लाश दफन कर कब्र भूल गई पुलिस

कपिल कुमार/ मुजफ्फरनगर Updated Sun, 24 Nov 2013 03:28 PM IST
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दंगे में मारे गए लांक गांव के 22 साल के नाजिम की लाश किस कब्र में दफन है, पुलिस दो माह बाद भी यह नहीं बता पा रही है। डीएनए रिपोर्ट उलझने से परिवार को न मुआवजा मिला और न ही सरकारी नौकरी। इत्तेफाक यह भी है कि नाजिम की लाश उसके गांव से करीब 50 किमी दूर जौली नहर पर मिली।
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सात सितंबर की शाम जौली गंगनहर की हिंसा में सात मौतें हुई थीं, जिनमें एक अज्ञात लाश भी थी। मृतक की शिनाख्त नहीं हो पाई तो पोस्टमार्टम कराकर पुलिस ने शव को सरवट कब्रिस्तान में दफना दिया। इसी दौरान दंगे में मारे गए कई अन्य लोगों को भी इसी कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक किया गया।
एक हफ्ते बाद लापता नाजिम की खोज के लिए परिजनों ने भागदौड़ की। अज्ञात शव मिलने की सूचना पर घरवाले भोपा थाने पहुंचे, जहां नाजिम के कपड़े और फोटोग्राफ देखकर उसकी पहचान हुई। भाई साजिद ने बताया कि नाजिम दवा लेने बिजनौर गया था, लौटते समय जौली नहर पर वह दंगाइयों के हत्थे चढ़ गया।
पुलिस को साथ लेकर परिजन सरवट कब्रिस्तान पहुंचे, लेकिन वहां दंगे में जान गंवाने वाले मृतकों की कई कब्रें थीं। पुलिसकर्मी यह नहीं बता पाए कि नाजिम किस कब्र में दफन है। बेहाल परिजन उसकी कब्र पर मिट्टी भी नहीं डाल पाए। मृतक की शिनाख्त तो हो गई, लेकिन कानून इसे मानने को तैयार नहीं है। वजह डीएनए रिपोर्ट मैच करने के बाद ही मृतक की पहचान मान्य होगी।

पीड़ित परिवार को प्रदेश सरकार की मुआवजा राशि और सरकारी नौकरी भी नहीं मिल पाई है। नाजिम के डीएनए में भी पेंच है। फोरेंसिक लैब ने प्रशासन को जो रिपोर्ट भेजी है, उसे अधूरा बताया है। एसआईटी के आईओ सुशील कुमार योगी ने बताया कि औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही नाजिम की शिनाख्त मानी जाएगी।

पांच माह में उजड़ा ‘गुलशन’
लांक गांव के मोहम्मद मुस्तकीम सैफी के बेटे नाजिम की शादी पांच माह पहले ही शामली के हिंड गांव की गुलशनजहां से हुई थी। नाजिम दिल्ली में कारपेंटर था, कुछ दिन पहले ही गांव लौटा था। दुखद यह भी है कि गुलशन तीन माह की गर्भवती है, दंगे ने उसकी खुशियां भी उजाड़ दी हैं।
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