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Muzaffarnagar News: श्रद्धा और भक्ति से मनाया तीर्थंकर दिवस
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फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
खतौली। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का जन्म तप महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। नगर के जैन मंदिरों में पूजा पाठ, विधान, प्रवचन और आरती की गई।
इस दौरान लेखिका डॉ. ज्योति जैन ने कहा कि भगवान ऋषभदेव का जन्म अयोध्या नगरी में हुआ और निर्वाण कैलाश पर्वत से हुआ, उनके पुत्र भरत के नाम पर इस देश का नाम भारतवर्ष पड़ा। भगवान ऋषभदेव ने कर्म युग का प्रारंभ करते हुए असि, मसि, कृषि, वाणिज्य, शिल्प और विद्या आदि कर्मों को सिखाया। उन्होंने अपनी पुत्री ब्राह्मी को ब्राह्मी लिपि का ज्ञान दिया, जो आज भारत की प्राचीनतम लिपि है। दूसरी पुत्री सुंदरी को अंक ज्ञान देकरविश्व में अंक शास्त्र का प्रचलन किया। इस मौके पर अरुण, पंडित अशोक शास्त्री, पंडित कल्पेंद्र, अजय प्रवक्ता, सुरेंद्र, प्रवीण, तुषांग मौजूद रहे।
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खतौली। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का जन्म तप महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। नगर के जैन मंदिरों में पूजा पाठ, विधान, प्रवचन और आरती की गई।
इस दौरान लेखिका डॉ. ज्योति जैन ने कहा कि भगवान ऋषभदेव का जन्म अयोध्या नगरी में हुआ और निर्वाण कैलाश पर्वत से हुआ, उनके पुत्र भरत के नाम पर इस देश का नाम भारतवर्ष पड़ा। भगवान ऋषभदेव ने कर्म युग का प्रारंभ करते हुए असि, मसि, कृषि, वाणिज्य, शिल्प और विद्या आदि कर्मों को सिखाया। उन्होंने अपनी पुत्री ब्राह्मी को ब्राह्मी लिपि का ज्ञान दिया, जो आज भारत की प्राचीनतम लिपि है। दूसरी पुत्री सुंदरी को अंक ज्ञान देकरविश्व में अंक शास्त्र का प्रचलन किया। इस मौके पर अरुण, पंडित अशोक शास्त्री, पंडित कल्पेंद्र, अजय प्रवक्ता, सुरेंद्र, प्रवीण, तुषांग मौजूद रहे।