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रजिस्टर में 30 मौके पर मिलीं कुल सात संवासिनी
Updated Thu, 09 Aug 2018 12:55 AM IST
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रजिस्टर में 30 मौके पर मिलीं सिर्फ सात संवासिनी
- जांच में कर्मचारियों द्वारा पैसे के लालच में संख्या बढ़ाने का पाया मामला
- देवरिया कांड के बाद पीलीभीत में पाई गड़बड़ी
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। देवरिया कांड के बाद शासन के निर्देश पर शहर के स्वधार गृह में एक दिन पूर्व हुई छापेमारी के दौरान 30 संवासिनियों के जगह मात्र मात्र सात संवासिनी ही पाई गईं। जिसको लेकर जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। हालांकि डीएम ने संवासिनियों के ऊपर खर्च की जा रही धनराशि को लेकर वित्तीय अनियमितता पाए जाने के मामले का खुलासा किया। उन्होंने संचालिका नीलम वर्मा से स्पष्टीकरण तलब किया है।
डीएम के निर्देेश पर सिटी मजिस्ट्रेट अर्चना द्विवेदी ने मंगलवार सुबह करीब साढ़े दस बजे जिला अस्पताल के पीछे बने स्वधार गृह में छापेमारी की। उन्होंने बेहद गोपनीय ढंग से पूरे स्वधार गृह की जांच की। अभिलेखों का भी गहनता से निरीक्षण किया। मौजूद संवासिनियों के बयान भी लिए थे। इस दौरान उन्होंने मीडिया से भी खासी दूरी बनाकर रखी थी। उन्होंने मीडियाकर्मियों को मात्र स्वधार गृह की जांचकर रिपोर्ट प्रशासन को ही भेजने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया था। इधर, बुधवार को उक्त रिपोर्ट उन्होंने डीएम को सौंपी। डीएम ने शाम को इस रिपोर्ट का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जांच में पाया गया कि स्वधार गृह के अभिलेखों में 30 संवासिनी होना अंकित पाया गया, जबकि मौके पर सिर्फ सात संवासिनी ही पाई गई। जांच में पाया कि एनजीओ द्वारा 30 संवासिनी के होने पर ही प्रत्येक संवासिनी पर 50 रुपये प्रतिदिन खर्च करने को दिए जाते हैं। इसी लालच के चलते संवासिनियों का संख्या ज्यादा दिखाई गई। इस मामले में अब एनजीओ की संचालिका को तलब किया गया है। स्वधार गृह में हुई जांच के दौरान अन्य कोई बड़ी अनियमितता नहीं पाई गई है। एनजीओ के कर्मचारियों ने अधिक पैसों की चाह में संवासिनियों की संख्या अधिक दर्शा दी। जिसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। स्वधार गृह में मात्र सात संवासिनी मौजूद हैं।
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- जांच में कर्मचारियों द्वारा पैसे के लालच में संख्या बढ़ाने का पाया मामला
- देवरिया कांड के बाद पीलीभीत में पाई गड़बड़ी
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। देवरिया कांड के बाद शासन के निर्देश पर शहर के स्वधार गृह में एक दिन पूर्व हुई छापेमारी के दौरान 30 संवासिनियों के जगह मात्र मात्र सात संवासिनी ही पाई गईं। जिसको लेकर जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। हालांकि डीएम ने संवासिनियों के ऊपर खर्च की जा रही धनराशि को लेकर वित्तीय अनियमितता पाए जाने के मामले का खुलासा किया। उन्होंने संचालिका नीलम वर्मा से स्पष्टीकरण तलब किया है।
डीएम के निर्देेश पर सिटी मजिस्ट्रेट अर्चना द्विवेदी ने मंगलवार सुबह करीब साढ़े दस बजे जिला अस्पताल के पीछे बने स्वधार गृह में छापेमारी की। उन्होंने बेहद गोपनीय ढंग से पूरे स्वधार गृह की जांच की। अभिलेखों का भी गहनता से निरीक्षण किया। मौजूद संवासिनियों के बयान भी लिए थे। इस दौरान उन्होंने मीडिया से भी खासी दूरी बनाकर रखी थी। उन्होंने मीडियाकर्मियों को मात्र स्वधार गृह की जांचकर रिपोर्ट प्रशासन को ही भेजने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया था। इधर, बुधवार को उक्त रिपोर्ट उन्होंने डीएम को सौंपी। डीएम ने शाम को इस रिपोर्ट का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जांच में पाया गया कि स्वधार गृह के अभिलेखों में 30 संवासिनी होना अंकित पाया गया, जबकि मौके पर सिर्फ सात संवासिनी ही पाई गई। जांच में पाया कि एनजीओ द्वारा 30 संवासिनी के होने पर ही प्रत्येक संवासिनी पर 50 रुपये प्रतिदिन खर्च करने को दिए जाते हैं। इसी लालच के चलते संवासिनियों का संख्या ज्यादा दिखाई गई। इस मामले में अब एनजीओ की संचालिका को तलब किया गया है। स्वधार गृह में हुई जांच के दौरान अन्य कोई बड़ी अनियमितता नहीं पाई गई है। एनजीओ के कर्मचारियों ने अधिक पैसों की चाह में संवासिनियों की संख्या अधिक दर्शा दी। जिसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। स्वधार गृह में मात्र सात संवासिनी मौजूद हैं।
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