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अभी जिंदा है ईमानदारी, छात्र ने पर्स लौटाया
Updated Sat, 28 Apr 2018 01:36 AM IST
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खेकड़ा (बागपत)।
चंद रुपये के लिए जहां भाई-भाई और दोस्तों के झगड़े हो रहे हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दूसरों के पैसों को अमानत समझकर उन्हें उसके मालिक तक पहुंचाने का पुरजोर प्रयास करते हैं। इन्हीं की बदौलत आज भी ईमानदारी जिंदा है। क्षेत्र के गौना गांव निवासी छात्र रिजवान भी इन्हीं में एक मिसाल है। उसने खेकड़ा में बाजार में पड़ा पर्स उसके बसी निवासी मालिक को लौटा दिया। ईमानदार छात्र की सभी ने प्रशंसा की।
तहसील क्षेत्र के ग्राम गौना निवासी रिजवान पुत्र तासीम बीएससी द्वितीय वर्ष का छात्र है। वह रोजाना खेकड़ा में कोचिंग के लिए आता है। शुक्रवार को खेकड़ा मेन बाजार पुलिस चौकी चौराहे पर उसे एक पर्स पड़ा मिला। पर्स में एक एटीएम कार्ड, गाड़ी की आरसी, ड्राइविंग लाइसेंस और करीब एक हजार रुपये नगद के अलावा अन्य कई जरूरी कागजात थे। इनमें पर्स के मालिक का नाम, पता और मोबाइल नंबर भी मिल गया। छात्र रिजवान ने ईमानदारी का परिचय देकर बैंक ऑफ इंडिया पर ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मी प्रेम त्यागी को इसकी जानकारी दी। प्रेम त्यागी ने तभी पर्स के मालिक ग्राम बसी निवासी ओमवीर सिंह को फोन कर बैंक बुलाया और छात्र की उपस्थिति में पर्स लौटाया। ओमबीर सिंह ने छात्र की आभार जताते हुए प्रशंसा की। ओमबीर सिंह ने कहा यदि उसके कागजात किसी और के हाथ लग जाते तो वह इनका दुरुपयोग भी कर सकता था। इसके अलावा उक्त सभी दस्तावेज दोबारा बनवाने के लिए उसे भी विभागों के कई दिन तक चक्कर काटने पड़ते। जिसने भी सुना, उसने छात्र रिजवान की प्रशंसा की।
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चंद रुपये के लिए जहां भाई-भाई और दोस्तों के झगड़े हो रहे हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दूसरों के पैसों को अमानत समझकर उन्हें उसके मालिक तक पहुंचाने का पुरजोर प्रयास करते हैं। इन्हीं की बदौलत आज भी ईमानदारी जिंदा है। क्षेत्र के गौना गांव निवासी छात्र रिजवान भी इन्हीं में एक मिसाल है। उसने खेकड़ा में बाजार में पड़ा पर्स उसके बसी निवासी मालिक को लौटा दिया। ईमानदार छात्र की सभी ने प्रशंसा की।
तहसील क्षेत्र के ग्राम गौना निवासी रिजवान पुत्र तासीम बीएससी द्वितीय वर्ष का छात्र है। वह रोजाना खेकड़ा में कोचिंग के लिए आता है। शुक्रवार को खेकड़ा मेन बाजार पुलिस चौकी चौराहे पर उसे एक पर्स पड़ा मिला। पर्स में एक एटीएम कार्ड, गाड़ी की आरसी, ड्राइविंग लाइसेंस और करीब एक हजार रुपये नगद के अलावा अन्य कई जरूरी कागजात थे। इनमें पर्स के मालिक का नाम, पता और मोबाइल नंबर भी मिल गया। छात्र रिजवान ने ईमानदारी का परिचय देकर बैंक ऑफ इंडिया पर ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मी प्रेम त्यागी को इसकी जानकारी दी। प्रेम त्यागी ने तभी पर्स के मालिक ग्राम बसी निवासी ओमवीर सिंह को फोन कर बैंक बुलाया और छात्र की उपस्थिति में पर्स लौटाया। ओमबीर सिंह ने छात्र की आभार जताते हुए प्रशंसा की। ओमबीर सिंह ने कहा यदि उसके कागजात किसी और के हाथ लग जाते तो वह इनका दुरुपयोग भी कर सकता था। इसके अलावा उक्त सभी दस्तावेज दोबारा बनवाने के लिए उसे भी विभागों के कई दिन तक चक्कर काटने पड़ते। जिसने भी सुना, उसने छात्र रिजवान की प्रशंसा की।
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