{"_id":"60eddc778ebc3ebf587e81a8","slug":"tuberculosis-patients-are-being-monitored-by-geo-tagging-muzaffarnagar-news-mrt547241164","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्षय रोगियों की जियो टैगिंग से की जा रही निगरानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
क्षय रोगियों की जियो टैगिंग से की जा रही निगरानी
विज्ञापन
क्षय रोगियों की जियो टैगिंग से की जा रही निगरानी
मुजफ्फरनगर। देश को टीबी जैसी घातक बीमारी से मुक्ति दिलाने के लिए अब इससे पीड़ित मरीजों को तलाश करने के लिए जिले में जियो टैगिंग अभियान शुरू किया गया है। चिह्नित मरीजों की लोकेशन शासन के निक्षय पोर्टल पर दर्ज की जा रही है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश चंद गुप्ता ने बताया देश को वर्ष 2025 तक क्षय रोग से पूरी तरह मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए लगातार क्षय रोगियों की पहचान कर उन्हें तुरंत उपचार देने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत मरीजों को जियो टैगिंग के माध्यम से चिह्नित किया जा रहा है। यह अभियान जनपद के सभी नौ ब्लॉकों जानसठ, मोरना, पुरकाजी, मेघाखेड़ी, खतौली, चरथावल, शाहपुर, बघरा व सदर ब्लॉक में चल रहा है। चिह्नित मरीजों की लोकेशन तत्काल निक्षय पोर्टल पर दर्ज की जा रही है। इससे जिस क्षेत्र में टीबी रोगी अधिक हैं, उन क्षेत्रों पर फोकस किया जा सकेगा। जिला कार्यक्रम समन्वयक शहबान ने बताया कि जियो टैगिंग का मुख्य उद्देश्य टीबी रोगियों के निवास की पहचान करना है, जिनकी पूरी जानकारी मैप के जरिये ऑनलाइन मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक नौ हजार मरीजों की जियो टैगिंग की जा चुकी है।
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। देश को टीबी जैसी घातक बीमारी से मुक्ति दिलाने के लिए अब इससे पीड़ित मरीजों को तलाश करने के लिए जिले में जियो टैगिंग अभियान शुरू किया गया है। चिह्नित मरीजों की लोकेशन शासन के निक्षय पोर्टल पर दर्ज की जा रही है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश चंद गुप्ता ने बताया देश को वर्ष 2025 तक क्षय रोग से पूरी तरह मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए लगातार क्षय रोगियों की पहचान कर उन्हें तुरंत उपचार देने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत मरीजों को जियो टैगिंग के माध्यम से चिह्नित किया जा रहा है। यह अभियान जनपद के सभी नौ ब्लॉकों जानसठ, मोरना, पुरकाजी, मेघाखेड़ी, खतौली, चरथावल, शाहपुर, बघरा व सदर ब्लॉक में चल रहा है। चिह्नित मरीजों की लोकेशन तत्काल निक्षय पोर्टल पर दर्ज की जा रही है। इससे जिस क्षेत्र में टीबी रोगी अधिक हैं, उन क्षेत्रों पर फोकस किया जा सकेगा। जिला कार्यक्रम समन्वयक शहबान ने बताया कि जियो टैगिंग का मुख्य उद्देश्य टीबी रोगियों के निवास की पहचान करना है, जिनकी पूरी जानकारी मैप के जरिये ऑनलाइन मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक नौ हजार मरीजों की जियो टैगिंग की जा चुकी है।
विज्ञापन