फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Ultimate backwardness

अति पिछड़ों की एकजुटता से खिला कमल 

Sun, 12 Mar 2017 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Sun, 12 Mar 2017 12:32 AM IST
विज्ञापन
Ultimate backwardness
जश्न मनाते भाजपाई। - फोटो : अमर उजाला
भाजपा की जबरदस्त कामयाबी अति पिछड़ों की एकजुटता का कमाल है। सवर्ण जातियों के साथ यह वोट जुड़ने से भाजपा ने सभी छह सीटों पर जीत हासिल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भ्रष्टाचार के खिलाफ नोटबंदी के फैसले से गरीब जातियों में भाजपा के प्रति विश्वास बढ़ा। आरक्षण के मुद्दे को लेकर छिड़े बवाल ने भी ओबीसी की उन जातियों को लामबंद किया, जो आरक्षण का ज्यादा लाभ नहीं ले पाई हैं। 
विज्ञापन


जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों की जीत में अति पिछड़ी जातियों में अहम रोल अदा किया है। वोट गणित के सभी सियासी समीकरण ध्वस्त हो गए। मीरापुर को छोड़कर अन्य पांच सीटों पर कमल भारी अंतर से खिला है। शहर से गांव की गलियों तक हर तबके ने मोदी के नाम पर वोट दे दिया, जो दस्तकारी, रंगाई-पुताई, कुंभकार और मजदूरी पेशे से जुड़े हैं।
विज्ञापन


कारीगर और मिस्त्रियों से लेकर दर्जी तक ने भाजपा को जोश के साथ वोट दिया। यही वजह है कि भाजपा के कई प्रत्याशी 90 हजार से ज्यादा वोट पा गए। शहर में कपिलदेव को 97838, बुढ़ाना में उमेश मलिक 97781, खतौली में विक्रम सैनी 94771 वोट पाने में कामयाब हुए, जबकि चरथावल में विजय कश्यप को 81842 वोट मिले। पुरकाजी में प्रमोद ऊंटवाल को 77491 और मीरापुर में अवतार सिंह भड़ाना 69035 वोट मिले।
विज्ञापन
विज्ञापन


आंकड़ों के लिहाज से भाजपा की जीत में सवर्ण जातियों के साथ अतिपिछड़ों की एकजुटता ने कामयाबी दिलाने की राह बनाई है। टिकट वितरण में अति पिछड़ी जातियों को तवज्जो दिए जाने से भी भाजपा ने सपा और बसपा को चित किया है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की मंशा भांपकर अतिपिछड़ों को कमल के साथ जुड़ने में ही अपना भविष्य उज्जवल दिखा। विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य को बनाए जाने से भी नए समीकरण बने।

बसपा और सपा ने अति पिछड़ी जातियों पर गौर नहीं किया। भाजपा ने चुनावी बाजी जीतने के लिए अपने वोट बैंक के साथ अति पिछड़ी जातियों के नेताओं को तरजीह दी। चुनाव से पहले सूबे में पिछड़ा वर्ग सम्मेलन कराए गए। हरियाणा और वेस्ट यूपी में आरक्षण को लेकर कई साल से जो बवाल छिड़ा है, उस मामले में भाजपा का फूंक-फूंककर कदम रखना भी अति पिछड़ी जातियों में यह विश्वास कायम कर गया कि उनके साथ अन्याय नहीं होगा।

केंद्रीय सेवाओँ में ओबीसी कोटे में शामिल किए जाने को लेकर जाट सड़कों पर है। हरियाणा के आंदोलन के बाद राजनीतिक समीकरणों में भी बदलाव आया है। भाजपा के लिए आरक्षण के मुद्दे को सुलझाना आसान नहीं होगा, यही वजह है कि चुनाव से पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जाटों की नाराजगी दूर करने की पहल की थी।


हालांकि आरक्षण को लेकर जाटों ने जिले के खरड़ में चुनाव से ठीक पहले एक पंचायत की थी, जिसकी अति पिछड़ी जातियों में अंदरूनी प्रतिक्रिया हुई। पंचायत में भाजपा को हराने की घोषणा हुई थी। चुनाव से पहले कोई अनुमान नहीं था कि भाजपा जिले की सभी छह सीटें जीत लेगी। भाजपा ने बुढ़ाना सीट पर जाट प्रत्याशी उमेश मलिक को उम्मीदवार बनाया, लेकिन अति पिछड़ी जातियों ने यहां भी भाजपा को वोट किया। अति दलित जातियों ने भी कमल का साथ निभाया, यही वजह है कि सपा, बसपा, रालोद और कांग्रेस की विधानसभा चुनाव में लुटिया डूब गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed