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अब पीएचडी के लिए देने होंगे 25000 रुपये

Wed, 03 Jul 2013 12:21 PM IST
लखनऊ/ इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/ इंटरनेट डेस्क Updated Wed, 03 Jul 2013 12:21 PM IST
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phd fees hiked in uttar pradesh

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से पीएचडी उपाधि अध्यादेश की संरचना का संशोधित प्रस्ताव (मॉडल डाफ्ट) जारी कर दिया गया है। लिहाजा उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों से पीएचडी करना अब महंगा हो गया है।

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कोर्स वर्क के लिए देने होंगे 25000
पहली बार कोर्स वर्क के नाम पर 25 हजार रुपये फीस निर्धारित कर दी गई है। इसके मुताबिक पीएचडी करने वालों को परीक्षा शुल्क के एवज में 10 हजार रुपये अलग से जमा करने होंगे। सूबे के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को यह अध्यादेश चालू महीने से ही लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
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पीएचडी उपाधि अध्यादेश के तहत तैयार मॉडल ड्राफ्ट की प्रतियां उच्चा शिक्षा अनुभाग-1 की विशेष सचिव अनिता मिश्रा की ओर से जारी की गई हैं।

7 कुलपतियों ने दिया सुझाव
यह मॉडल ड्राफ्ट लखनऊ विश्वविद्यालय, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी, ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली, डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपतियों के सुझावों पर लागू किया गया है जो प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों पर लागू होगा।
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फॉर्म 500 का रजिस्ट्रेशन फीस 2000!
कोर्स वर्क की फीस के रूप में 25 हजार रुपये जमा करने होंगे। इसके अलावा परीक्षा शुल्क में भी वृद्धि की गई है। पहले जहां परीक्षा शुल्क पांच हजार रुपये था, वहीं अब इसे 10 हजार रुपये कर दिया गया है। 500 रुपये के फॉर्म पर 2 हजार रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क के रूप में जमा करना होगा।


2011-12 से लागू होगा यह अध्यादेश
यूजीसी ने मॉडल ड्राफ्ट के रूप में तैयार इस अध्यादेश को वर्ष 2011-12 से लागू करने का निर्देश दिया है। इस तरह प्रदेश के विश्वविद्यालयों में दो साल पहले से रजिस्टर्ड शोधार्थियों को भी फीस वृद्धि की यह कीमत चुकानी होगी। रजिस्ट्रेशन उसी का होगा जिसने संयुक्त पात्रता परीक्षा पास की होगी। सीधे एंट्री प्रतिबंधित कर दी गई है।

विशेष सचिव ने अपने पत्र में कहा है कि यूजीसी ने यह मॉडल ड्राफ्ट विश्वविद्यालयों से लिए गए सुझावों के आधार पर तैयार किया है।

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