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जब चहुंओर हरियाली होगी, घर-घर खुशहाली होगी....

Sat, 05 Jun 2021 12:25 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 05 Jun 2021 12:25 AM IST
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world environment day muzaffarnagar
खतौली अशोक विहार में अपने घर के बाहर बागवानी में काम करते हुए शिवकुमार। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
मुजफ्फरनगर। कोरोना की दूसरी लहर में लोगों को पेड़-पौधों के रखरखाव और हरियाली की याद दिला दी है। प्रकृति से खिलवाड़ से ऑक्सीजन की कमी का संकट सबके सामने है। आमजन समझने लगा पर्यावरण से ही जीवन बचेगा। वहीं जिले में आज भी ऐसे प्रहरी है, जिनकी कोशिश को शौक कहें या दीवानगी, उनके प्रयास से घर-आंगन की बगियां में फूलों की खुशबू महक रही है। नर्सरी में औषधीय पेड़-पौधों और फलदार पेड़ आगंतुकों को प्रेरित करते है। घटते भूजल, प्रकृति का दोहन और अंधाधुंध पेड़ों का कटान प्रदूषण के लिए खतरा है। वहीं उम्मीद के साथ पर्यावरण संतुलन के प्रति फिक्रमंद लोगों का जिंदगी बचाने को सार्थक प्रयास सराहनीय है। जब चहुंओर हरियाली होगी, घर-घर खुशहाली होगी....। अरसे से स्कूल-कॉलेजों के प्रांगण को हरा भरा बनाने में लोगों की दिलचस्पी बेमिसाल है।
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स्कूल परिसर और दफ्तरों में कराते हैं पौधरोपण
बुढ़ाना ब्लाक के गांव खीरजपुर के राजीव कुमार का पर्यावरण के प्रति मोह अभिभूत करता है। उन्होंने कस्तूरबा गांधी बालिका स्कूल में संविदा पर शिक्षक की नौकरी की। उसके बाद उन्होंने स्वयंसेवी संस्था से जुड़कर पर्यावरण सुरक्षा का बीड़ा उठाया। वर्ष 2011 से उन्होंने खानपुर, रायपुर, भैंसाना, कस्तूरबा विद्यालयों के प्रांगण आदि में पौध लगवाएं। उनकी देखभाल का जिम्मा उठाया। आज स्कूल प्रांगण में हरियाली हर किसी को लुभाती है। इंडिया रेड क्रॉस सोसायटी से जुडे़ हैं।
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हरियाली से महकता है घर और कॉलेज प्रांगण
उम्र के 83 वें पायदान पर होने के बावजूद ब्रह्मप्रकाश गर्ग की प्रेरणा से कई पेड़ पौधों से घर का आंगन महक रहा है। अध्यक्ष होने के नाते महाराजा अग्रसेन कन्या महाविद्यालय का पूरा प्रांगण औषधीय पेड़-पौधों से हरा भरा नजर आता है। यहां आने वाले अतिथि हरियाली देख आकर्षित होते हैं। हमेशा पर्यावरण से लगाव रहा। कॉलेज में गिलोय, एलोविरा, आंवला, बेल, चीड़, अनार, कढ़ी पत्ता और हर तरह के फूलों से बगियां महकती है।
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पर्यावरण शुद्धि को घर की नर्सरी में लगा दिए 500 पेड़
डॉ. नरेंद्र अग्रवाल को बचपन से पेड़-पौधों के प्रति शौक रहा। उन्होंने मकान की दूसरी और तीसरी मंजिल पर सैकड़ों गमले लगाकर नर्सरी सजाई है। घर की हरियाली मकान में खाली प्लाट में करीब 500 गमलों में नई वैरायटी के फूलों और आक्सीजन देने वाले पेड़-पौधे लगाए है। गुलाब की हर किस्म के 200 गमले, नील कमल फूल, गेंदा, चमेली और पर्यावरण शुद्ध करने को कलेंडरा, एरोकेरिया, रबड प्लांट लगाए हैं। सुबह एक से डेढ़ घंटे तक खुद पानी देना और सफाई करना उनकी दिनचर्या है। खुद क्यारियों की सफाई करते हैं।
फलदार और हरे पेड़ों की सेवा अनूठा अनुभव
शहर के सूरज विहार निवासी प्रमोद गोयल को युवावस्था से बागवानी अच्छी लगती है। घर के आसपास सौम्य वातावरण बनाए रखने को उन्होंने 400 गज के खाली प्लाट में फलदार पेड़ लगाए हैं। गुलाब, गेंदा आदि को क्यारियों में लगाया है। नींबू, अमरूद, अनार और आडू आदि के पेड़ लगाए है। बिना कीटनाशक दवाईयों से उपजाई सब्जियां तोरी लॉकी, खीरा आदि की बेल से घर की जरूरत पूरी होती हैं। कहते हैं जीवन में यह शौक अच्छा अनुभव देता है।
खुद सब्जियां उगाकर घर में सेवन करते हैं
प्रेमपुरी निवासी पूर्व जिला पंचायत सदस्य राकेश वशिष्ठ ने पेड़ पौधों को जीवन देने का उनके परिवार से संकल्प लिया है। प्रकृति की रक्षा के लिए मकान की छत पर गमलों में पौध लगाई है। पशु-पक्षियों का ठिकाना बनाकर उनके दान-पानी का इंतजाम कर रखा है। चारों तरफ फूलों से सजा रखा है। वहीं चंद्रशेखर आजाद पीजी कॉलेज प्रांगण में वह खुद पेड़ पौधों का लगाकर हिफाजत करते है। उनको हर्बल सब्जियां उगाने का शौक है।
अगर खिला सा उपवन होगा, स्वस्थ तभी हर जन होगा
भोकरहेड़ी के कवि राम कुमार रागी का प्रकृति के प्रति विशेष लगाव अनुकरणीय है। उन्होंने पर्यावरण को बनाए रखने के लिए घर के प्रांगण में 24 पौधे गुलाब, चांदनी, मोगरा, बोगन्र, बेलिया, गुड़हल, साइकस, पाम आदि के लगाए है। उनकी कविता की लाइनों में पर्यावरण के प्रति चिंता नजर आती है। गर पौधे, वायु जल नहीं रहेगा, निश्चित अपना कल नहीं रहेगा, जब चहुंओर हरियाली होगी, घर-घर खुशहाली होगी, अगर खिला सा उपवन होगा, स्वस्थ तभी हर जन होगा, जीवन की बगिया महकेगी, जब घर में चिड़िया चहकेगी।

पर्यावरण संरक्षण के प्रहरी बने हैं
जानसठ। गांव नूनीखेड़ा निवासी कृषि विज्ञान केंद्र बघरा के वैज्ञानिक डॉक्टर जितेंद्र कुमार आर्य उद्यान वैज्ञानिक के रूप में कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यरत हैं। पिछले कई वर्षों से क्षेत्र में उनके प्रयासों से हजारों पेड़ लगाए जा चुके हैं। ग्रामीणों को उनसे प्रेरणा मिलती है। उनका कहना है कि पर्यावरण संरक्षण दिवस मनाने की आवश्यकता इसलिए पड़ी कि वर्तमान समय में वायु प्रदूषण बढ़ने के कारण मानव जीवन काफी परेशानियों से भरा है। वायु प्रदूषण को पौधरोपण से कम किया जा सकता है। ग्राम वासियों को प्रत्येक वर्ष प्रेरित किया जाता है, ताकि हमारा पर्यावरण संरक्षण हो।
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