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डीएवी स्कूल ने नौजवानों में भरा था आजादी का जोश
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डीएवी इंटर कॉलेज मुजफ्फरनगर।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
डीएवी स्कूल के शिक्षक और विद्यार्थियों ने लोगों में भरा था आजादी का जोश
मुजफ्फरनगर। आजादी के आंदोलन में शहर के डीएवी स्कूल के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने लोगों में स्वतंत्रता का जोश भर दिया था। हेड मास्टर विश्वंभर दयाल ने अपने पद से इस्तीफा देकर तिरंगा थाम लिया था। शहर में इंकलाब जिंदाबाद और वंदेमातरम् के नारे लगाते हुए युवाओं की जलसे-जुलूसों में भागीदारी बढ़ने से अंग्रेज अफसर सहमे रहते थे।
वर्ष 1920 की बात है। जिले में स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन को लेकर डीएवी स्कूल के हेड मास्टर विश्वंभर दयाल ने क्रांति की मशाल हाथों में थाम ली थी। विद्यार्थी शराब तथा विदेशी कपड़े की दुकानों पर धरने देते, प्रभात फेरियां निकलते थे। सराफा बाजार के चौक पर विदेशी कपड़ों की होली जली थी। कलक्टर पी.डब्लू.मार्श के नम्र रुख की वजह से आजादी के मतवालों की गिरफ्तारी और दमन नहीं हुआ था। बिजनौर जिले के किरतपुर निवासी कुशल वक्ता विश्वंभर दयाल ने वर्ष 1921 में रेलवे स्टेशन के सामने लाला पीरुमल के बाग में नेशनल स्कूल खोल लिया था। 9 अगस्त, 1940 में भारत छोड़ो आंदोलन में छात्रों ने जोश के साथ भागीदारी की। डीएवी हाईस्कूल से स्वतंत्रता सेनानी हर भगवान त्यागी, देवदत्त शर्मा, मामचंद जैन, जय प्रकाश, श्याम लाल गर्ग, शिवचरण दास, त्रिलोक चंद जैन जुलूस लेकर एसडी इंटर कालेज पहुंच गए। वहां से सत्यप्रकाश गुप्ता, लक्ष्मीचंद्र गुप्ता, कृष्णचंद, रामभरोसे गुप्ता ने शहर में विरोध प्रदर्शन किया। जीआईसी के छात्र नेता धर्म प्रकाश गर्ग, इस्लामिया इंटर कालेज अब्दुल वहाब की टोली का साथ मिला। पुलिस के बेंतों की मार से भी विद्यार्थियों का जज्बा कम नहीं हुआ। घबराए कलक्टर जे.वी.लिंच को सभी स्कूल व कालेज बंद करने के आदेश देने पड़े। सत्य प्रकाश गुप्ता को हिरासत में लेकर पुरकाजी थाने में यातनाएं दी गई थीं। जेल में रहने के दौरान उन्हें एक साल कैद की सजा सुनाई गई थी।
छात्रों ने फूंक दिया था डाकखाना
मुजफ्फरनगर। डीएवी कॉलेज की लैब से अरुण गुप्त, त्रिलोकी नाथ शर्मा, रमेश चंद आदि ने रात्रि में दो बजे फास्फोरस चुरा लिया था। कोयले आदि के साथ मिलाकर उसे लिफाफों में भर लिया, जिसे शिव चौक पर स्थित डाकखाने के लेटर बाक्स में डाल दिया। आग लगने पर पुलिस ने छात्र शिवचरण दास को पकड़ लिया था। आंदोलन में ज्यादा वक्त देने से कई विद्यार्थी संस्थागत परीक्षा में बैठने से वंचित हो गए थे। हेड मास्टर किशोरी लाल ने उनके प्राइवेट फार्म भरवा कर एग्जाम दिलवाए। मंसूरपुर में टेलीफोन के तार काटने के अलावा डीएवी हाईस्कूल पर तिरंगा फहरा दिया। अंग्रेजों ने प्रबंधक डॉ हीरालाल को बुलाकर झंडा उतरवाया। मीरापुर के छात्र श्याम लाल को एक साल की सजा मिली थी।
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हैड मास्टर विश्वंभर दयाल का जीवन संघर्षशील था। वे पंडित मदनमोहन मालवीय, लाला लाजपत राय बड़े नेताओं से जुड़े थे। उन्होंने दिल्ली से ‘रोटी’ नाम का दैनिक अखबार निकाला था, जिसका मूल्य एक पैसा था। उन्होंने विद्यार्थियों में आजादी की प्रेरणा जागृत की थी।
- जयप्रकाश आजाद, पूर्व अध्यक्ष जिला बार संघ।
डीएवी कालेज स्वतंत्रता आंदोलन में फिरंगियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की योजना का केंद्र था। अनेक विद्यार्थी आजादी के लिए समर्पित भाव से लड़े और सजा भुगती। इस संस्था का गौरवमयी इतिहास रहा है।
- अनिल जिंदल, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं उपाध्यक्ष डीएवी इंटर कॉलेज प्रबंध समिति।
ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध आजादी के संघर्ष में कालेज के शिक्षकों और विद्यार्थियों का योगदान अमूल्य है। यह जिले की सबसे पुरातन संस्था है, जिसने छात्रों में मातृभूमि की स्वाधीनता और देशभक्ति का जोश भरा था।
- शिव कुमार यादव, प्रधानाचार्य, डीएवी इंटर कालेज।
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मुजफ्फरनगर। आजादी के आंदोलन में शहर के डीएवी स्कूल के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने लोगों में स्वतंत्रता का जोश भर दिया था। हेड मास्टर विश्वंभर दयाल ने अपने पद से इस्तीफा देकर तिरंगा थाम लिया था। शहर में इंकलाब जिंदाबाद और वंदेमातरम् के नारे लगाते हुए युवाओं की जलसे-जुलूसों में भागीदारी बढ़ने से अंग्रेज अफसर सहमे रहते थे।
वर्ष 1920 की बात है। जिले में स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन को लेकर डीएवी स्कूल के हेड मास्टर विश्वंभर दयाल ने क्रांति की मशाल हाथों में थाम ली थी। विद्यार्थी शराब तथा विदेशी कपड़े की दुकानों पर धरने देते, प्रभात फेरियां निकलते थे। सराफा बाजार के चौक पर विदेशी कपड़ों की होली जली थी। कलक्टर पी.डब्लू.मार्श के नम्र रुख की वजह से आजादी के मतवालों की गिरफ्तारी और दमन नहीं हुआ था। बिजनौर जिले के किरतपुर निवासी कुशल वक्ता विश्वंभर दयाल ने वर्ष 1921 में रेलवे स्टेशन के सामने लाला पीरुमल के बाग में नेशनल स्कूल खोल लिया था। 9 अगस्त, 1940 में भारत छोड़ो आंदोलन में छात्रों ने जोश के साथ भागीदारी की। डीएवी हाईस्कूल से स्वतंत्रता सेनानी हर भगवान त्यागी, देवदत्त शर्मा, मामचंद जैन, जय प्रकाश, श्याम लाल गर्ग, शिवचरण दास, त्रिलोक चंद जैन जुलूस लेकर एसडी इंटर कालेज पहुंच गए। वहां से सत्यप्रकाश गुप्ता, लक्ष्मीचंद्र गुप्ता, कृष्णचंद, रामभरोसे गुप्ता ने शहर में विरोध प्रदर्शन किया। जीआईसी के छात्र नेता धर्म प्रकाश गर्ग, इस्लामिया इंटर कालेज अब्दुल वहाब की टोली का साथ मिला। पुलिस के बेंतों की मार से भी विद्यार्थियों का जज्बा कम नहीं हुआ। घबराए कलक्टर जे.वी.लिंच को सभी स्कूल व कालेज बंद करने के आदेश देने पड़े। सत्य प्रकाश गुप्ता को हिरासत में लेकर पुरकाजी थाने में यातनाएं दी गई थीं। जेल में रहने के दौरान उन्हें एक साल कैद की सजा सुनाई गई थी।
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छात्रों ने फूंक दिया था डाकखाना
मुजफ्फरनगर। डीएवी कॉलेज की लैब से अरुण गुप्त, त्रिलोकी नाथ शर्मा, रमेश चंद आदि ने रात्रि में दो बजे फास्फोरस चुरा लिया था। कोयले आदि के साथ मिलाकर उसे लिफाफों में भर लिया, जिसे शिव चौक पर स्थित डाकखाने के लेटर बाक्स में डाल दिया। आग लगने पर पुलिस ने छात्र शिवचरण दास को पकड़ लिया था। आंदोलन में ज्यादा वक्त देने से कई विद्यार्थी संस्थागत परीक्षा में बैठने से वंचित हो गए थे। हेड मास्टर किशोरी लाल ने उनके प्राइवेट फार्म भरवा कर एग्जाम दिलवाए। मंसूरपुर में टेलीफोन के तार काटने के अलावा डीएवी हाईस्कूल पर तिरंगा फहरा दिया। अंग्रेजों ने प्रबंधक डॉ हीरालाल को बुलाकर झंडा उतरवाया। मीरापुर के छात्र श्याम लाल को एक साल की सजा मिली थी।
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हैड मास्टर विश्वंभर दयाल का जीवन संघर्षशील था। वे पंडित मदनमोहन मालवीय, लाला लाजपत राय बड़े नेताओं से जुड़े थे। उन्होंने दिल्ली से ‘रोटी’ नाम का दैनिक अखबार निकाला था, जिसका मूल्य एक पैसा था। उन्होंने विद्यार्थियों में आजादी की प्रेरणा जागृत की थी।
- जयप्रकाश आजाद, पूर्व अध्यक्ष जिला बार संघ।
डीएवी कालेज स्वतंत्रता आंदोलन में फिरंगियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की योजना का केंद्र था। अनेक विद्यार्थी आजादी के लिए समर्पित भाव से लड़े और सजा भुगती। इस संस्था का गौरवमयी इतिहास रहा है।
- अनिल जिंदल, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं उपाध्यक्ष डीएवी इंटर कॉलेज प्रबंध समिति।
ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध आजादी के संघर्ष में कालेज के शिक्षकों और विद्यार्थियों का योगदान अमूल्य है। यह जिले की सबसे पुरातन संस्था है, जिसने छात्रों में मातृभूमि की स्वाधीनता और देशभक्ति का जोश भरा था।
- शिव कुमार यादव, प्रधानाचार्य, डीएवी इंटर कालेज।