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अब मुस्लिम ग्रुप के पदाधिकारियों ने भरी हुंकार, दी आंदोलन की चेतावनी
Sat, 22 Dec 2018 11:00 PM IST
zaidi saba
अमर उजाला ब्यूरो पूरनपुर।
अमर उजाला ब्यूरो पूरनपुर।
Published by: zaidi saba
Updated Sat, 22 Dec 2018 11:00 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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जुलूस में शामिल लोगों को देशद्रोही बताने पर भी की गई निंदा
बोले- राष्ट्रीय ध्वज नहीं था जूलूस में, राष्ट्रीय ध्वज में अशोक चक्र जरूरी
ग्यारहवीं शरीफ के मौके पर नगर में निकाले गए जुलूस-ए- गौसिया में लहराए गए तिरंगे झंडे में अशोक चक्र के बजाए धार्मिक स्थल का फोटो होने के बाद शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। हिंदू संगठनों ने इसको राष्ट्रीय ध्वज का अपमान बताते हुए विरोध जताया तो एसपी के आदेश पर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई थी। अभी पुलिस आरोपियों की शिनाख्त में जुटी ही थी कि अब मामले में नया मोड़ आया है। हिंदू संगठनों के बाद मुस्लिम संगठनों के पदाधिकारियों ने भी हुंकार भरी है। उलमा और अन्य मुस्लिम संगठन से जुड़े लोगों की हुई बैठक में जुलूस-ए-गौसिया में ध्वज लेकर जुलूस में शामिल लोगों को देशद्रोही बताने की निंदा की गई। वहीं कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
शनिवार को हुई बैठक में टीटीएस, आईम्मा-ए-मसाजिद उल्लेमाएं, जमात रजा-ए-मुस्तफा, सुन्नी उलमा कौंसिल के पदाधिकारियों ने ध्वज पर हो रही राजनीति की निंदा की। कहा कि जो लोग राष्ट्रीय ध्वज का अपमान कह रहे हैं, वह पूरी तरह से गलत हैं। जुलूस में जिस झंडे को राष्ट्रीय ध्वज बताया जा रहा है, वह सिर्फ एक संदेश फहराया गया झंडा था। राष्ट्रीय ध्वज में अशोक चक्र होना आवश्यक हैं। फहराए गए झंडे में अशोक चक्र नहीं था। कुछ राजनीतिक दलों के झंडों में भी इसी रंग का झंडा प्रयोग होता है। अगर, कार्रवाई हो तो उन राजनीतिक दलों पर भी होनी चाहिए। फहराए गए झंडे में गरीब नवाज संस्कार की दरगाह के गुंबद की फोटो बनी हुई थी। इसका गलत अर्थ निकाला गया है। कहा कि अनेकता में एकता वाला भारत देश हर धर्म के लोगों का देश है। तिरंगा हमारे देश की शान ही नहीं बल्कि सवा सौ करोड़ देशवासियों की आन भी है। बैठक में हाफिज नूर अहमद रजा अजहरी, मोहम्मद फिरोज खान, मोहम्मद अशरफ रजा, मीनू बरकाती, हाजी लाडले, नोमान अली वारसी, मौलाना शेर मोहम्मद मिस्वाही समेत कई लोग मौजूद रहे।
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बोले- राष्ट्रीय ध्वज नहीं था जूलूस में, राष्ट्रीय ध्वज में अशोक चक्र जरूरी
ग्यारहवीं शरीफ के मौके पर नगर में निकाले गए जुलूस-ए- गौसिया में लहराए गए तिरंगे झंडे में अशोक चक्र के बजाए धार्मिक स्थल का फोटो होने के बाद शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। हिंदू संगठनों ने इसको राष्ट्रीय ध्वज का अपमान बताते हुए विरोध जताया तो एसपी के आदेश पर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई थी। अभी पुलिस आरोपियों की शिनाख्त में जुटी ही थी कि अब मामले में नया मोड़ आया है। हिंदू संगठनों के बाद मुस्लिम संगठनों के पदाधिकारियों ने भी हुंकार भरी है। उलमा और अन्य मुस्लिम संगठन से जुड़े लोगों की हुई बैठक में जुलूस-ए-गौसिया में ध्वज लेकर जुलूस में शामिल लोगों को देशद्रोही बताने की निंदा की गई। वहीं कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
शनिवार को हुई बैठक में टीटीएस, आईम्मा-ए-मसाजिद उल्लेमाएं, जमात रजा-ए-मुस्तफा, सुन्नी उलमा कौंसिल के पदाधिकारियों ने ध्वज पर हो रही राजनीति की निंदा की। कहा कि जो लोग राष्ट्रीय ध्वज का अपमान कह रहे हैं, वह पूरी तरह से गलत हैं। जुलूस में जिस झंडे को राष्ट्रीय ध्वज बताया जा रहा है, वह सिर्फ एक संदेश फहराया गया झंडा था। राष्ट्रीय ध्वज में अशोक चक्र होना आवश्यक हैं। फहराए गए झंडे में अशोक चक्र नहीं था। कुछ राजनीतिक दलों के झंडों में भी इसी रंग का झंडा प्रयोग होता है। अगर, कार्रवाई हो तो उन राजनीतिक दलों पर भी होनी चाहिए। फहराए गए झंडे में गरीब नवाज संस्कार की दरगाह के गुंबद की फोटो बनी हुई थी। इसका गलत अर्थ निकाला गया है। कहा कि अनेकता में एकता वाला भारत देश हर धर्म के लोगों का देश है। तिरंगा हमारे देश की शान ही नहीं बल्कि सवा सौ करोड़ देशवासियों की आन भी है। बैठक में हाफिज नूर अहमद रजा अजहरी, मोहम्मद फिरोज खान, मोहम्मद अशरफ रजा, मीनू बरकाती, हाजी लाडले, नोमान अली वारसी, मौलाना शेर मोहम्मद मिस्वाही समेत कई लोग मौजूद रहे।
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