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र के गांव निजामपुर उर्फ लाह निवासी 50 वर्षीय किसान मथुरा प्रसाद गांव बंजरिया निवासी सुखविंदर सिंह के गेहूं के खेत की रखवाली करने सोमवार को अपराह्न ढाई बजे घर से निकले थे। शाम को घर न लौटने पर परिवारवालों ने रात को ही उसकी तलाश शुरू की। 12 बजे तक मथुरा प्रसाद का सुराग न लगने पर सभी लोग लौट आए। मंगलवार सुबह फिर तलाश शुरू की गई। इस दौरान खेत के समीप मथुरा प्रसाद की चप्पलें पड़ी देख अनहोनी की आशंका पर आसपास तलाश की गई। कुछ आगे बढ़ने पर झाड़ियों में मथुरा प्रसाद का अधखाया शव मिला। बाघ ने किसान के कमर से नीचे का हिस्सा पूरी तरह खा लिया था। सूचना मिलने पर तमाम ग्रामीणों मौके पर पहुंच गए। कुछ देर बाद एसओ सेहरामऊ रूम सिंह बघेल फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस को देख लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस पर एसओ लोगों को समझाकर शव जंगल से करीब 200 मीटर दूर लेकर आए। इस बीच लोगों ने वन विभाग के अफसरों को मौके पर बुलाने की मांग करते हुए पुन: हंगामा शुरू कर दिया। सीओ अनुराग दर्शन और एसओ रूम सिंह बघेल हंगामा कर रहे लोगों को बमुश्किल समझाकर शांत किया। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा।
विज्ञापन
जंगल से लगी हुई है खेत की मेढ़
मथुरा प्रसाद जिस खेत की रखवाली करने गए थे उसकी मेढ़ जंगल से लगी हुई है। ठंड से बचने को मथुरा प्रसाद इसी मेढ़ के किनारे आग जलाकर रखवाली करता था। मंगलवार को आग की राख के समीप ही मथुरा प्रसाद की चप्पलें मिली। इससे ऐसा माना जा रहा है कि हमले के समय मथुरा प्रसाद इसी स्थान पर थे।
विज्ञापन
परिवार का मुखिया था मथुरा प्रसाद
मथुरा प्रसाद अपने परिवार का मुखिया था। उसके परिवार में पत्नी कलावती के अलावा पुत्र अशोक कुमार व पुत्री चहेता देवी है। चहेता देवी की गांव फत्तेपुर में शादी हो चुकी है। मथुरा प्रसाद के दो पौत्र है। अशोक कुमार भी मेहनत मजदूरी कर अपने पिता का हाथ बटाना शुरू किया था। इस दौरान उसके सिर से पिता का ही साया उठ गया। मथुरा प्रसाद मौत पर परिवार में कोहराम मचा है।
पहले भी देखी गई बाघ की चहलकदमी
चार साल पहले बंजरिया निवासी जगन्नाथ का भी अधखाया शव इसी जंगल में घटना स्थल से कुछ दूरी पर मिला था। इसके बाद इस इलाके में बाघ की चहल कदमी तमाम बार देखी गई। वन विभाग के अफसर भी बंजरिया गांव के समीप बाघ की चहल कदमी होना मान रहे है।
जंगल के अंदर की है घटना: वन संरक्षक
पीलीभीत। वन संरक्षक वीके सिंह ने बताया कि हरीपुर रेंज की घटना जंगल के अंदर हुई है। खेत और जंगल के बीच तार फेसिंग है जिसमें बाघ का खेत में आना और खेत से किसी व्यक्ति को जंगल में खींच ले जाना संभव नहीं है। दोनों डीएफओ के साथ टीम मौके पर भेजी गई है। जांच में हरीपुर रेंज की बंजरिया बीट में कंपार्टमेंट गदियान-3 में घटना पाई गई है।
टाइम लाइन
सोमवार
अपराह्न 2.30 बजे घर से खेत की रखवाली को निकले मथुरा प्रसाद
शाम 7.45 मथुरा प्रसाद की तलाश में खेत पहुंचे लोग
रात 12.15 बजे मथुरा का सुराग न होने पर लौटे लोग
मंगलवार
सुबह 7.30 बजे फिर खेत के समीप पहुंचे तमाम लोग
7.40 बजे मिली मथुरा प्रसाद की चप्पलें
7.50 बजे मिला मथुरा का अधखाया शव
8.15 बजे एकत्र होने लगी लोगों की भीड़
9.00 बजे दी गई वन विभाग और पुलिस को सूचना
10.20 बजे पहुंचे एसओ सेहरामऊ
11.50 बजे पहुंची राजस्व विभाग की टीम
11.52 बजे घटना स्थल से उठाया गया शव
11.56 बजे लोगों ने हंगामा कर रोका शव
12.00 बजे पहुंचे सीओ
12.10 बजे शव को कब्जे में कर ले गई पुलिस
तहसील क्षेत्र में दो दिन में गई दो किसान की जान
सवा साल में बाइस लोग बने बाघ का निवाला
टाइगर रिजर्व और इसके आसपास बाघ की ताबड़तोड़ घटनाओं में जंगल से सटे इलाके लोगों में दहशत के साथ हड़कंप मचा हुआ है। बाघ के हमलों में तहसील क्षेत्र में दो दिन में दो लोग अपनी जान गवां चुके है। सवा साल में बाइस लोगों को बाघ अपना निवाला बना चुका है। अगर ऐसे ही घटनाएं होती रही। तब खेती किसानी कैसे होगी, यह सोच कर किसान चिंतित होने लगे है।
टाइगर रिजर्व घोषित होने से पहले और इसके बाद भी बाघ की घटनाएं यदा कदा ही होती थी। इसके बाद 24 अक्तूबर 2016 से शुरू हुआ हमलों का सिलसिला अब तक जारी है। तहसील क्षेत्र में 14 जनवरी को बाघ ने हमला कर गांव चतीपुर निवासी राजेश को उस समय निवाला बना लिया था। जब वह अपने साथी मजदूरों के साथ गन्ना की छिलाई कर रहा था। बाघ के हमले से उसके साथियों ने भाग कर अपनी जान बचाई थी। घटना के दूसरे दिन पंद्रह जनवरी को खेत की रखवाली करने गया गांव निजामपुर उर्फ लाह निवासी मथुरा प्रसाद बाघ का निवाला बना। उसका शव दूसरे दिन मिला। सवा साल में 22 लोगों की मौत हुई। इसमें तीन लोगों की मौत वर्ष 2016 में हुई, जबकि वर्ष 2017 में 17 लोग बाघ का शिकार हुए। सवा साल में मथुरा प्रसाद बाघ का बाइसवां शिकार और वर्ष 2018 का दूसरा शिकार बना।
आठ किलोमीटर दूरी पर बाघ ने किया दूसरा शिकार
सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र में गांव हरीपुर के समीप और खुटार रेंज जंगल से तीन सौ मीटर दूरी पर सुरेंद्र सिंह के खेत में गन्ना छील रहे गांव चतीपुर निवासी राजेश को बाघ ने निवाला बनाया था। शोर-शराबा और फायरिंग कर बाघ को खदेड़ने के बाद बमुश्किल राजेश के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा गया था। राजेश की मौत की घटना को लोग भूल भी नहीं पाए थे। दहशत के चलते क्षेत्र के किसान खेतों में जाना भी शुरू भी नहीं हुए थे। इस दौरान मंगलवार को घटना स्थल से करीब आठ किलोमीटर दूर बाघ ने गांव निजामपुर उर्फ लाह निवासी खेत की रखवाली कर रहे मथुरा प्रसाद को अपना निवाला बना लिया। आठ किलोमीटर की दूरी पर बाघ के दूसरे हमले को लेकर लोग उसी बाघ द्वारा घटना को अंजाम देना मान रहे है। जिसने राजेश का मार डाला था। दूसरी घटना के बाद जंगल से सटे गांव के लोग और अधिक दहशत में आ गए है। बाघ के हमला की ऐसी ही ताबड़तोड़ घटनाएं होगी। तब खेती किसानी कैसे हो सकेेगी। जंगल के आसपास के लोगों में यही चर्चा का विषय बना हुआ है।
सवा साल में हुए बाघ के हमले
1. 24/10/2016 बेनीराम मरौरी
2. 28/11/2016 बाबूराम पिपरिया संतोष
3. 11/12/2016 अहमद खां डगा
4. 11/12/2016 राजेश राठौर पिपरिया संतोष
5. 05/02/2017 धनीराम कुंवरपुर
6. 07/02/2017 नन्हें लाल पिपरिया
7. 11/02/ 2017 गंगाराम कलीनगर
8. 16/02/2017 कलावती मेवातपुर
9. 05/03/2017 ब्रह्म्मस्परूप रंपुरा
10. 31/03/2017 श्यामबिहारी जमुनिया
11. 09/05/2017 ताराचंद अनवरगंज
12. 18/06/2017 केवल प्रसाद रूपपुर
13. 20/07/2017 मिहीलाल शिवपुरिया
14. 01/07/2017 ननकी सैदुल्लागंज
15. 07/08/2017 तसलीम अहमद डांग
16. 08/08/2017 शमशुल सरैदा पट्टी
17. 10/08/2017 कुंवरसेन बेहरी
18. 18/08/2017 रामचंद्र पीलीभीत
19. 01/10/2017 बबलू खरगापुर
20. 26/12/2017 जोगेंद्र सिंह गढ़ा
21. 14/01/2018 राजेश चतीपुर
22. 16/01/2018 मथुरा प्रसाद निजामपुर उर्फ लाह