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भूमिहीनों को छह बाद न मिला मुआवजा और न रहने को जमीन
Updated Mon, 04 Sep 2017 06:23 PM IST
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भूमिहीनों को न मिला मुआवजा और न मिली जमीन
माधोटांडा। पिछले दो वर्षों में शारदा नदी द्वारा रमनगरा बुझिया में बाढ़ के बाद भूमिहीन हुए 55 किसानों के परिवारों ने जिला प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। आरोप है कि छह माह पूर्व एक राजस्व लेखपाल मुआवजा दिलाने के नाम पर भूमिहीनों से धन उगाही करने के साथ उन सब लोगों की बैंक पासबुक भी ले गया था। शारदा व नेपाल की वमनी नदी ने मिलकर पिछले दो वर्षों में रमनगरा बुझिया इलाके में किसानों की कृषि भूमि का कटान करने के साथ उन्हें बेघर कर दिया था। तबसे यह बाढ़ पीड़ित परिवार शारदा डैम के वर्जित क्षेत्र में मकान व झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। उस दौरान एसडीएम पूरनपुर ने दौरा कर भूमिहीन हुए परिवारों का सर्वे कर मुआवजे के लिए सूची बनाने के निर्देश दिए थे। आरोप है कि बरसात के बाद हल्का लेखपाल ने 55 भूमिहीन परिवारों को पात्र मानते हुए सब से धन उगाही कर उनकी बैंक पासबुक की फोटो प्रति मुआवजे के लिए भेजी थी। आश्वासन दिया गया था कि 55 किसानों का मुआवजा स्वीकृत हो चुका है। शीघ्र मिल जाएगा, लेकिन छह माह बीतने के बाद भी इन पीड़ित परिवारों को न तो मुआवजा मिला और न ही कहीं दूसरी जगह उनको बसाया गया। भूमिहीन मुकुंद विश्वास, दिपांकर विश्वास, ज्ञानेंद्र, सुरेश राह, विमल मिस्त्री, अशोक विश्वास, विष्णु राह, नारद सरकार, चिंत्तो मंडल, रामदरस, विकास सरकार सहित सभी 55 भूमिहीनों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन भेजकर कृषि भूमि का मुआवजा दिलाने की मांग की है। पीड़ित किसानों ने बताया कि वह लोग लेखपाल से मिले थे, तो उसने अपना प्रमोशन होनेे की बात कहकर टरका दिया। उसने सूची दूसरे लेखपाल को दिए जाने की बात कही। ज्ञात रहे शारदा नदी में गत वर्ष आई बाढ़ से रमनगरा बुझिया का अस्तित्व ही मिट गया है। थोड़ी बहुत भूमि बची थी, अब उसका भी शारदा कटान कर रही है।
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माधोटांडा। पिछले दो वर्षों में शारदा नदी द्वारा रमनगरा बुझिया में बाढ़ के बाद भूमिहीन हुए 55 किसानों के परिवारों ने जिला प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। आरोप है कि छह माह पूर्व एक राजस्व लेखपाल मुआवजा दिलाने के नाम पर भूमिहीनों से धन उगाही करने के साथ उन सब लोगों की बैंक पासबुक भी ले गया था। शारदा व नेपाल की वमनी नदी ने मिलकर पिछले दो वर्षों में रमनगरा बुझिया इलाके में किसानों की कृषि भूमि का कटान करने के साथ उन्हें बेघर कर दिया था। तबसे यह बाढ़ पीड़ित परिवार शारदा डैम के वर्जित क्षेत्र में मकान व झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। उस दौरान एसडीएम पूरनपुर ने दौरा कर भूमिहीन हुए परिवारों का सर्वे कर मुआवजे के लिए सूची बनाने के निर्देश दिए थे। आरोप है कि बरसात के बाद हल्का लेखपाल ने 55 भूमिहीन परिवारों को पात्र मानते हुए सब से धन उगाही कर उनकी बैंक पासबुक की फोटो प्रति मुआवजे के लिए भेजी थी। आश्वासन दिया गया था कि 55 किसानों का मुआवजा स्वीकृत हो चुका है। शीघ्र मिल जाएगा, लेकिन छह माह बीतने के बाद भी इन पीड़ित परिवारों को न तो मुआवजा मिला और न ही कहीं दूसरी जगह उनको बसाया गया। भूमिहीन मुकुंद विश्वास, दिपांकर विश्वास, ज्ञानेंद्र, सुरेश राह, विमल मिस्त्री, अशोक विश्वास, विष्णु राह, नारद सरकार, चिंत्तो मंडल, रामदरस, विकास सरकार सहित सभी 55 भूमिहीनों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन भेजकर कृषि भूमि का मुआवजा दिलाने की मांग की है। पीड़ित किसानों ने बताया कि वह लोग लेखपाल से मिले थे, तो उसने अपना प्रमोशन होनेे की बात कहकर टरका दिया। उसने सूची दूसरे लेखपाल को दिए जाने की बात कही। ज्ञात रहे शारदा नदी में गत वर्ष आई बाढ़ से रमनगरा बुझिया का अस्तित्व ही मिट गया है। थोड़ी बहुत भूमि बची थी, अब उसका भी शारदा कटान कर रही है।