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सरकारी अस्पतालों में नहीं महिला सर्जन, कैसे हों ऑपरेशन

Sat, 18 May 2019 01:46 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 18 May 2019 01:46 AM IST
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सरकारी अस्पतालों में नहीं महिला सर्जन, कैसे हों ऑपरेशन
पीलीभीत। सरकार भले ही जनता की बेहतर सुविधाओं पर करोड़ों रुपया पानी की तरह बहा रही हो, मगर पुख्ता इंतजामों की कमी के चलते रोगियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। बदइंतजामी का आलम यह है कि महिला अस्पताल समेत जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में कोई महिला सर्जन नहीं है। नतीजतन गर्भवती महिलाओं को बड़े ऑपरेशन से प्रसव के लिए निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।
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बेहतर सेहत इंसानी जिंदगी के लिए काफी खास है। इसी लिए सरकार स्वास्थ्य पर मोटी रकम खर्च करती है, लेकिन व्यवस्थाएं मुकम्मल नहीं होने के कारण जनता का सरकारी अस्पतालों की सेवाओं का उतना लाभ नहीं मिलपाता जितना उसे मिलना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में हर वक्त संसाधनों का अभाव बना रहता है। सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को होती है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो जिले में सात सीएचसी, 20 न्यू पीएचसी, दो ब्लॉक लेबल पीएचसी और 199 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं। यहां प्रसव की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण प्रसूताएं सीएचसी और पीएचसी पर न जाकर सीधे जिला महिला अस्पताल पहुंचती हैं।
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देहात क्षेत्र की सीएचसी और पीएचसी पर प्रसव के लिए पहुंचने वाली महिलाएं घंटों प्रसव पीड़ा से छटपटाती रहती हैं। वहां ऑपरेशन की व्यवस्था न होने पर उन्हें जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में बड़ा ऑपरेशन थियेटर है। उसमें कीमती उपकरण भी हैं, लेकिन प्रसव में जटिलता होने पर ऑपरेशन का लाभ नहीं मिल पाता। वजह जिला अस्पताल में महिला सर्जन का न होना है। महिला अस्पताल में सिर्फ दो डीजीओ डॉ. विनीता चतुर्वेदी और सीएमएस डॉ. अनीता चौरसिया है। ये सामान्य प्रसव तो करा सकती हैं, लेकिन ऑपरेशन नहीं। डॉ. अनीता चौरसिया को प्रशासनिक कार्य के बाद इसका जिम्मा उठाना पड़ता है। हर माह औसतन 30 से 40 महिलाओं को बड़े ऑपरेशन के लिए निजी अस्पतालों में भेजा जाता है। अक्सर यह आरोप भी लगते हैं कि निजी अस्पतालों से सेटिंग के चलते अक्सर सामान्य प्रसव की संभावना वाली महिलाओं को भी जटिलता बताकर निजी अस्पतालों में भेज दिया जाता है। वहां मोटी रकम वसूलने के लिए जरूरत न होने पर भी बड़ा ऑपरेशन कर प्रसव कराया जाता है।
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हर माह करीब डेढ़ हजार से अधिक महिलाएं प्रसव के लिए आती हैं। यहां महिला सर्जन के पद लंबे समय से रिक्त हैं। अस्पताल में बेडों की संख्या बढ़कर 70 हो गई है, शासन स्तर पर कई बार प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन कोई सर्जन की अब तक नियुक्ति नहीं हुई। - डॉ. अनीता चौरसिया, सीएमएस महिला अस्पताल
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