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हाई कोर्ट से भी नहीं मिली राहत, चार वनरक्षक बर्खास्त
Updated Fri, 28 Sep 2018 10:44 PM IST
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हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत, चार वनरक्षक बर्खास्त
प्रथमा मध्यमा के प्रमाणपत्र पर तैनाती को लेकर कोर्ट में चल रहा था मामला
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। टाइगर रिजर्व में तैनात चार वनरक्षकों को शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल के समकक्ष न मानते हुए हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रभागीय वनाधिकारी ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी है। वनरक्षकों ने इस मामले में दोबारा फील्ड डायरेक्टर के यहां प्रत्यावेदन दाखिल किया है।
टाइगर रिजर्व में लंबे समय से दैनिक श्रमिक के रूप में तैनात हुए सियाराम, बाबूराम, आनंद सिंह व गजेंद्र सिंह को सात जून 2002 को वनरक्षक के पद पर प्रोन्नत कर दिया गया था। वनरक्षकों ने अपनी शैक्षिक योग्यता के इलाहाबाद प्रयाग की प्रथमा मध्यमा के प्रमाणपत्र लगाए थे। तब इसे हाईस्कूल के समकक्ष बताकर जमा कर दिया गया था। वनरक्षक इस पद पर करीब दो साल कार्य करते रहे। नौ दिसंबर 2004 को प्रभागीय वनाधिकारी ने इन वनरक्षकों की शैक्षिक योग्यता को हाईस्कूल के समकक्ष न मानते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। इसके बाद इन कर्मियों ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में एक रिट याचिका दायर की थी। 24 दिसंबर 2004 को कोर्ट के अंतरिम आदेश तक तैनाती देने के आदेश दे दिए गए। इस पर प्रभागीय वन अधिकारी ने इन चारों को वनरक्षक के पद पर दोबारा तैनाती दे दी थी। वह लंबे समय से पद पर कार्यरत होकर जिम्मेदारी निभा रहे थे। इधर हाईकोर्ट ने 21 सितंबर 2018 को मामले की सुनवाई करते हुए इस याचिका को यह कहकर निरस्त कर दिया कि यह लोग संबंधित पद के लिए शैक्षिक योग्यता नहीं रखते। आदेश प्राप्त होने के बाद डिप्टी डायरेक्टर आदर्श कुमार ने चारों वनरक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दीं। हालांकि वनरक्षक सियाराम समेत अन्य ने फील्ड डायरेक्टर के यहां अपना प्रत्यावेदन देकर यह कहा है कि जब उनको वनरक्षक के रूप में तैनाती दी गई थी, उस समय उनके शैक्षिक प्रमाणपत्र सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक तृतीय मंडल बरेली के यहां से सत्यापित किए गए थे। उन्होंने कोई धोखाधड़ी नहीं की है, इसलिए उनके प्रत्यावेदन पर विचार करके उन्हें सेवा में ले लिया जाए।
वर्जन
योग्यता को पद के समकक्ष न मानते हुए चारों वनरक्षकों को हाईकोर्ट से बर्खास्त करने का आदेश मिला है। इसके अनुपालन में चारों को बर्खास्त कर दिया गया है।- आदर्श कुमार, डिप्टी डायरेक्टर
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प्रथमा मध्यमा के प्रमाणपत्र पर तैनाती को लेकर कोर्ट में चल रहा था मामला
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। टाइगर रिजर्व में तैनात चार वनरक्षकों को शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल के समकक्ष न मानते हुए हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रभागीय वनाधिकारी ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी है। वनरक्षकों ने इस मामले में दोबारा फील्ड डायरेक्टर के यहां प्रत्यावेदन दाखिल किया है।
टाइगर रिजर्व में लंबे समय से दैनिक श्रमिक के रूप में तैनात हुए सियाराम, बाबूराम, आनंद सिंह व गजेंद्र सिंह को सात जून 2002 को वनरक्षक के पद पर प्रोन्नत कर दिया गया था। वनरक्षकों ने अपनी शैक्षिक योग्यता के इलाहाबाद प्रयाग की प्रथमा मध्यमा के प्रमाणपत्र लगाए थे। तब इसे हाईस्कूल के समकक्ष बताकर जमा कर दिया गया था। वनरक्षक इस पद पर करीब दो साल कार्य करते रहे। नौ दिसंबर 2004 को प्रभागीय वनाधिकारी ने इन वनरक्षकों की शैक्षिक योग्यता को हाईस्कूल के समकक्ष न मानते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। इसके बाद इन कर्मियों ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में एक रिट याचिका दायर की थी। 24 दिसंबर 2004 को कोर्ट के अंतरिम आदेश तक तैनाती देने के आदेश दे दिए गए। इस पर प्रभागीय वन अधिकारी ने इन चारों को वनरक्षक के पद पर दोबारा तैनाती दे दी थी। वह लंबे समय से पद पर कार्यरत होकर जिम्मेदारी निभा रहे थे। इधर हाईकोर्ट ने 21 सितंबर 2018 को मामले की सुनवाई करते हुए इस याचिका को यह कहकर निरस्त कर दिया कि यह लोग संबंधित पद के लिए शैक्षिक योग्यता नहीं रखते। आदेश प्राप्त होने के बाद डिप्टी डायरेक्टर आदर्श कुमार ने चारों वनरक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दीं। हालांकि वनरक्षक सियाराम समेत अन्य ने फील्ड डायरेक्टर के यहां अपना प्रत्यावेदन देकर यह कहा है कि जब उनको वनरक्षक के रूप में तैनाती दी गई थी, उस समय उनके शैक्षिक प्रमाणपत्र सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक तृतीय मंडल बरेली के यहां से सत्यापित किए गए थे। उन्होंने कोई धोखाधड़ी नहीं की है, इसलिए उनके प्रत्यावेदन पर विचार करके उन्हें सेवा में ले लिया जाए।
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योग्यता को पद के समकक्ष न मानते हुए चारों वनरक्षकों को हाईकोर्ट से बर्खास्त करने का आदेश मिला है। इसके अनुपालन में चारों को बर्खास्त कर दिया गया है।- आदर्श कुमार, डिप्टी डायरेक्टर
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