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एक और बच्चे में मिले फाइलेरिया के लक्षण
अमर उजाला/ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 20 Nov 2018 12:51 AM IST
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जिले में एक और बच्चे में फाइलेरिया (हाथी पांव) के लक्षण मिले हैं। अब तक चार बच्चों में फाइलेरिया के परजीवी के मिलने की पुष्टि हो चुकी है। फाइलेरिया के जिले में पैर पसारने से स्वास्थ्य विभाग भी हैरान है। वेस्ट यूपी इस बीमारी का कभी प्रकोप नहीं रहा है, यह बीमारी पूर्वांचल के जनपदों में ही फैलती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित बच्चों का पूर्वांचल कनेक्शन तलाशना शुरू कर दिया है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इसकी खोज के लिए पहली बार अभियान चलाया गया है। इस अभियान में स्कूली बच्चों के ब्लड सैंपल लेकर किट से उनकी जांच की गई। जिले में 499 बच्चों की जांच की गई, जिनमें से चार में फाइलेरिया के लिए जिम्मेदार परजीवी मिले हैं।
जिला मलेरिया अधिकारी अलका सिंह का कहना है कि यह घबराने की बात नहीं हैं। बच्चों में अभी बीमारी के लक्षण नहीं हैं। यह परजीवी दस वर्षों तक भी शरीर में पड़ा रहता है। जिन बच्चों में फाइलेरिया के परजीवी मिले हैं उनके परिजनों से संपर्क किया जा रहा है। पता लगाया जा रहा है कि वह पूर्वांचल के जनपदों में गए थे या वहां से आए किसी व्यक्ति के संपर्क में रहे थे।
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उपचार के लिए शासन के निर्देशों का इंतजार
जिला मलेरिया अधिकारी अलका सिंह का कहना है कि शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है। जिन बच्चों में फाइलेरिया के परजीवी मिले हैं, उनका उपचार कराया जाएगा। उपचार के बाद परजीवी नष्ट हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि पूर्वांचल के जनपदों में फाइलेरिया को लेकर अभियान चल रहा है। वहां छोटे-बड़े हर व्यक्ति को फाइलेरिया परजीवी की एंटी डोज दी जा रही है। चूंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह बीमारी नहीं फैलती, इसलिए यहां अभियान नहीं चलाया जाता। सीएमओ डाक्टर बीएस मिश्रा ने बताया कि अभी प्रारंभिक जांच हुई है, शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है, शासन के निर्देश पर ही आगे उपचार दिया जाएगा।
संक्रमित मच्छर के काटने से शरीर में घुसते हैं परजीवी
फाइलेरिया संक्रमित मच्छर के काटने से परजीवी कीड़े किसी व्यक्ति के रक्त में चले जाते हैं और प्रणाली (नसों और नोड्स) को प्रभावित करते हैं। वयस्क कीड़े नसों में 4-6 साल तक रहते हैं। मादा कीड़ें खून में लार्वा को जन्म देते हैं जिससे इनकी संख्या बढ़ती रहती है। फाइलेरिया दुनिया भर में विकलांगता और विरूपता का सबसे बड़ा कारण है।
फाइलेरिया के लक्षण
फाइलेरिया से शुरुआत में कोई लक्षण महसूस नहीं होते। समस्याएं तब शुरू होती हैं जब शरीर में वयस्क कीड़े मर जाते हैं। बीमारी से गुर्दे प्रभावित हो जाते हैं। पैरों व शरीर के अन्य हिस्सों में सूजन, स्तन और जननांग में सूजन, त्वचा पर लाल चकत्ते, त्वचा के रंग में बदलाव, रिवर ब्लाइंडनेस, पेट में दर्द आदि परेशानियां होने लगती हैं। लंबे समय तक सूजन से शरीर में विकलांगता आ जाती है।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इसकी खोज के लिए पहली बार अभियान चलाया गया है। इस अभियान में स्कूली बच्चों के ब्लड सैंपल लेकर किट से उनकी जांच की गई। जिले में 499 बच्चों की जांच की गई, जिनमें से चार में फाइलेरिया के लिए जिम्मेदार परजीवी मिले हैं।
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जिला मलेरिया अधिकारी अलका सिंह का कहना है कि यह घबराने की बात नहीं हैं। बच्चों में अभी बीमारी के लक्षण नहीं हैं। यह परजीवी दस वर्षों तक भी शरीर में पड़ा रहता है। जिन बच्चों में फाइलेरिया के परजीवी मिले हैं उनके परिजनों से संपर्क किया जा रहा है। पता लगाया जा रहा है कि वह पूर्वांचल के जनपदों में गए थे या वहां से आए किसी व्यक्ति के संपर्क में रहे थे।
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उपचार के लिए शासन के निर्देशों का इंतजार
जिला मलेरिया अधिकारी अलका सिंह का कहना है कि शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है। जिन बच्चों में फाइलेरिया के परजीवी मिले हैं, उनका उपचार कराया जाएगा। उपचार के बाद परजीवी नष्ट हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि पूर्वांचल के जनपदों में फाइलेरिया को लेकर अभियान चल रहा है। वहां छोटे-बड़े हर व्यक्ति को फाइलेरिया परजीवी की एंटी डोज दी जा रही है। चूंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह बीमारी नहीं फैलती, इसलिए यहां अभियान नहीं चलाया जाता। सीएमओ डाक्टर बीएस मिश्रा ने बताया कि अभी प्रारंभिक जांच हुई है, शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है, शासन के निर्देश पर ही आगे उपचार दिया जाएगा।
संक्रमित मच्छर के काटने से शरीर में घुसते हैं परजीवी
फाइलेरिया संक्रमित मच्छर के काटने से परजीवी कीड़े किसी व्यक्ति के रक्त में चले जाते हैं और प्रणाली (नसों और नोड्स) को प्रभावित करते हैं। वयस्क कीड़े नसों में 4-6 साल तक रहते हैं। मादा कीड़ें खून में लार्वा को जन्म देते हैं जिससे इनकी संख्या बढ़ती रहती है। फाइलेरिया दुनिया भर में विकलांगता और विरूपता का सबसे बड़ा कारण है।
फाइलेरिया के लक्षण
फाइलेरिया से शुरुआत में कोई लक्षण महसूस नहीं होते। समस्याएं तब शुरू होती हैं जब शरीर में वयस्क कीड़े मर जाते हैं। बीमारी से गुर्दे प्रभावित हो जाते हैं। पैरों व शरीर के अन्य हिस्सों में सूजन, स्तन और जननांग में सूजन, त्वचा पर लाल चकत्ते, त्वचा के रंग में बदलाव, रिवर ब्लाइंडनेस, पेट में दर्द आदि परेशानियां होने लगती हैं। लंबे समय तक सूजन से शरीर में विकलांगता आ जाती है।