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अफसरों-नेताओं में लाल बत्तियों की महामारी
अमर उजाला, मुरादाबाद
Updated Thu, 12 Dec 2013 02:16 AM IST
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‘हटो..हटो रास्ता खाली करो, राजा की सवारी आ रही है’...सड़कों पर इन लाल नीली बत्तियां की दौड़ कुछ ऐसी ही हड़बड़ी मचाती है।
ट्रैफिक पुलिस सभी रास्तों को रोककर काफिले को रवाना कर देती है...और पब्लिक बेचारी हटते बचते यही कहकर रह जाती है कि अंग्रेज तो चले गए लेकिन गुलामी का एहसास कराने वाली ‘अदाएं’ अफसरों और नेताओं के दिलों में उतार गए।
तभी तो तमाम आदेशों के बाद भी अवैध लाल-नीली बत्तियों का मोह नेता और अफसर नहीं छोड़ पाते। नियमों की कसौटी पर फेल हैं लेकिन हनक की कसौटी पर खुद को पास किए हुए हैं। चर्चा भी होने लगी है... सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब उम्मीद जगी है कि ऐसे ‘नकली राजाओं’ को जमीन पर लाया जा सकेगा।
आपात व्यवस्था, प्रवर्तन में लगे अफसरों और मुख्य व्यक्तियों के लिए लाल नीली बत्तियों की व्यवस्था रही है लेकिन इसकी आड़ में इनका दुरुपयोग भी जमकर हुआ। जो नियमों के दायरे में नहीं थे उन्होंने भी बत्तियां लगाकर घूमना शुरू कर दिया।
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तमाम बार चेकिंग होती है...इक्का-दुक्का अफसरों और नेताओं की बत्तियां उतार भी ली जाती हैं लेकिन फिर सब कुछ अपने ढर्रे पर शुरू हो जाता है। नियम है कि कोई वीआईपी व्यक्ति जब राज्य में सरकारी ड्यूटी पर भ्रमण के लिए निकलता है तभी लाल बत्ती लगा सकता है।
यही नियम अफसरों पर भी लागू होता है। लेकिन यहां तो शहर में घूमते हुए भी बत्तियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। छुटभैया नेता लाल बत्ती लगाकर घूम रहे हैं। वैसे तो जो दायरा है उसमें दर्जा राज्यमंत्री भी बत्ती का इस्तेमाल नहीं कर सकते। लेकिन मंडल में जो भी दर्जा मंत्री हैं वह धड़ल्ले से बत्ती लगाकर घूम रहे हैं। कइयों ने तो अपने प्राइवेट वाहन भी बत्ती लगा रखी है।
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ट्रैफिक पुलिस सभी रास्तों को रोककर काफिले को रवाना कर देती है...और पब्लिक बेचारी हटते बचते यही कहकर रह जाती है कि अंग्रेज तो चले गए लेकिन गुलामी का एहसास कराने वाली ‘अदाएं’ अफसरों और नेताओं के दिलों में उतार गए।
तभी तो तमाम आदेशों के बाद भी अवैध लाल-नीली बत्तियों का मोह नेता और अफसर नहीं छोड़ पाते। नियमों की कसौटी पर फेल हैं लेकिन हनक की कसौटी पर खुद को पास किए हुए हैं। चर्चा भी होने लगी है... सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब उम्मीद जगी है कि ऐसे ‘नकली राजाओं’ को जमीन पर लाया जा सकेगा।
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आपात व्यवस्था, प्रवर्तन में लगे अफसरों और मुख्य व्यक्तियों के लिए लाल नीली बत्तियों की व्यवस्था रही है लेकिन इसकी आड़ में इनका दुरुपयोग भी जमकर हुआ। जो नियमों के दायरे में नहीं थे उन्होंने भी बत्तियां लगाकर घूमना शुरू कर दिया।
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तमाम बार चेकिंग होती है...इक्का-दुक्का अफसरों और नेताओं की बत्तियां उतार भी ली जाती हैं लेकिन फिर सब कुछ अपने ढर्रे पर शुरू हो जाता है। नियम है कि कोई वीआईपी व्यक्ति जब राज्य में सरकारी ड्यूटी पर भ्रमण के लिए निकलता है तभी लाल बत्ती लगा सकता है।
यही नियम अफसरों पर भी लागू होता है। लेकिन यहां तो शहर में घूमते हुए भी बत्तियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। छुटभैया नेता लाल बत्ती लगाकर घूम रहे हैं। वैसे तो जो दायरा है उसमें दर्जा राज्यमंत्री भी बत्ती का इस्तेमाल नहीं कर सकते। लेकिन मंडल में जो भी दर्जा मंत्री हैं वह धड़ल्ले से बत्ती लगाकर घूम रहे हैं। कइयों ने तो अपने प्राइवेट वाहन भी बत्ती लगा रखी है।