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डीएम आफिस से गृह मंत्रायलय के पत्र गायब
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डीएम ऑफिस से गृह मंत्रालय के दो पत्र गायब
रणवीर सैनी
मुजफ्फरनगर। गृह मंत्रालय (भारत सरकार) के शत्रु संपत्ति विभाग के दो पत्र डीएम ऑफिस से गायब हो गए हैं। 16 फरवरी 2018 और एक अगस्त 2019 में जारी पत्र प्रशासन के रिकार्ड में उपलब्ध ही नहीं है। इन दोनों पत्रों में शत्रु संपत्ति की जमीन पर छह बिंदुओं पर जांच और शत्रु संपत्ति के विक्रय और निर्माण पर रोक के आदेश थे। डीएम ऑफिस से गृह मंत्रालय के पत्र गायब होने से पूरे प्रशासन में हड़कंप मचा है।
इन दोनों पत्रों में 570 बीघा शत्रु संपत्ति की जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश है। यह संपत्ति आजादी से पहले पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री लियाकत अली के परिवार के नाम पर थी। इन दोनों पत्रों के गायब होने का खुलासा भी तब हुआ जब गृह मंत्रालय के शत्रु संपत्ति विभाग ने 15 अक्तूबर को रिमाइंडर भेजकर दोनों पत्रों की प्रति भी संलग्न की, लेकिन प्रशासन ने मामले को दबाए रखा। अमर उजाला के प्रकरण को उजागर करने के बाद प्रशासन में हलचल हुई। 16 फरवरी 2018 को जारी पत्र में गृह मंत्रालय के शत्रु संपत्ति विभाग ने भूमि को शत्रु संपत्ति घोषित करने को लेकर छह बिंदुओं पर जांच मांगी थी। इस पत्र की प्रति विशेष सचिव राजस्व लखनऊ, एडीएम प्रशासन मुजफ्फरनगर, नगर पालिका, एसएसपी मुजफ्फरनगर को भी जारी हुई थी। दूसरा पत्र एक अगस्त 2019 को जारी हुआ। इस पत्र में 16 फरवरी के पत्र का हवाला भी दिया गया। साथ ही शत्रु संपत्ति विभाग ने भोपा रोड की 570 बीघा भूमि के विक्रय और निर्माण पर रोक के आदेश जारी किए। शत्रु संपत्ति का पटल देख रहे लिपिक का कहना है कि उनके पास दोनों पत्र आए ही नहीं। गृह मंत्रालय के आदेश गायब होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर एक सवालिया निशान खड़ा हो गया है।
हमें पत्र नहीं मिले हैं: अमित
मुजफ्फरनगर। शत्रु संपत्ति के प्रकरणों के नोडल प्रभारी रहे एडीएम प्रशासन अमित सिंह ने माना कि 16 फरवरी 2018 और एक अगस्त 2019 के गृह मंत्रालय के पत्र डीएम ऑफिस के रिकार्ड से गायब हैं। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है। सोमवार को प्रशासन की ओर से पत्र वाहक लखनऊ जाएगा। लखनऊ में गृह मंत्रालय के शत्रु संपत्ति विभाग दफ्तर से इन दोनों पत्रों के डिस्पेच नंबर लिए जाएंगे। पूरे मामले की जांच हो रही है कि आखिर पत्र गायब कैसे हुए।
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रणवीर सैनी
मुजफ्फरनगर। गृह मंत्रालय (भारत सरकार) के शत्रु संपत्ति विभाग के दो पत्र डीएम ऑफिस से गायब हो गए हैं। 16 फरवरी 2018 और एक अगस्त 2019 में जारी पत्र प्रशासन के रिकार्ड में उपलब्ध ही नहीं है। इन दोनों पत्रों में शत्रु संपत्ति की जमीन पर छह बिंदुओं पर जांच और शत्रु संपत्ति के विक्रय और निर्माण पर रोक के आदेश थे। डीएम ऑफिस से गृह मंत्रालय के पत्र गायब होने से पूरे प्रशासन में हड़कंप मचा है।
इन दोनों पत्रों में 570 बीघा शत्रु संपत्ति की जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश है। यह संपत्ति आजादी से पहले पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री लियाकत अली के परिवार के नाम पर थी। इन दोनों पत्रों के गायब होने का खुलासा भी तब हुआ जब गृह मंत्रालय के शत्रु संपत्ति विभाग ने 15 अक्तूबर को रिमाइंडर भेजकर दोनों पत्रों की प्रति भी संलग्न की, लेकिन प्रशासन ने मामले को दबाए रखा। अमर उजाला के प्रकरण को उजागर करने के बाद प्रशासन में हलचल हुई। 16 फरवरी 2018 को जारी पत्र में गृह मंत्रालय के शत्रु संपत्ति विभाग ने भूमि को शत्रु संपत्ति घोषित करने को लेकर छह बिंदुओं पर जांच मांगी थी। इस पत्र की प्रति विशेष सचिव राजस्व लखनऊ, एडीएम प्रशासन मुजफ्फरनगर, नगर पालिका, एसएसपी मुजफ्फरनगर को भी जारी हुई थी। दूसरा पत्र एक अगस्त 2019 को जारी हुआ। इस पत्र में 16 फरवरी के पत्र का हवाला भी दिया गया। साथ ही शत्रु संपत्ति विभाग ने भोपा रोड की 570 बीघा भूमि के विक्रय और निर्माण पर रोक के आदेश जारी किए। शत्रु संपत्ति का पटल देख रहे लिपिक का कहना है कि उनके पास दोनों पत्र आए ही नहीं। गृह मंत्रालय के आदेश गायब होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर एक सवालिया निशान खड़ा हो गया है।
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हमें पत्र नहीं मिले हैं: अमित
मुजफ्फरनगर। शत्रु संपत्ति के प्रकरणों के नोडल प्रभारी रहे एडीएम प्रशासन अमित सिंह ने माना कि 16 फरवरी 2018 और एक अगस्त 2019 के गृह मंत्रालय के पत्र डीएम ऑफिस के रिकार्ड से गायब हैं। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है। सोमवार को प्रशासन की ओर से पत्र वाहक लखनऊ जाएगा। लखनऊ में गृह मंत्रालय के शत्रु संपत्ति विभाग दफ्तर से इन दोनों पत्रों के डिस्पेच नंबर लिए जाएंगे। पूरे मामले की जांच हो रही है कि आखिर पत्र गायब कैसे हुए।
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