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अब केंद्र सरकार के बंद उपक्रमों में खुलेंगे आयुध कारखाने
संजय त्रिपाठी/कानपुर
Updated Tue, 15 Jan 2013 12:13 PM IST
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वर्षों से ठप पड़ी केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों की इकाइयों में आयुध फैक्ट्रियों और सहयोगी इकाइयों की स्थापना करने की तैयारी की जा रही है। हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के चेयरमैन के दिशा निर्देश में एक सर्वे कराया था, जिसकी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी जा चुकी है। इसमें कानपुर, नैनी, नोएडा समेत कई जिलों की कुल नौ इकाइयां हैं। मंत्रालय की हरी झंडी मिलते ही आगे की कार्यवाही शुरू होगी।
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हिंदुस्तान वेजीटेबल ऑयल्स लि. और हिंदुस्तान केबल्स लि. की कुल नौ इकाइयां कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, नैनी, मुंबई, अमृतसर, बंगलूरू, हैदराबाद और पश्चिम बंगाल में हैं। बोर्ड सूत्रों के मुताबिक इन इकाइयों को आयुध निर्माण के क्षेत्र में इस्तेमाल करने के मकसद से रक्षा मंत्रालय ने आयुध निर्माणी बोर्ड के चेयरमैन एसके बेरी की अध्यक्षता में एक टीम का गठन किया था।
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टीम ने सभी जगहों पर सर्वे किया। इसकी रिपोर्ट हाल ही में मंत्रालय को सौंपी गई है। सर्वे में इन इकाइयों की लोकेशन के आधार पर आयुध कारखानों या फिर सहयोगी निर्माण इकाइयों की स्थापना के बारे में सकारात्मक संभावना जताई गई है।
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ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के चेयरमैन एसके बेरी ने कहा कि आयुध निर्माण के संबंध में संभावनाएं तलाशने के लिए मंत्रालय से सर्वे कार्य सौंपा गया था। सभी नौ यूनिटों का सर्वे संपन्न करके रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी गई है। इसमें सभी इकाइयों के हिसाब से उनमें किस प्रकार का कार्य किया जा सकता है, यह विस्तार से बताया गया है। अब मंत्रालय से जिस प्रकार के निर्देश मिलेंगे, उसी तरह आगे की कार्यवाही की जाएगी।
बोर्ड के एक अधिकारी के मुताबिक सर्वे में यह बात स्पष्ट हुई है कि इकाइयों की भूमि का इस्तेमाल तो किया जा सकता है, मगर आयुध निर्माण के लिए प्लांट-मशीनरी के इस्तेमाल की संभावना नहीं मिली है। उन्होंने यह भी बताया कि इकाइयों से जुड़े अस्पताल, स्कूल, इलेक्ट्रिक सप्लाई, वॉटर सप्लाई सिस्टम आदि आयुध निर्माणियों की स्थापना के लिहाज से बेहतर पाए गए हैं। सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद मंत्रालय इस पर निर्णय की तैयारी कर रहा है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद इन संपत्तियों को एक से दूसरे मंत्रालय में स्थानांतरित किया जाएगा।
कर्मचारियों को भी मिलेंगे मौके
इन नौ इकाइयों से जुड़े हजारों श्रमिकों के लिए भी अच्छी खबर है। यदि सब कुछ ठीक रहा और मंत्रालय सर्वे रिपोर्ट के आधार पर इन इकाइयों को आयुध निर्माणी बोर्ड को दे देता है तो कर्मचारियों को यहां लगने वाले कारखानों में नियुक्ति दी जा सकती है। एक अधिकारी के मुताबिक नियुक्ति के पूर्व संबंधित पूरी पॉलिसी बनाई जाएगी। इसके बाद उसे आयुध कारखानों में कार्य करने का प्रशिक्षण देकर ही रखा जाएगा।