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एक और 'दामिनी' मौत से लड़ रही है जंग
इलाहाबाद/ब्यूरो
Updated Mon, 07 Jan 2013 11:43 AM IST
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दामिनी के साथ गैंगरेप की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है लेकिन दरिंदगी और हैवानियत वैसे ही कायम है। इलाहाबाद में हैवानियत की एक ऐसी घटना सामने आई है कि जिसे जानकर आपकी रूह तक कांप जाएगी।
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एक युवक जब एक छात्रा को अपनी हवस का शिकार नहीं बना पाया तो उसने अपने मां-बाप संग मिलकर उस लड़की को जला दिया। वह अस्पताल में मौत से जूझ रही है। घटना के 26 घंटे बाद महिला संगठन के हल्ला मचाने पर पुलिस अफसर सक्रिय हुए। नामजद केस दर्ज कर पुलिस ने छापे मारे मगर आरोपी नहीं मिले।
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घटना यमुनापार के शंकरगढ़ इलाके की है। पीड़ित लड़की 16 वर्षीय राखी (नाम काल्पनिक) चार बहनों में तीसरे नंबर पर है। वह स्थानीय इंटर कॉलेज में हाईस्कूल में पढ़ती है। मां-बाप सब्जी बेचकर गुजारा करते हैं। एक बहन की शादी हो चुकी है। शनिवार सुबह मां-बाप सब्जी बेचने और दो बहन कुएं से पानी लेने चली गई थीं।
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राखी घर में अकेली थी तभी पड़ोस के 20 वर्षीय ज्ञान पटेल ने आकर उसे दबोच लिया। उसने दुराचार की कोशिश की लेकिन राखी के प्रतिरोध के चलते उसे घर से भागना पड़ा। कुछ ही देर में वह अपने पिता संतोष पटेल और मां गीता के साथ लौटा। पिता-पुत्र ने राखी पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। वह लपटों से घिरी तो वे तीनों भाग निकले।
कुछ दूर स्थित कुएं पर मौजूद बड़ी बहन ने उन तीनों को अपने घर से निकलते और राखी को छत पर आग से घिरा देखा तो शोर मचाते उसकी ओर भागीं। राखी की चीख सुनकर आसपास के लोग आ गए। आग बुझाई गई। 108 नंबर पर फोनकर एंबुलेंस बुलाई गई। राखी को पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र फिर एसआरएन अस्पताल ले जाया गया। वहां 26 घंटे बाद रविवार दोपहर तकरीबन दो बजे महिला संगठन से जुड़ी मंजू पाठक कहीं से खबर पाकर पहुंची तो यह घटना सामने आई।
मंजू ने इस बाबत डीआईजी को बताया तो पुलिस में खलबली मची। शाम को सीओ बारा और एसओ शंकरगढ़ प्रदीप सिंह पहुंचे। फिर एसपी क्राइम अरुण पांडेय ने भी आकर पीड़ित छात्रा के घरवालों का बयान लिया। मजिस्ट्रेट को भी बुलाकर छात्रा का बयान दर्ज कराया गया। एसएसपी मोहित अग्रवाल ने बताया कि युवक और उसके मां-बाप की तलाश हो रही है। आरोपी युवक ज्ञान पटेल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है।
हैवानियत के बाद धमकियां
मनमानी में नाकाम रहने पर युवक और उसके मां-बाप ने छात्रा को जिंदा आग के हवाले कर दिया। फिर अस्पताल ले जाते समय यह धमकी भी दी कि पुलिस से शिकायत करने पर कुछ नहीं होगा। खेत और ट्रैक्टर बेचकर वे उनके खिलाफ मुकदमा लड़ लेगें पर इसका अंजाम बुरा होगा। शायद इसी डर के चलते 24 घंटे तक परिजन चुप्पी साधे रहे।