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Muzaffarnagar News: पांचों स्टेशनों में नहीं कोई व्यावसायिक स्टेशन
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चरथावल/मुजफ्फरनगर। गन्ना बेल्ट से गुजरने वाले फ्रेट कॉरिडोर पर जिले में कोई व्यावसायिक स्टेशन नहीं होने से किसान और कारोबारी माल उतारने और चढ़ाने की सुविधा से महरूम हैं। करीब दो साल से ईडीएफसी (ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) के अधिकारी जिले में जीएससीटी (गति शक्ति कारगो टर्मिनल) योजना के तहत व्यावसायिक स्टेशन चयन करने में जुटे हैं।
न्यू मंसूरपुर और न्यू मुजफ्फरनगर स्टेशनों को विकसित करना प्रस्तावित है। चयनित स्टेशनों पर माल गाड़ियों में माल चढ़ाने और उतारने की सुविधा मिलेगी। जिले में उत्पाद, फल फ्रूट और खेतीबाड़ी से संबंधी उपज का आयात निर्यात कम समय में होगा। साथ ही किराए में कमी आएगी।
हॉल में फ्रेट कॉरिडोर पर मेरठ जनपद में न्यू मोहिद्दीनपुर स्टेशन को निजी कंपनी का चयन हो चुका है। फिलहाल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में उत्पादित माल को दूरस्थ प्रांतों में भेजने के लिए जिले में कार्गो टर्मिनल बनाने की मांग उठने लगी है।
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कार्गो टर्मिनल के लिए दो शेड्यूल प्रस्तावित
जीएससीटी योजना के तहत चयनित स्टेशनों पर माल उतारने और चढ़ाने की व्यवस्था के लिए दो शेड्यूल प्रस्तावित हैं। एक शेड्यूल में डीएफसीसी जमीन मुहैया कराएगी और माल ढुलाई अधिकृत कंपनी करेगी। उसी औसत में किराया सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं दूसरे शेड्यूल में कॉरिडोर के स्टेशनाें पर कंपनी खुद जमीन खरीदेगी और माल उतारने, चढ़ाने और ढुलाई की व्यवस्था स्वयं करेगी। विभाग गंतव्य दूरी का निर्धारित किराया लेगा।
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कॉरिडोर पर जिले में पांच स्टेशन
मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र में न्यू सकौती, न्यू खतौली, न्यू मंसूरपुर, न्यू जड़ौदा नरा, न्यू मुजफ्फरनगर स्टेशन हैं। जिले का न्यू रोहाना स्टेशन बिजनौर लोकसभा में आता है। पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की लंबाई 1337 किमी है, जो पंजाब के लुधियाना से बिहार के सोननगर तक है। कॉरिडोर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार के जिलों से होकर गुजरता है।
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जानिए: इनका क्या कहना है
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माल उतारने और चढ़ाने की मिले सुविधा: कंसल
फोटो
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं पूर्व एमएलए अशोक कंसल बताते हैं कि जीएससीटी योजना लागू होने के बाद वेस्ट यूपी के जिलों से कई प्रांतों में माल आयात-निर्यात की सुविधा मिलेगी। फ्रेट कॉरिडोर भारत सरकार की योजना महत्वाकांक्षी है। एशिया में जिले का गुड़ उत्पाद मशहूर है। स्टेशन पर माल उतारने और चढ़ाने से व्यापारिक गतिविधियों को फायदा होगा।
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न्यू मुजफ्फरनगर के लिए हुआ था सर्वे : बालियान
फोटो
पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान कहते हैं कि वर्ष 2022 में जिले में व्यावसायिक कोड बनाने के लिए रेल मंत्री को पत्र लिखा था। इसके बाद न्यू मुजफ्फरनगर के लिए दुबई की एक कंपनी ने पहल की, लेकिन तकनीकी कारणों से चयन में दिक्कत आई। इसके लिए एक किमी क्षेत्रफल में खाली भूमि और आसपास कोई अंडरपास अथवा फ्लाईओवर नहीं होना चाहिए। वह पुन: प्रयास करेंगे।
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समय और रुपये की होगी बचत : संदीप
फोटो
रालोद जिलाध्यक्ष संदीप मलिक कहते हैं कि कार्गो टर्मिनल बनने से जिले के किसानों और उद्यमियों को फायदा होगा। व्यापारिक गतिविधियों का विकास होगा। ड्रीम प्रोजेक्ट में कॉरिडोर बना है। उत्तर भारत से पश्चिम तक पंजाब, झारखंड़, कोलकाता, बिहार आदि क्षेत्र के उत्पाद एक चौथाई किराए में काफी समय में पहुंचेगा।
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समानता पर हों चयन : ठा. पूरन सिंह
किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरन सिंह कहते हैं कि गन्ना बेल्ट में मुजफ्फरनगर का नाम देशभर में जाना जाता है। कम वक्त में माल पहुंचेगा और प्राप्त होगा। किसानों और उद्यमियों का माल खराब होने से राहत मिलेगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों में समानता के आधार पर कार्गो टर्मिनल की सुविधा मिले।
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न्यू मंसूरपुर और न्यू मुजफ्फरनगर स्टेशनों को विकसित करना प्रस्तावित है। चयनित स्टेशनों पर माल गाड़ियों में माल चढ़ाने और उतारने की सुविधा मिलेगी। जिले में उत्पाद, फल फ्रूट और खेतीबाड़ी से संबंधी उपज का आयात निर्यात कम समय में होगा। साथ ही किराए में कमी आएगी।
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हॉल में फ्रेट कॉरिडोर पर मेरठ जनपद में न्यू मोहिद्दीनपुर स्टेशन को निजी कंपनी का चयन हो चुका है। फिलहाल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में उत्पादित माल को दूरस्थ प्रांतों में भेजने के लिए जिले में कार्गो टर्मिनल बनाने की मांग उठने लगी है।
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कार्गो टर्मिनल के लिए दो शेड्यूल प्रस्तावित
जीएससीटी योजना के तहत चयनित स्टेशनों पर माल उतारने और चढ़ाने की व्यवस्था के लिए दो शेड्यूल प्रस्तावित हैं। एक शेड्यूल में डीएफसीसी जमीन मुहैया कराएगी और माल ढुलाई अधिकृत कंपनी करेगी। उसी औसत में किराया सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं दूसरे शेड्यूल में कॉरिडोर के स्टेशनाें पर कंपनी खुद जमीन खरीदेगी और माल उतारने, चढ़ाने और ढुलाई की व्यवस्था स्वयं करेगी। विभाग गंतव्य दूरी का निर्धारित किराया लेगा।
कॉरिडोर पर जिले में पांच स्टेशन
मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र में न्यू सकौती, न्यू खतौली, न्यू मंसूरपुर, न्यू जड़ौदा नरा, न्यू मुजफ्फरनगर स्टेशन हैं। जिले का न्यू रोहाना स्टेशन बिजनौर लोकसभा में आता है। पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की लंबाई 1337 किमी है, जो पंजाब के लुधियाना से बिहार के सोननगर तक है। कॉरिडोर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार के जिलों से होकर गुजरता है।
जानिए: इनका क्या कहना है
माल उतारने और चढ़ाने की मिले सुविधा: कंसल
फोटो
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं पूर्व एमएलए अशोक कंसल बताते हैं कि जीएससीटी योजना लागू होने के बाद वेस्ट यूपी के जिलों से कई प्रांतों में माल आयात-निर्यात की सुविधा मिलेगी। फ्रेट कॉरिडोर भारत सरकार की योजना महत्वाकांक्षी है। एशिया में जिले का गुड़ उत्पाद मशहूर है। स्टेशन पर माल उतारने और चढ़ाने से व्यापारिक गतिविधियों को फायदा होगा।
न्यू मुजफ्फरनगर के लिए हुआ था सर्वे : बालियान
फोटो
पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान कहते हैं कि वर्ष 2022 में जिले में व्यावसायिक कोड बनाने के लिए रेल मंत्री को पत्र लिखा था। इसके बाद न्यू मुजफ्फरनगर के लिए दुबई की एक कंपनी ने पहल की, लेकिन तकनीकी कारणों से चयन में दिक्कत आई। इसके लिए एक किमी क्षेत्रफल में खाली भूमि और आसपास कोई अंडरपास अथवा फ्लाईओवर नहीं होना चाहिए। वह पुन: प्रयास करेंगे।
समय और रुपये की होगी बचत : संदीप
फोटो
रालोद जिलाध्यक्ष संदीप मलिक कहते हैं कि कार्गो टर्मिनल बनने से जिले के किसानों और उद्यमियों को फायदा होगा। व्यापारिक गतिविधियों का विकास होगा। ड्रीम प्रोजेक्ट में कॉरिडोर बना है। उत्तर भारत से पश्चिम तक पंजाब, झारखंड़, कोलकाता, बिहार आदि क्षेत्र के उत्पाद एक चौथाई किराए में काफी समय में पहुंचेगा।
समानता पर हों चयन : ठा. पूरन सिंह
किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरन सिंह कहते हैं कि गन्ना बेल्ट में मुजफ्फरनगर का नाम देशभर में जाना जाता है। कम वक्त में माल पहुंचेगा और प्राप्त होगा। किसानों और उद्यमियों का माल खराब होने से राहत मिलेगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों में समानता के आधार पर कार्गो टर्मिनल की सुविधा मिले।