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सीता स्वयवर के साथ राम कथा सुनाई
Updated Mon, 29 Oct 2018 01:20 AM IST
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खेकड़ा (बागपत)।
क्षेत्र के ग्राम मुबारिकपुर स्थित सिद्ध बाबा मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के सातवें दिन समापन पर महामंडलेश्वर भैयादास महाराज की धर्म बेटी बाल साध्वी राधा देवी ने सीता स्वयंवर की कथा का प्रसंग सुनते हुए कहा कि सीता जी साक्षात लक्ष्मी जी की अवतार हैं, महाराज जनक की तपस्या से प्रसन्न होकर सीता पृथ्वी से एक घड़े में से राजा जनक को प्राप्त हुई, राजा जनक उन्हें प्राप्त कर बहुत प्रसन्न हुए और अपनी पुत्री की भांति ही उनका लालन पालन किया। एक बार सीताजी घर में शिव धनुष को देखकर बड़ी प्रसन्न हुई और उन्होंने उस धनुष को उस स्थान से दूसरे स्थान पर रख दिया, जब राजा जनक को पता चला कि मेरी बेटी सीता ने शिव धनुष को उठा लिया तो उनकी आंखों से प्रेम अश्रु बहने लगे और वो समझ गए कि मेरी पुत्री साक्षात जगदंबा ही है, और उन्होंने प्रण कर लिया कि जो इस शिव धनुष को उठाएगा, उसी के साथ मैं अपनी पुत्री सीता का विवाह करूँगा । उचित समय जानकर राजा जनक ने सीता स्वयंवर की तैयारी की। इसमें दूर दूर से राजा महाराजा भी आए । विश्वामित्र को भी निमंत्रण भेजा गया। विश्वामित्र राम लखन को लेकर जनकपुरी पहुंचे। वहां जब कोई भी धनुष भंग नहंी कर पाया तो राजा जनक बहुत उदास हो गए, उनकी उदासी को देख कर विश्वामित्र जी ने भगवान राम की और इशारा कर कहा कि हे राम जनक का दुख दूर करो। राम जी ने आज्ञा पाकर शिव धनुष को भंग कर दिया। सभी देव मनुष्य मुनि प्रसन्न हो गए। धूम धाम से सीता माता और भगवान राम का विवाह हुआ। इस दौरान दीपक, पिंटू, मनोज, सुनील, प्रमोद, अनुज, पुनीत, राजू, नरेश, प्रदीप आदि मौजूद रहे।
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क्षेत्र के ग्राम मुबारिकपुर स्थित सिद्ध बाबा मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के सातवें दिन समापन पर महामंडलेश्वर भैयादास महाराज की धर्म बेटी बाल साध्वी राधा देवी ने सीता स्वयंवर की कथा का प्रसंग सुनते हुए कहा कि सीता जी साक्षात लक्ष्मी जी की अवतार हैं, महाराज जनक की तपस्या से प्रसन्न होकर सीता पृथ्वी से एक घड़े में से राजा जनक को प्राप्त हुई, राजा जनक उन्हें प्राप्त कर बहुत प्रसन्न हुए और अपनी पुत्री की भांति ही उनका लालन पालन किया। एक बार सीताजी घर में शिव धनुष को देखकर बड़ी प्रसन्न हुई और उन्होंने उस धनुष को उस स्थान से दूसरे स्थान पर रख दिया, जब राजा जनक को पता चला कि मेरी बेटी सीता ने शिव धनुष को उठा लिया तो उनकी आंखों से प्रेम अश्रु बहने लगे और वो समझ गए कि मेरी पुत्री साक्षात जगदंबा ही है, और उन्होंने प्रण कर लिया कि जो इस शिव धनुष को उठाएगा, उसी के साथ मैं अपनी पुत्री सीता का विवाह करूँगा । उचित समय जानकर राजा जनक ने सीता स्वयंवर की तैयारी की। इसमें दूर दूर से राजा महाराजा भी आए । विश्वामित्र को भी निमंत्रण भेजा गया। विश्वामित्र राम लखन को लेकर जनकपुरी पहुंचे। वहां जब कोई भी धनुष भंग नहंी कर पाया तो राजा जनक बहुत उदास हो गए, उनकी उदासी को देख कर विश्वामित्र जी ने भगवान राम की और इशारा कर कहा कि हे राम जनक का दुख दूर करो। राम जी ने आज्ञा पाकर शिव धनुष को भंग कर दिया। सभी देव मनुष्य मुनि प्रसन्न हो गए। धूम धाम से सीता माता और भगवान राम का विवाह हुआ। इस दौरान दीपक, पिंटू, मनोज, सुनील, प्रमोद, अनुज, पुनीत, राजू, नरेश, प्रदीप आदि मौजूद रहे।