{"_id":"a584100c7c0458c8935bbc2645d6d900","slug":"after-five-years-the-decision-will-come","type":"story","status":"publish","title_hn":"पांच साल बाद आई फैसले की घड़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पांच साल बाद आई फैसले की घड़ी
अमर उजाला, नोएडा
Updated Wed, 13 Nov 2013 01:39 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोएडा में आखिरकार पांच साल बाद आरुषि-हेमराज हत्याकांड के फैसले की घड़ी आ ही गई। 25 नवंबर को देश की सबसे चर्चित डबल मर्डर मिस्ट्री का खुलासा होगा।
विज्ञापन
पूरे देश की निगाहें अदालत के फैसले पर टिकी हुई हैं। लोग इस बात को जानना चाहते हैं कि आखिर इस दोहरे हत्याकांड में किसका हाथ है?
16 मई, 2008 को नोएडा के सेक्टर-25 स्थित जलवायु विहार केफ्लैट नंबर एल-32 में डॉ. राजेश तलवार की 14 वर्षीय बेटी आरुषि का शव उसके कमरे से बरामद किया गया था।
विज्ञापन
हत्या गले पर तेज धारदार चाकू से वार करके की गई थी। वारदात का शक घर से लापता नौकर हेमराज पर गया लेकिन अगले दिन 17 मई को उसी फ्लैट के छत से नौकर हेमराज की भी लाश मिली थी।
विज्ञापन
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि आरुषि व हेमराज का कत्ल 15-16 मई की रात को हुआ था। नोएडा पुलिस ने अपनी तफ्तीश में तलवार दंपति को आरोपी पाया था।
लेकिन सीबीआई की पहली जांच टीम ने नोएडा पुलिस की तफ्तीश पर सवाल उठाते हुए नौकरों को आरोपी बनाते हुए जेल भेज दिया था। परंतु अदालत में इन आरोपों की धज्जियां उड़ी थीं।
नोएडा पुलिस के तत्कालीन जांच अधिकारियों के मुताबिक लगातार पूछताछ से परेशान डॉक्टर तलवार ने अपने वकील से अग्रिम जमानत के बारे में बात की थी।
सर्विलांस पर सुनी गई इस बातचीत के बाद नोएडा पुलिस का शक पक्का हो गया था। आरुषि व तलवार के बीच मेल के आदान-प्रदान में जो मैसेज थे वह साफ बया कर रहे थे कि आरुषि व उसके पिता के बीच के संबंधों में कटुता थी।
फ्लैट की जिस तरह से स्थिति थी, उससे स्पष्ट था कि फ्लैट के भीतर कोई बाहरी व्यक्ति नहीं आया था। इसके बाद सीबीआई की दूसरी जांच टीम की तफ्तीश नोएडा पुलिस की तफ्तीश पर ठहर गई थी।
कब क्या हुआ-
टाइम लाइन
16 मई 08 : आरुषि की हत्या, शव बेडरूम में मिला
17 मई : नौकर हेमराज की लाश छत पर मिली, उस पर आरुषि की हत्या का आरोप था
18 मई : जांच में एसटीएफ को भी लगाया गया
21 मई : देर रात आईजी व डीआईजी आरुषि के घर पहुंचे। डॉक्टर दंपति से पूछताछ
23 मई : पुलिस ने आरुषि के पिता डॉ. राजेश तलवार को गिरफ्तार किया
29 मई : मुख्यमंत्री मायावती ने जांच सीबीआई को सौंपने की घोषणा की
31 मई : सीबीआई ने हत्याकांड की जांच अपने हाथ में ली
20 जून : डॉ. तलवार का लाई डिटेक्टर टेस्ट, पत्नी नूपुर से भी पूछताछ
11 जुलाई : डॉ. तलवार को अदालत ने जमानत दी
5 अक्तूबर : आरुषि कांड की दोबारा जांच को सीबीआई ने टीम बनाई
19 फरवरी 2009 : तलवार दंपति की दोबारा ब्रेन मैपिंग, कोई नतीजा नहीं
8-12 फरवरी, 2010 : नूपुर तलवार का नारको टेस्ट किया गया
15-20 फरवरी : डॉ. राजेश तलवार का नारको टेस्ट किया गया
29 दिसंबर : सीबीआई ने हाथ खड़े किए, कोर्ट में मर्डर मिस्ट्री बंद करने की लगाई रिपोर्ट
3 जनवरी 2011 : आधी-अधूरी क्लोजर रिपोर्ट पर अदालत ने सीबीआई को लगाई फटकार
7 जनवरी : डॉ. तलवार के वकील ने कोर्ट से क्लोजर रिपोर्ट देने का आग्रह किया
21 जनवरी : क्लोजर रिपोर्ट और दस्तावेज उपलब्ध कराने की तलवार की अर्जी खारिज
25 जनवरी : तलवार पर कचहरी परिसर में उत्सव शर्मा नामक युवक ने कातिलाना हमला किया
9 फरवरी : सीबीआई कोर्ट ने तलवार दंपति को 28 फरवरी को अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया
21 फरवरी : तलवार दंपति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कोर्ट द्वारा तलब करने के आदेश को चुनौती दी
18 मार्च : हाईकोर्ट ने तलवार दंपति के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया
19 मार्च : तलवार दंपति सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सुनवाई पर रोक लगाई दी
6 जनवरी 2012 : सुप्रीम कोर्ट ने तलवार दंपति पर हत्या का मामला चलाने को हरी झंडी दी
11 अप्रैल : नूपुर तलवार के खिलाफ अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी किया
30 अप्रैल : विशेष सीबीआई अदालत में नूपुर तलवार की जमानत अर्जी खारिज, नूपुर गिरफ्तार
3 मई : नूपुर ने हाईकोर्ट की शरण ली लेकिन हाईकोर्ट ने जमानत देने से इंकार किया
25 मई : तलवार दंपति पर अदालत ने आरोप तय किया
3 जुलाई : नूपुर तलवार ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
17 सितंबर : सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर तलवार को जमानत दी, 25 को जेल से बाहर आई
13 मई, 2013 : सुप्रीम कोर्ट ने तलवार दंपति की उस याचिका पर विचार करने से इंकार कर दिया, जिसमें उन्होंने मुकदमे की सुनवाई में 14 गवाहों को तलब किए जाने की मांग की थी
18 जून : अदालत ने डिफेंस के 13 गवाहों में से 7 को बयान दर्ज कराने की अनुमति दी
नोएडा पुलिस की तफ्तीश के पहलू
- घटना के बाद पुलिस को फोन नहीं किया, पुलिस को उनके डॉक्टर मित्र ने सूचना दी
- पड़ोसियों को नहीं बताया, नौकरानी ने सबको सूचना दी
- जब घटनास्थल पर पुलिस पहुंची तो डॉक्टर ने घर में तफ्तीश के बजाए नौकर हेमराज की तलाश करने को कहा
- बेटी की लाश को देख कर फूट फूट कर न रोना
- आरुषि के खून से सना गद्दा छत पर ले जाने केलिए डॉक्टर का अन्य लोगों के साथ खुद छत पर जाना
- घटना के अगले ही दिन सुबह अस्थियां विसर्जित करने केलिए हरिद्वार जाना
- रास्ते में हेमराज की लाश छत पर मिलने की जानकारी पाकर वापस न आना
- मोदीनगर में होने के बावजूद पुलिस को मेरठ में होने की जानकारी देना
- छत पर लाश पड़े होने की जानकारी अपने करीबियों को देना
- इंट्री गेट की कुंडी बंद होने के बाद भी पत्नी का बालकनी से चाभी देना
- ऑनर किलिंग के बयान से घबरा कर मोबाइल फोन पर वकील से अग्रिम जमानत की बातचीत करना
सीबीआई की तफ्तीश केपहलू
-आरुषि का शव जिस बिस्तर पर पड़ा था उस पर किसी प्रकार की जोर जबरदस्ती केनिशान नहीं थे
-आरुषि के अंत:वस्त्र अपने स्थान से कुछ हटे हुए थे
-आरुषि के शरीर के पास पड़े स्कूल बैग पर खून का कोई निशान नहीं था
-गुलाबी रंग का तकिया बिस्तर के पीछे फैले खून पर पड़ा था, लेकिन उस पर खून नहीं लगा था
-हेमराज की लाश खींचने के निशान बाहर के एसी तक थे
-जहां से लाश को खींचा गया था वहां के मुकाबले एसी के पास ज्यादा खून था
-आरुषि के कमरे की चाभी के बारे में तलवार दंपति सही जवाब नहीं दे सके
-छत के किनारे हेमराज की लाश खींची गई थी
-लाश कूलर के पैनल से ढकी हुई थी
-छत की ग्रिल को डबल बेड की चादर से ढका गया था
-छत के दरवाजे पर ताला लगा था, जिस तरफ हेमराज की लाश थी दूसरी तरफ की छत पर जाने वाला दरवाजा खुला हुआ था