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कार्रवाई पर भी हिम्मत नहीं हारे लेखपाल, धरना जारी
Updated Fri, 13 Jul 2018 11:20 PM IST
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14 पीबीटीपी 05
कार्रवाई के बाद भी हिम्मत नहीं हारे लेखपाल, धरना जारी
क्रासर....
अगली कार्रवाई के लिए प्रशासन को शासन के इशारे का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। 22 पदाधिकारियों के निलंबन के बाद भी लेखपालों में टूट नहीं हैं। कार्रवाई से उनमें आक्रोश के साथ जोश भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को लेखपालों में नेहरू पार्क में धरना दिया और मांगें पूरी हुए किसी भी हालत में आंदोलन खत्म न करने की चेतावनी दी है। कुछ कर्मचारी संगठनों ने भी उन्हें अपना समर्थन दिया है।
वेतन वृद्धि, कंप्यूटर, पदनाम, बैठने के लिए कार्यालय सहित छह मांगों को लेकर उप्र लेखपाल संघ के तत्वावधान में जिले भर के लेखपाल आंदोलन कर रहे हैं। 26 जुलाई से चल रही कलमबंद हड़ताल में बृहस्पतिवार को जिला प्रशासन ने शासन के निर्देश पर 22 लेखपालों को निलंबित कर 154 को नोटिस जारी किया है। प्रशासन को यह उम्मीद थी कि इस कार्रवाई से लेखपाल अपना आंदोलन खत्म कर लेंगे लेकिन शुक्रवार को अन्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा संख्या में लेखपाल धरना स्थल पहुंचे। लेखपालों में कार्रवाई से रोष के साथ आक्रोश भी साफ दिख रहा था। नेहरू पार्क में शुरू हुए धरने में लेखपालों ने कहा कि सरकार दमनकारी नीति अपना रहा है लेकिन लेखपाल किसी भी कार्रवाई से भयभीत होने वाले नहीं हैं। जिला संयोजक अशोक गंगवार ने कहा कि जान हथेली पर रखकर मैदाने जंग में उतरने वाले को ही जीत मिलती है जो मैदान में उतरने से पहले ही डर गया वह जीतना तो दूर लड़ भी नहीं सकता। संयुक्त कर्मचारी संयुक्त परिषद के दोनों संगठनों के जिला संयोजक क्रमश: हशमुद्दीन खां व अरविंद सक्सेना ने और राजस्व परिषद के अध्यक्ष रामकुमार वर्मा ने प्रतिनिधिमंडल के साथ धरनास्थल पहुंचकर लेखपालों की मांग को जायजा बताते हुए समर्थन दिया। धरना प्रदर्शन में ज्वाला प्रसाद, दीनदयाल, सचिन कुमार, वैभव गुप्ता, अनुराग मिश्रा, राजेश कुमार, ओमप्रकाश, सोनपाल राना सहित कई लेखपाल थे।
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कार्रवाई के बाद भी हिम्मत नहीं हारे लेखपाल, धरना जारी
क्रासर....
अगली कार्रवाई के लिए प्रशासन को शासन के इशारे का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। 22 पदाधिकारियों के निलंबन के बाद भी लेखपालों में टूट नहीं हैं। कार्रवाई से उनमें आक्रोश के साथ जोश भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को लेखपालों में नेहरू पार्क में धरना दिया और मांगें पूरी हुए किसी भी हालत में आंदोलन खत्म न करने की चेतावनी दी है। कुछ कर्मचारी संगठनों ने भी उन्हें अपना समर्थन दिया है।
वेतन वृद्धि, कंप्यूटर, पदनाम, बैठने के लिए कार्यालय सहित छह मांगों को लेकर उप्र लेखपाल संघ के तत्वावधान में जिले भर के लेखपाल आंदोलन कर रहे हैं। 26 जुलाई से चल रही कलमबंद हड़ताल में बृहस्पतिवार को जिला प्रशासन ने शासन के निर्देश पर 22 लेखपालों को निलंबित कर 154 को नोटिस जारी किया है। प्रशासन को यह उम्मीद थी कि इस कार्रवाई से लेखपाल अपना आंदोलन खत्म कर लेंगे लेकिन शुक्रवार को अन्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा संख्या में लेखपाल धरना स्थल पहुंचे। लेखपालों में कार्रवाई से रोष के साथ आक्रोश भी साफ दिख रहा था। नेहरू पार्क में शुरू हुए धरने में लेखपालों ने कहा कि सरकार दमनकारी नीति अपना रहा है लेकिन लेखपाल किसी भी कार्रवाई से भयभीत होने वाले नहीं हैं। जिला संयोजक अशोक गंगवार ने कहा कि जान हथेली पर रखकर मैदाने जंग में उतरने वाले को ही जीत मिलती है जो मैदान में उतरने से पहले ही डर गया वह जीतना तो दूर लड़ भी नहीं सकता। संयुक्त कर्मचारी संयुक्त परिषद के दोनों संगठनों के जिला संयोजक क्रमश: हशमुद्दीन खां व अरविंद सक्सेना ने और राजस्व परिषद के अध्यक्ष रामकुमार वर्मा ने प्रतिनिधिमंडल के साथ धरनास्थल पहुंचकर लेखपालों की मांग को जायजा बताते हुए समर्थन दिया। धरना प्रदर्शन में ज्वाला प्रसाद, दीनदयाल, सचिन कुमार, वैभव गुप्ता, अनुराग मिश्रा, राजेश कुमार, ओमप्रकाश, सोनपाल राना सहित कई लेखपाल थे।
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