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Muzaffarnagar: गोकशी के तीन दोषियों को 10-10 साल की सज़ा, कोर्ट ने कहा.. हर सनातनी के हृदय में गोमाता

Sat, 18 Jul 2026 11:17 PM IST
Pratyush Sharma न्यूज़ नेटवर्क, अमर उजाला, मुज़फ्फरनगर
न्यूज़ नेटवर्क, अमर उजाला, मुज़फ्फरनगर Published by: Pratyush Sharma Updated Sat, 18 Jul 2026 11:17 PM IST
सार

मुज़फ्फरनगर के तितावी थाना क्षेत्र के बुड़ीना खुर्द गांव में गोकशी के पांच साल पुराने मामले में तीन दोषियों को अदालत ने 10-10 साल के कारावास की सजा सुनाई। आठ-आठ लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। अदालत ने इस मामले में लिखा की प्रत्येक सनातनी के हृदय में गोमाता है और पहले रोटी गाय को देने की परंपरा है।

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Three accused of cow slaughter were sentenced to 10 years each, court said cow is in heart of every sanatani
गोकशी के तीन आरोपियों को मिली 10-10 साल की सज़ा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोकशी के तीनों दोषियों को सज़ा सुनाते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने लिखा कि प्रत्येक सनातनी के हृदय में गोमाता के प्रति श्रद्धा का जो भाव है, वह पीढ़ी-दर-पीढ़ी अनवरत प्रवाहित रहता है। आज के समय में जब विकास की अंधी दौड़ में परंपराएं पीछे छूट रही हैं तो भी गोमाता की प्रासंगिकता बनी हुई है। पहले रोटी गाय को देने की परंपरा है।

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मकान में होती मिली थी गोकशी
तितावी थाने के पुलिस उपनिरीक्षक रोहताश कुमार ने 24 जनवरी 2021 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने रात करीब सवा आठ बजे बुड़ीना खुर्द गांव के मकान में छापा मारकर गोकशी का मामला पकड़ा। अभियुक्त मुंशाद, अबूजर और आस मोहम्मद के खिलाफ 12 मई 2023 को आरोपपत्र दाखिल किया गया था।

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पुलिस के आरोपों को मिली चुनौती
अभियोजन पक्ष ने पांच और बचाव पक्ष ने सफाई साक्ष्य के लिए तीन गवाह पेश किए गए। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पुलिस के आरोप गलत है। दूसरे समुदाय के पड़ोसी की गवाही भी दिलाई। शनिवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 ने तीनों अभियुक्तों पर दोष सिद्ध करते हुए सजा सुनाई है।

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अदालत ने कहा..गाय पूरे विश्व की माता, समाज को जोड़कर रखा
अदालत ने फैसले में लिखा कि गोकशी सामाजिक रूप से संवेदनशील प्रकरण है। भारत में गाय को गोमाता का दर्जा प्राप्त है और हिंदू धर्म में गाय अत्यधिक पूजनीय है। गोकशी से बहुसंख्यक हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, जिससे सामाजिक सौहार्द और शांति भंग होने का खतरा रहता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि गाय पूरे विश्व की माता है। यह भी देखा जाता है कि रात में जो भोजन बनता है वह पहले गोमाता को खिलाया जाता है, इससे हिंदू धर्म में गाय की महत्ता को समझा जा सकता है। जब इस पवित्र परंपरा पर कोई आघात होता है तो वह केवल धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करता है बल्कि उस सभ्यतागत सूत्र को भी तोड़ने का प्रयास करता है, जिस पर भारतीय समाज की नींव टिकी है। गोवंश संरक्षण संबंधी विधिक प्रावधानों का पालन प्रत्येक नागरिक का विधिक दायित्व है और उसका उल्लंघन विधि की अवहेलना है। ऐसे मामलों में न्यायालय की भूमिका केवल अपराध का निर्णय करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि कानून का शासन प्रभावी बना रहे और प्रत्येक व्यक्ति यह समझे कि विधि का उल्लंघन किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

मुज़फ्फरनगर के तितावी थाना क्षेत्र के बुड़ीना खुर्द गांव में गोकशी के पांच साल पुराने मामले में तीन दोषियों को अदालत ने 10-10 साल के कारावास की सजा सुनाई। आठ-आठ लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। अदालत ने इस मामले में लिखा की प्रत्येक सनातनी के हृदय में गोमाता है और पहले रोटी गाय को देने की परंपरा है।
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