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गोपाष्टमी पर गोमाता की पूजा अर्चना कर खिलाया हरा चारा
Updated Sat, 17 Nov 2018 01:40 AM IST
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खेकड़ा (बागपत)।
खेकड़ा नगर में अखिल भारतवर्षीय धर्म संघ के तत्वावधान में 112 वां गोपाष्टमी मनाई गई। इस दौरान भक्तों ने शुक्रवार की सुबह दस बजे गोशाला में गोमाता की पूजा हरी सब्जी, चूरी, गुड़, आटे की पकौड़ी का भोग लगाया। साथ ही गोमाता के समक्ष दीप जलाकर उन्हें तिलक लगा फूल माला पहनाई। पंडित यज्ञेश शास्त्री ने कहा कि गोमाता में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास होता है, ऐसा वेद पुराणों में उल्लेख हैं, नित्य प्रति इसका स्पर्श करने से अनेकों रोगों का निदान होता है, साथ ही वैभव प्रदान होता है, द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने आज के दिन गाय चराने का शुभारंभ किया, उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ गो माता की पूजा कर गायों को लेकर चराने गए। उन्होंने कहा कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी को गोपाष्टमी के नाम से पुकारा जाता है। जो श्रद्धालु सच्चे मन से गो माता की आराधना करते हैं, उनकी सभी प्रकार की मनोकामना पूर्ण होती हैं। कार्यक्रम के उपरांत प्रसाद का वितरण किया। भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ उठाया। इसमें प्रवेश शर्मा, सुशील शर्मा, पंडित उमा शंकर वैद्य, डा मनोज धामा, वेदपाल धामा, श्रद्धानंद पांचाल आदि रहे।
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खेकड़ा नगर में अखिल भारतवर्षीय धर्म संघ के तत्वावधान में 112 वां गोपाष्टमी मनाई गई। इस दौरान भक्तों ने शुक्रवार की सुबह दस बजे गोशाला में गोमाता की पूजा हरी सब्जी, चूरी, गुड़, आटे की पकौड़ी का भोग लगाया। साथ ही गोमाता के समक्ष दीप जलाकर उन्हें तिलक लगा फूल माला पहनाई। पंडित यज्ञेश शास्त्री ने कहा कि गोमाता में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास होता है, ऐसा वेद पुराणों में उल्लेख हैं, नित्य प्रति इसका स्पर्श करने से अनेकों रोगों का निदान होता है, साथ ही वैभव प्रदान होता है, द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने आज के दिन गाय चराने का शुभारंभ किया, उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ गो माता की पूजा कर गायों को लेकर चराने गए। उन्होंने कहा कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी को गोपाष्टमी के नाम से पुकारा जाता है। जो श्रद्धालु सच्चे मन से गो माता की आराधना करते हैं, उनकी सभी प्रकार की मनोकामना पूर्ण होती हैं। कार्यक्रम के उपरांत प्रसाद का वितरण किया। भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ उठाया। इसमें प्रवेश शर्मा, सुशील शर्मा, पंडित उमा शंकर वैद्य, डा मनोज धामा, वेदपाल धामा, श्रद्धानंद पांचाल आदि रहे।