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बाघ की दहशत: किसान खुद कर रहे सुरक्षा का इंतजाम
Updated Thu, 06 Jul 2017 07:11 PM IST
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पीलीभीत। टाइगर रिजर्व क्षेत्र से सटे क्षेत्रों में बाघों के बढ़ते हमले और फसलों को वन्यजीवों से बचाने के लिए किसानों का भरोसा सरकारी सिस्टम से उठ गया है। किसान अपने खर्चे पर खेतों पर सोलर तार फेसिंग करा रहे हैं। इसके साथ ही खेतों में मचान बनाकर फसलों की रखवाली कर रहे हैं।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व से सटे लगभग 100 गांवों में बाघ एवं वन्यजीवों के हमले से लोग दहशत में हैं। पिछले कुछ दिनों में वनकटी क्षेत्र में बाघ के हमले में कई लोगों की जान जा चुकी है। आंकड़ों की बात करें तो पिछले नौ माह में बाघ 15 लोगों का शिकार कर चुका है। इनमें ज्यादातर हमले के जंगल के बाहर हुए हैं। हर हमले के बाद सरकारी महकमा जंगल किनारे सोलर तार फेसिंग कराने का आश्वासन देता है, लेकिन आंख मूंदे बैठा शासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। इस पर किसानों ने अपनी खेती और स्वयं को बचाने के लिए अपने स्तर से प्रयास शुरू किए हैं। जंगल से सटे क्षेत्रों में संपन्न किसान विशेषकर सिख फार्मर खेतों के चारों ओर सोलर तार फेसिंग करा रहे हैं। पिछले छह माह में इसका प्रचलन क्षेत्र में काफी बढ़ा है। माधोटांडा क्षेत्र में हल्दीडेंगा, मथना, बराही, मुस्तफाबाद, गजरौला सहित कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सोलर तार फेसिंग की जा रही है। हल्दीडेंगा स्थित आठ एकड़ खेत में सोलर फेसिंग कराने वाले अनिल सिंह ने बताया कि चारों ओर 870 मीटर लंबाई तार लगवाने में लगभग 80 हजार रुपये खर्च आया है।
मचानों पर रहने को विवश हैं लोग
जिले के सभी किसानों द्वारा तार फेसिंग कराना संभव नहीं है। ऐसे में छोटे और मझले किसानों को अपनी जान जोखिम में डालकर फसल की सुरक्षा करना पड़ता है। वन्य जीवों से फसल व खुद को बाघ से बचाने के लिए खेतों में ही मचान बनाकर रहते हैं। ऐसा करने पर रात को मचान से उतरना काफी खतरनाक हो सकता है। आंधी बारिश और ठंड के दिनों में भी दिक्कत होती है।
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काम शुरू करने से पहले बजाते हैं पटाखे
बाघ की दहशत के चलते खेतीबाड़ी को मजदूर मुश्किल से मिल रहे हैं। यदि मिलते भी हैं तो खेतों पर काम शुरू करने से पहले पटाखे या पीपा आदि बजाकर शोर मचाते हैं। ताकि यदि कोई वन्यजीव हो तो खेत से बाहर निकल जाए।
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टाइगर रिजर्व में जंगल की सीमा पर सोलर तार फेसिंग के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। शासन से बजट स्वीकृत होते ही सोलर फेसिंग कराई जाएगी। फिलहाल विधायक निधि से वनकटी क्षेत्र में जल्द तार फेसिंग कराने की तैयारी है। - कैलाश प्रकाश, डीएफओ टाइगर रिजर्व
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व से सटे लगभग 100 गांवों में बाघ एवं वन्यजीवों के हमले से लोग दहशत में हैं। पिछले कुछ दिनों में वनकटी क्षेत्र में बाघ के हमले में कई लोगों की जान जा चुकी है। आंकड़ों की बात करें तो पिछले नौ माह में बाघ 15 लोगों का शिकार कर चुका है। इनमें ज्यादातर हमले के जंगल के बाहर हुए हैं। हर हमले के बाद सरकारी महकमा जंगल किनारे सोलर तार फेसिंग कराने का आश्वासन देता है, लेकिन आंख मूंदे बैठा शासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। इस पर किसानों ने अपनी खेती और स्वयं को बचाने के लिए अपने स्तर से प्रयास शुरू किए हैं। जंगल से सटे क्षेत्रों में संपन्न किसान विशेषकर सिख फार्मर खेतों के चारों ओर सोलर तार फेसिंग करा रहे हैं। पिछले छह माह में इसका प्रचलन क्षेत्र में काफी बढ़ा है। माधोटांडा क्षेत्र में हल्दीडेंगा, मथना, बराही, मुस्तफाबाद, गजरौला सहित कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सोलर तार फेसिंग की जा रही है। हल्दीडेंगा स्थित आठ एकड़ खेत में सोलर फेसिंग कराने वाले अनिल सिंह ने बताया कि चारों ओर 870 मीटर लंबाई तार लगवाने में लगभग 80 हजार रुपये खर्च आया है।
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मचानों पर रहने को विवश हैं लोग
जिले के सभी किसानों द्वारा तार फेसिंग कराना संभव नहीं है। ऐसे में छोटे और मझले किसानों को अपनी जान जोखिम में डालकर फसल की सुरक्षा करना पड़ता है। वन्य जीवों से फसल व खुद को बाघ से बचाने के लिए खेतों में ही मचान बनाकर रहते हैं। ऐसा करने पर रात को मचान से उतरना काफी खतरनाक हो सकता है। आंधी बारिश और ठंड के दिनों में भी दिक्कत होती है।
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काम शुरू करने से पहले बजाते हैं पटाखे
बाघ की दहशत के चलते खेतीबाड़ी को मजदूर मुश्किल से मिल रहे हैं। यदि मिलते भी हैं तो खेतों पर काम शुरू करने से पहले पटाखे या पीपा आदि बजाकर शोर मचाते हैं। ताकि यदि कोई वन्यजीव हो तो खेत से बाहर निकल जाए।
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टाइगर रिजर्व में जंगल की सीमा पर सोलर तार फेसिंग के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। शासन से बजट स्वीकृत होते ही सोलर फेसिंग कराई जाएगी। फिलहाल विधायक निधि से वनकटी क्षेत्र में जल्द तार फेसिंग कराने की तैयारी है। - कैलाश प्रकाश, डीएफओ टाइगर रिजर्व