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मां नर्मदा के दर्शन से ही जीवन सार्थक
Updated Tue, 26 Dec 2017 01:02 AM IST
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खेकड़ा (बागपत)।
बाल साध्वी राधा देवी ने कहा मां नर्मदा भगवान शंकर के दोहे से उस समय प्रकट हुई जब वह हिमालय में घोर तपस्या में लीन थे। मां नर्मदा की भक्ति करने मात्र से ही दुखों से मुक्ति मिल जाती है। क्षेत्र के ग्राम डूंडाहैडा स्थित श्री बालाजी धाम में सोमवार को नर्मदा महापुराण कथा का महामंडलेश्वर भैया दास महाराज के सानिध्य में आयोजन किया । बाल साध्वी राधा देवी ने कहा जिस समय भगवान शिव हिमालय पर घोर तपस्या में लीन थे। तभी उनके शरीर से पसीना बहकर उनकी जटा से पानी के रूप मे मां नर्मदा बह उठी। तभी से उसका नाम मां नर्मदा पड़ गया। तपस्या में लीन शंकर जी से मां नर्मदा ने वरदान प्राप्त किया कि कहाक मै नदी के रूप में सदैव अमृत को प्राप्त करते बहती रहूंगी और सदैव जो भी मां नर्मदा के दर्शन सच्चे मन से करेगा उसी का जीवन सार्थक होगा।
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बाल साध्वी राधा देवी ने कहा मां नर्मदा भगवान शंकर के दोहे से उस समय प्रकट हुई जब वह हिमालय में घोर तपस्या में लीन थे। मां नर्मदा की भक्ति करने मात्र से ही दुखों से मुक्ति मिल जाती है। क्षेत्र के ग्राम डूंडाहैडा स्थित श्री बालाजी धाम में सोमवार को नर्मदा महापुराण कथा का महामंडलेश्वर भैया दास महाराज के सानिध्य में आयोजन किया । बाल साध्वी राधा देवी ने कहा जिस समय भगवान शिव हिमालय पर घोर तपस्या में लीन थे। तभी उनके शरीर से पसीना बहकर उनकी जटा से पानी के रूप मे मां नर्मदा बह उठी। तभी से उसका नाम मां नर्मदा पड़ गया। तपस्या में लीन शंकर जी से मां नर्मदा ने वरदान प्राप्त किया कि कहाक मै नदी के रूप में सदैव अमृत को प्राप्त करते बहती रहूंगी और सदैव जो भी मां नर्मदा के दर्शन सच्चे मन से करेगा उसी का जीवन सार्थक होगा।