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49 साल से कैद है नेहरू का अस्थिकलश
मथुरा/हिमांशु त्रिपाठी
Updated Mon, 27 May 2013 11:35 AM IST
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देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का अस्थिकलश राजकीय संग्रहालय के गोदाम में कैद है। इस पर उपेक्षा की धूल जम गई है।
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संग्रहालय में नेहरूजी की स्मृतियां सहेजे इस कलश को वीथिका (गैलरी) में सजाने की योजना थी लेकिन यह सपना साकार नहीं हो सका।
देश-प्रदेश में प्राय: सत्ता कांग्रेस के हाथ में रही लेकिन कलश की याद किसी को नहीं आई। आज भी यह कलश संग्रहालय के गोदाम में धूल फांक रहा है।
27 मई 1964 को पंडित जवाहरलाल नेहरू का निधन हुआ था। उसके बाद उनकी अस्थियां पावन नदियों में विसर्जित की गईं।
इसी कड़ी में 12 जून 1964 को उनकी अस्थियां मथुरा लाई गईं थी और विश्राम घाट में उन्हें विसर्जित किया गया। जनसैलाब इस यादगार क्षण का साक्षी बना था।
तब आंखें नम थीं और हृदय भावुक था, लिहाजा नेहरूजी के अस्थिकलश को मथुरा के राजकीय संग्रहालय में लाकर बड़े सम्मान से रखा गया।
इसके दर्शन कर लोगों की आंखें नम हो जाती थीं। उस वक्त कहा गया था कि इस अस्थिकलश को वीथिका में रखा जाएगा ताकि संग्रहालय आने वाले लोग इसके दर्शन कर सकें। लेकिन आज तक ऐसा नहीं हो पाया।
राजकीय संग्रहालय में इस अस्थिकलश की बेकदरी का एहसास इसी से हो जाता है कि अधिकांश कर्मचारियों को ही नहीं मालूम कि यहां के रिजर्व कलेक्शन में पं. नेहरू का अस्थिकलश भी है।
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15 अगस्त 1947 से 27 मई 1964 देश के प्रधानमंत्री रही शख्सियत के अस्थिकलश पर कई दशक की उपेक्षा की मोटी धूल जम चुकी है।
प्रथम प्रधानमंत्री के निधन के बाद की अवधि में उत्तर प्रदेश में सुचेता कृपलानी, सीबी गुप्ता, टीएन सिंह, पं. कमलापति त्रिपाठी, श्रीपति मिश्रा, हेमवतीनंदन बहुगुणा, नारायण दत्त तिवारी सरीखे दिग्गज नेता मुख्यमंत्री रहे लेकिन किसी ने स्मृतियों के कलश को गैलरी में सजाने की सार्थक पहल नहीं की।
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अस्थिकलश संग नेहरूजी की यादें जुड़ी हैं, उपेक्षा का अंधेरा इतना घना है कि अधिकतर ब्रजवासी भी इससे बेखबर हैं कि उनके शहर में नेहरू जी की अनमोल धरोहर है। धूल फांकते कलश को अभी भी इंतजार है कि एक पहल ऐसी हो कि योजना मूर्त रूप ले सके और रिजर्व कलेक्शन से बाहर निकलकर वीथिका में इसे सम्मानजनक जगह हासिल हो सके।
शास्त्रीजी के कलश की भी दुर्दशा
राजकीय संग्रहालय के गोदाम में देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी का भी अस्थिकलश है। उसे भी आज तक वीथिका में स्थान नहीं मिल सका है।
मथुरा के राजकीय संग्रहालय में देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का अस्थिकलश है लेकिन इसे कई दशक रिजर्व कलेक्शन में रखा गया है। वीथिका में रखने संबंधी कोई निर्देश होगा तो उस दिशा में कार्य किया जाएगा।
- डा. एसपी सिंह, सहायक निदेशक, राजकीय संग्रहालय मथुरा