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नेट क्वालीफाई करने के बाद भी जॉब की गारंटी नहीं

Sat, 06 Apr 2013 01:34 PM IST
विपिन धनकड़/मेरठ
विपिन धनकड़/मेरठ Updated Sat, 06 Apr 2013 01:34 PM IST
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no jobs after clearing national eligibility test

छात्रों के लिए यूजीसी नेट फैशन की तरह हो गया है। जिस तरह फैशन के दौर में गारंटी की इच्छा नहीं होती, वैसे ही यूजीसी नेट पास करने वालों के लिए नौकरी की गारंटी नहीं है।

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बावजूद इसके नेट देने और पास करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पद खाली पड़े हैं, लेकिन उन्हें भरने के प्रयास नहीं किए जा रहे।
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दो साल के अंदर यूजीसी नेट का रिजल्ट चार गुना बढ़ गया है। दिसंबर में सीसीएसयू के सेंटरों पर रिकार्ड अभ्यर्थियों ने नेशनल इलिजिबिलिट टेस्ट दिया।

यूजीसी ने जून 2012 के नेट से तीनों पेपर में ऑब्जेक्टिव पैटर्न लागू किया था। इसके बाद अचानक से एलएस (लेक्चररशिप) के रिजल्ट में उछाल आया।

इस टेस्ट में रिकार्ड 40,332 ने एलएस पास किया। इसके बाद यूजीसी ने टॉप 15 प्रतिशत की मेरिट बनाकर रिजल्ट घोषित किया। दिसंबर 2012 के रिजल्ट में एलएस 35,557 पास हुए।
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जेआरएफ (जूनियर रिसर्च फेलोशिप) के रिजल्ट पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। यह तीन से साढ़े तीन हजार के बीच रहा। दिसंबर के टेस्ट में सीसीएसयू के सेंटरों से रिकार्ड 18,633 परीक्षार्थी बैठे।

जानकारों का कहना है नेट देने वाले ज्यादातर परीक्षार्थी सीरियस नहीं है। स्कॉलरशिप पाने और लेक्चररशिप के योग्य होने के लिए भेड़चाल ज्यादा है। टीचिंग और रिसर्च को लेकर गंभीर छात्रों की संख्या कम है।


दूसरी तरफ कैंपस से लेकर कॉलेजों तक सालों से पद खाली पड़े हैं। वे नहीं भरे जा रहे। नेट के क्रेज की वजह से कोचिंग सेंटर और खुल गए हैं।

यूजीसी नेट दिसंबर 2012 के कोर्डिनेटर प्रो. बी रमेश का कहना है कि नेट क्वालीफाई करने वाले टीचिंग में कम आ रहे हैं। इसकी एक वजह मौकों की कमी भी है। टेस्ट को कुछ ही अभ्यर्थी गंभीरता से लेते हैं। यह भी देखने में आ रहा है कि एलएस और जेआरएफ क्लियर करने के बाद बहुत से छात्रों में वह गंभीरता नहीं रहती।

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