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Muzaffarnagar News: मुजफ्फनगर - प्रदूषण से बचें, नियमित करें व्यायाम, फेफड़ें रहेंगे स्वस्थ
Tue, 14 Nov 2023 11:41 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 14 Nov 2023 11:41 PM IST
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विश्व सीओपीडी दिवस :
- फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता ध्रूमपान, बर्बाद हो रहीं जिंदगियां
(फोटो )
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फनगर। सीओपीडी हर उम्र की जिंदगी के लिए खतरा बन रहीं है। फेफड़ों से संबंधित बीमारी को प्रदूषण से दूर रहकर बचा जा सकता है। ध्रूमपान फेफड़ों को बर्बाद कर रहा है। वरिष्ठ चिकित्सक मानते हैं कि स्मॉकिंग करना फेफड़ों के डैमेज होना बड़ी वजह है। यह बीमारी गंभीर समस्याएं बढ़ती हैं। नियमित व्यायाम खासकर अनुलोम-विलोम से खतरा कम किया जा सकता है।
क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) से देशभर में एक साल में करोड़ों मरीज मिल रहे हैं। लापरवाही और ध्रूमपान की लत से यह बीमारी भयावह बनती जा रही है। खतरनाक रोग से फेफड़ों की सास नली सिकुड़ जाती है। सांस लेने में तकलीफ से मरीज को परेशान करती है। प्रदूषण, स्मॉग, सिगरेट की लत इस बीमारी को बढ़ावा देती है। फेफड़ों में सास की नली सिकुड़ने के कारण कार्बन डाई ऑक्साइड बाहर नहीं निकल पाती। दम घुटता है। शरीर की शक्ति क्षीण पड़ने लगती है। दिल की बीमारी और फेफड़ों के कैंसर का खतरे की आशंका रहती है।
क्या है लक्षण
- काफी दिनों से खांसी की समस्या
- बलगम अधिक आना
- सांस लेने में दिक्कत
- मामूली शारीरिक काम करने में थकावट
- अकारण वजन कम होना
कैसे करे बचाव:
- ध्रुमपान से बचें, सिगरेट से परहेज करें
- प्रदूषित वातावरण से बचें
- धूल आंधी में मुंह नाक पर कपड़ा ढककर रखें
- नियमित व्यायाम करें
- समय-समय पर पीएफटी (फेफड़ों की जांच) कराएं
क्या कहते हैं चिकित्सक:
-- --
नियमित करें अनुलोम-विलोम : डॉ. विकास
फोटो
वरिष्ठ फिजिशयन एवं ह्दय रोग विशेषज्ञ (एमडी) डाॅ. विकास कुमार बताते हैं खासकर फैक्टरियों में काम करने वाले कामगार और प्रदूषित वातावरण से फेफड़ों का रोग बढ़ता है। लगातार अनुलोम अनुलोम करें। व्यायाम करें। अनावश्यक तनाव से बचें। हल्का भोजन करें। सांस फूलने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है। फेफड़े खराब होने से कई बीमारियां पनप जाती है। पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी) कराते रहे और समय-समय पर चिकित्सक से परामर्श लें।
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लतातार खांसी रनहा भी खतरे से खाली नहीं . विशाल कौशिक
फोटो
चरथावल। वरिष्ठ फिजिशयन डॉ. विशाल कौशिक का कहना है लगातार खांसी रहने से फेफड़ों की बीमारी बन जाती है। यह रोग सांस लेने में खतरा पैदा करता है। धूम्र्रपान से बचना और पर्यावरण संतुलन बनाए रखें। जीवन की दिनचर्या में बदलाव करें। रोज प्राणायाम कर अभ्यास डालें। उपचार में इनेहलर और गर्म पानी का सेवन उपयोगी है। लापरवाही बरतने पर यह जटिल रोग जीवन के लिए खतरा बन सकता है।
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- फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता ध्रूमपान, बर्बाद हो रहीं जिंदगियां
(फोटो )
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फनगर। सीओपीडी हर उम्र की जिंदगी के लिए खतरा बन रहीं है। फेफड़ों से संबंधित बीमारी को प्रदूषण से दूर रहकर बचा जा सकता है। ध्रूमपान फेफड़ों को बर्बाद कर रहा है। वरिष्ठ चिकित्सक मानते हैं कि स्मॉकिंग करना फेफड़ों के डैमेज होना बड़ी वजह है। यह बीमारी गंभीर समस्याएं बढ़ती हैं। नियमित व्यायाम खासकर अनुलोम-विलोम से खतरा कम किया जा सकता है।
क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) से देशभर में एक साल में करोड़ों मरीज मिल रहे हैं। लापरवाही और ध्रूमपान की लत से यह बीमारी भयावह बनती जा रही है। खतरनाक रोग से फेफड़ों की सास नली सिकुड़ जाती है। सांस लेने में तकलीफ से मरीज को परेशान करती है। प्रदूषण, स्मॉग, सिगरेट की लत इस बीमारी को बढ़ावा देती है। फेफड़ों में सास की नली सिकुड़ने के कारण कार्बन डाई ऑक्साइड बाहर नहीं निकल पाती। दम घुटता है। शरीर की शक्ति क्षीण पड़ने लगती है। दिल की बीमारी और फेफड़ों के कैंसर का खतरे की आशंका रहती है।
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क्या है लक्षण
- काफी दिनों से खांसी की समस्या
- बलगम अधिक आना
- सांस लेने में दिक्कत
- मामूली शारीरिक काम करने में थकावट
- अकारण वजन कम होना
कैसे करे बचाव:
- ध्रुमपान से बचें, सिगरेट से परहेज करें
- प्रदूषित वातावरण से बचें
- धूल आंधी में मुंह नाक पर कपड़ा ढककर रखें
- नियमित व्यायाम करें
- समय-समय पर पीएफटी (फेफड़ों की जांच) कराएं
क्या कहते हैं चिकित्सक:
नियमित करें अनुलोम-विलोम : डॉ. विकास
फोटो
वरिष्ठ फिजिशयन एवं ह्दय रोग विशेषज्ञ (एमडी) डाॅ. विकास कुमार बताते हैं खासकर फैक्टरियों में काम करने वाले कामगार और प्रदूषित वातावरण से फेफड़ों का रोग बढ़ता है। लगातार अनुलोम अनुलोम करें। व्यायाम करें। अनावश्यक तनाव से बचें। हल्का भोजन करें। सांस फूलने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है। फेफड़े खराब होने से कई बीमारियां पनप जाती है। पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी) कराते रहे और समय-समय पर चिकित्सक से परामर्श लें।
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लतातार खांसी रनहा भी खतरे से खाली नहीं . विशाल कौशिक
फोटो
चरथावल। वरिष्ठ फिजिशयन डॉ. विशाल कौशिक का कहना है लगातार खांसी रहने से फेफड़ों की बीमारी बन जाती है। यह रोग सांस लेने में खतरा पैदा करता है। धूम्र्रपान से बचना और पर्यावरण संतुलन बनाए रखें। जीवन की दिनचर्या में बदलाव करें। रोज प्राणायाम कर अभ्यास डालें। उपचार में इनेहलर और गर्म पानी का सेवन उपयोगी है। लापरवाही बरतने पर यह जटिल रोग जीवन के लिए खतरा बन सकता है।