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वन महकमे को पता तक नहीं, फिर कहां से आ रहे विदेशी सैलानी!
Updated Sun, 18 Nov 2018 12:20 AM IST
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पीलीभीत। भले ही टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए दो दिन पहले खोला गया हो, लेकिन यहां के अति-संवेदनशील इलाके में राजस्थान, मध्यप्रदेश से आए कुछ लोग तंबू लगाकर चार दिन पहले ही बस गए। विदेशी सैलानियों के आने की बात कहते हुए जंगल सीमा से सटे बाग के निकट एक एकड़ में कई तंबू लगाकर उसमें रहने-खाने की व्यवस्था भी बना दी गई। खास बात रही कि सुरक्षा बंदोबस्त सख्त होने का दावा करने वाले वन विभाग के अधिकारी अंजान रह गए। अब सोशल साइट्स के जरिए विदेशी सैलानियों का शोर हुआ तो अफसरों की भी धड़कन बढ़ गई। कुछ ही देर में टीम भेजकर जांच कराई और कई दिन से ठहरे लोगों की आईडी भी जब्त कर ली गई हैं। अब सवाल यह है कि आखिर ये विदेशी सैलानी कहां से आ रहे हैं, जिनके लिए वीआईपी बंदोबस्त गुपचुप तरीके से जंगल से सटे इलाके में कर दिया गया? सैलानियों से जुड़ी कोई जानकारी विभागीय स्तर पर नहीं, फिर वह पर्यटक कैसे कहे जा सकते हैं? जबकि अगर कोई सैलानी आ रहा होता, तो पहले से बुकिं ग जरूर कराई गई होती। इन तमाम सवालों के जवाब तलाशने के लिए टाइगर रिजर्व-सामाजिक वानिकी के अधिकारी पड़ताल में जुट गए हैं। यह बात दीगर रही कि आने वाले सैलानी तो दूर, अभी तक बंदोबस्त बनाने में जुटे लोगों के बारे में भी कुुछ भी जुटाया नहीं जा सका है।
टाइगर रिजर्व का हल्दीडेंगा क्षेत्र बाघों की मौजूदगी को देखते हुए अति-संवेदशील श्रेणी में रहता है। बराही रेंज के अंतर्गत आने वाले इस इलाके से ही मानव-वन्यजीव संघर्ष की शुरूआत हुई थी। अधिकारी भी इस इलाके पर पैनी निगाह रखते हुए गश्त में सतर्कता बरतने के निर्देश मातहतों को देते रहते हैं। इसके बावजूद राजस्थान, मध्य प्रदेश से सात से अधिक लोग 12 नवंबर से यहां पर डेरा जमाए हुए हैं। इन लोगों का कहना है कि कुछ विदेशी सैलानी जंगल घूमने आने वाले हैं। उन्हीं के लिए ये बंदोबस्त किया गया है, लेकिन अभी तक वन विभाग के पास इसकी कोई जानकारी तक नहीं है। न तो ऐसी कोई बुकिंग की गई न ही कोई सूचना आई है। जिससे विदेशी सैलानियों के पहुंचनेे की बात स्पष्ट हो सके।
शनिवार सुबह जब सामाजिक वानिकी के वन दरोगा अजमेर सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी करनी शुरू की। वन दारोगा को बताया कि उनकी संस्था के डायरेक्टर राहुल शर्मा जो कि वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर हैं। यह इंतजाम लंदन से आ रहे दो सैलानियों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने इस मामले में जिले के कई अधिकारियों से संपर्क भी कर लिया है। इस पर वन दरोगा बिना परमीशन होने पर तंबू जब्त करने की चेतावनी देकर लौट आए।
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इन लोगों ने डाला डेरा
हल्दीडेंगा क्षेत्र में जंगल सीमा से सटे क्षेत्र में चार दिन पूर्व से डेरा जमाए लोगों में व्यवस्थापक अजमेर (राजस्थान) के सेमसन अनिल के अलावा पन्ना (मध्यप्रदेश) के दया राम, रविशंकर, लालता प्रसाद, कमलेश व मंगल सिंह के रूप में मौजूद है।
कुछ इस तरह किए गए इंतजाम
राजस्थान व मध्य प्रदेश से आए बाहरी लोगों ने चार दिन पूर्व से यहां रुक कर वाटर प्रूफ टेंट लगाकर बेड रूम, डायनिंग रूम, किचन, बॉथरूम समेत रूप रेखा तैयार कर ली है। कैंप किए लोगों के पास मंहगे कैमरे भी मौजूद हैं।
डिप्टी डायरेक्टर बोले, कराऊंगा पूरी जानकारी
ऐसी कोई जानकारी मुझे व विभाग को नहीं है। यदि कोई घूमने के लिए जंगल क्षेत्र में आ रहा है, तो इसकी जानकारी विभाग को जरूर दी जानी चाहिए। बाहरी आदमी को ऐसे रोकने की परमीशन देने के लिए लोकल के लोगों को भी ध्यान देना चाहिए। बराही रेंज के स्टाफ को भेजकर पूरे मामले की जानकारी कराई जा रही है।
आदर्श कुमार, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व
विदेशी सैलानियों को लेकर मुझे कोई जानकारी नहीं है। अभी तक कोई भी परमीशन लेने के लिए भी मेरे पास नहीं आया है। अगर बाहर से कोई आ रहा होता, तो परमीशन लेने व जानकारी के लिए संपर्क जरूर किया जाता।
संजीव कुमार, निदेशक, सामाजिक वानिकी
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टाइगर रिजर्व का हल्दीडेंगा क्षेत्र बाघों की मौजूदगी को देखते हुए अति-संवेदशील श्रेणी में रहता है। बराही रेंज के अंतर्गत आने वाले इस इलाके से ही मानव-वन्यजीव संघर्ष की शुरूआत हुई थी। अधिकारी भी इस इलाके पर पैनी निगाह रखते हुए गश्त में सतर्कता बरतने के निर्देश मातहतों को देते रहते हैं। इसके बावजूद राजस्थान, मध्य प्रदेश से सात से अधिक लोग 12 नवंबर से यहां पर डेरा जमाए हुए हैं। इन लोगों का कहना है कि कुछ विदेशी सैलानी जंगल घूमने आने वाले हैं। उन्हीं के लिए ये बंदोबस्त किया गया है, लेकिन अभी तक वन विभाग के पास इसकी कोई जानकारी तक नहीं है। न तो ऐसी कोई बुकिंग की गई न ही कोई सूचना आई है। जिससे विदेशी सैलानियों के पहुंचनेे की बात स्पष्ट हो सके।
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शनिवार सुबह जब सामाजिक वानिकी के वन दरोगा अजमेर सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी करनी शुरू की। वन दारोगा को बताया कि उनकी संस्था के डायरेक्टर राहुल शर्मा जो कि वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर हैं। यह इंतजाम लंदन से आ रहे दो सैलानियों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने इस मामले में जिले के कई अधिकारियों से संपर्क भी कर लिया है। इस पर वन दरोगा बिना परमीशन होने पर तंबू जब्त करने की चेतावनी देकर लौट आए।
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इन लोगों ने डाला डेरा
हल्दीडेंगा क्षेत्र में जंगल सीमा से सटे क्षेत्र में चार दिन पूर्व से डेरा जमाए लोगों में व्यवस्थापक अजमेर (राजस्थान) के सेमसन अनिल के अलावा पन्ना (मध्यप्रदेश) के दया राम, रविशंकर, लालता प्रसाद, कमलेश व मंगल सिंह के रूप में मौजूद है।
कुछ इस तरह किए गए इंतजाम
राजस्थान व मध्य प्रदेश से आए बाहरी लोगों ने चार दिन पूर्व से यहां रुक कर वाटर प्रूफ टेंट लगाकर बेड रूम, डायनिंग रूम, किचन, बॉथरूम समेत रूप रेखा तैयार कर ली है। कैंप किए लोगों के पास मंहगे कैमरे भी मौजूद हैं।
डिप्टी डायरेक्टर बोले, कराऊंगा पूरी जानकारी
ऐसी कोई जानकारी मुझे व विभाग को नहीं है। यदि कोई घूमने के लिए जंगल क्षेत्र में आ रहा है, तो इसकी जानकारी विभाग को जरूर दी जानी चाहिए। बाहरी आदमी को ऐसे रोकने की परमीशन देने के लिए लोकल के लोगों को भी ध्यान देना चाहिए। बराही रेंज के स्टाफ को भेजकर पूरे मामले की जानकारी कराई जा रही है।
आदर्श कुमार, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व
विदेशी सैलानियों को लेकर मुझे कोई जानकारी नहीं है। अभी तक कोई भी परमीशन लेने के लिए भी मेरे पास नहीं आया है। अगर बाहर से कोई आ रहा होता, तो परमीशन लेने व जानकारी के लिए संपर्क जरूर किया जाता।
संजीव कुमार, निदेशक, सामाजिक वानिकी